उत्तराखंड के एक कस्बे में एक शादी उस समय चर्चा का विषय बन गई, जब सात फेरों से ठीक पहले दूल्हा मंडप से गायब हो गया। दुल्हन तन्वी लाल जोड़े में बैठी उसका इंतजार करती रही, लेकिन आधे घंटे बाद भी दूल्हे का कोई पता नहीं चला। उसके परिवार ने पहले इसे सामान्य बात समझा। किसी ने कहा कि दूल्हा फोन पर होगा, तो किसी ने बताया कि वह कपड़े बदलने गया है। मगर जब उसका मोबाइल बंद मिला और उसकी कार भी पार्किंग से गायब मिली, तो घर में अफरा-तफरी मच गई।
दूल्हे का नाम समर था। वह शहर में एक ट्रैवल एजेंसी चलाता था और तन्वी से उसकी मुलाकात करीब एक साल पहले हुई थी। दोनों की शादी परिवारों की सहमति से तय हुई थी। तन्वी ने पुलिस बुलाने की बात कही तो समर के बड़े भाई ने उसे रोक दिया। तभी तन्वी ने सबके सामने कहा, “वह भागा नहीं है। वह किसी से मिलने गया है, और अगर वह व्यक्ति यहां आ गया तो इस शादी का सच सबके सामने आ जाएगा।” उसकी बात सुनकर मेहमान एक-दूसरे का चेहरा देखने लगे।
तन्वी ने बताया कि शादी से एक रात पहले उसे एक महिला का फोन आया था। महिला ने अपना नाम रिया बताया और दावा किया कि समर ने उससे शादी करने का वादा किया था। तन्वी ने पहले उसकी बात पर भरोसा नहीं किया, लेकिन रिया ने एक तस्वीर भेजी जिसमें समर और वह एक साथ खड़े थे। तस्वीर पुरानी थी, फिर भी दोनों के बीच नजदीकी साफ दिखाई दे रही थी। तन्वी ने समर से सवाल किया तो उसने कहा कि रिया उसकी पुरानी दोस्त है और वह शादी में परेशानी पैदा करना चाहती है। तन्वी ने शादी रोकने के बजाय खुद सच जानने का फैसला किया।
इधर, मंडप में इंतजार बढ़ता गया। तभी एक टैक्सी विवाह स्थल के बाहर आकर रुकी। उसमें से एक महिला उतरी और सीधे मंच की ओर बढ़ी। वह रिया थी। उसने किसी से बहस नहीं की, बस समर का एक बैग तन्वी के सामने रख दिया। बैग में कुछ कपड़े, एक पुरानी डायरी और कई टिकट थे। रिया ने कहा, “मैं इसे अपने साथ ले जाने नहीं आई। मैं चाहती हूं कि आप जानें कि यह आदमी पिछले छह महीने से क्या कर रहा था।” समर के परिवार ने उस पर झूठ बोलने का आरोप लगाया, लेकिन रिया ने डायरी खोलकर एक पन्ना दिखाया।
उस पन्ने पर कई तारीखों के सामने अलग-अलग महिलाओं के नाम लिखे थे। तन्वी ने उनमें से एक नाम पहचान लिया—उसकी अपनी सहेली नंदिनी। तन्वी को याद आया कि नंदिनी ने कुछ सप्ताह पहले अचानक उससे समर के बारे में सवाल पूछने शुरू किए थे। उसने यह भी कहा था कि शादी को लेकर उसे जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। अब तन्वी को समझ नहीं आ रहा था कि नंदिनी उसे बचाने की कोशिश कर रही थी या इस कहानी का हिस्सा थी।
तन्वी ने तुरंत नंदिनी को फोन किया। पहले तो उसने कॉल नहीं उठाया, लेकिन लगातार फोन आने पर आखिरकार जवाब दिया। तन्वी ने सिर्फ इतना पूछा, “तुम्हारा नाम समर की डायरी में क्यों है?” दूसरी तरफ कुछ देर खामोशी रही। फिर नंदिनी ने कहा, “क्योंकि मैं उसे पहले से जानती थी, लेकिन वह बात तुम्हें शादी से पहले बताने की हिम्मत नहीं कर पाई।” इसके बाद कॉल कट गया। तन्वी ने दोबारा फोन किया, लेकिन मोबाइल बंद हो चुका था।
कुछ देर बाद समर खुद विवाह स्थल पर लौट आया। उसने बताया कि वह किसी महिला से मिलने नहीं, बल्कि अपने पुराने कारोबारी साझेदार से मिलने गया था। उसका दावा था कि रिया ने बैग में रखी डायरी से कुछ पन्ने निकालकर कहानी को गलत तरीके से पेश किया है। रिया ने इस बात से इनकार किया। दोनों के बीच बहस शुरू हो गई और परिवारों ने पुलिस को बुला लिया। पुलिस ने सभी के बयान दर्ज किए, लेकिन उस समय किसी अपराध की पुष्टि नहीं हुई।
तभी समर के फोन पर एक संदेश आया। उसने स्क्रीन देखते ही फोन बंद कर दिया। तन्वी ने उससे फोन दिखाने को कहा, मगर उसने मना कर दिया। पुलिस अधिकारी ने जब फोन अपने सामने रखने को कहा, तो संदेश फिर दिखाई दिया—“तुमने शादी रोक दी, लेकिन नंदिनी को अब भी नहीं पता कि उसके साथ क्या हुआ था।”
यह पढ़कर रिया ने पहली बार अपना आपा खो दिया। उसने पुलिस से कहा कि नंदिनी को तुरंत ढूंढना जरूरी है। अब मामला सिर्फ एक प्रेम त्रिकोण का नहीं रह गया था। समर, रिया और तन्वी के बीच छिपे पुराने रिश्तों के साथ नंदिनी का नाम भी जुड़ चुका था। पुलिस ने नंदिनी के घर संपर्क किया, लेकिन वह वहां नहीं मिली।
अंतिम सवाल यही था: क्या समर सच में शादी से भागा था, या वह किसी ऐसे राज को छिपाने गया था जो नंदिनी से जुड़ा था? और रिया के पास मौजूद डायरी में आखिर ऐसा क्या लिखा था, जिससे एक शादी कुछ ही मिनटों में जांच के मामले में बदल गई?

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