दो बार इंजेक्शन देने के बाद भी जिंदा रही महिला, अस्पताल ले जाना पड़ा; अमेरिका में मृत्युदंड पर रोक
अमेरिका के टेनेसी राज्य में क्रिस्टा पाइक को घातक इंजेक्शन से मृत्युदंड देने की प्रक्रिया विफल होने के बाद अस्पताल ले जाया गया। रिपोर्टों के मुताबिक, दो बार दवा देने के बावजूद उनकी मौत नहीं हुई। इस घटना के बाद टेनेसी के गवर्नर बिल ली ने 2026 के बाकी समय के लिए निर्धारित सभी मृत्युदंड रोक दिए और मामले की जांच के आदेश दिए।
दो बार इंजेक्शन देने के बाद भी नहीं हुई मौत
रिपोर्टों के अनुसार, क्रिस्टा पाइक को 30 सितंबर 2026 को पेंटोबार्बिटल नामक दवा दी गई थी। उनके वकीलों का दावा है कि इंजेक्शन की प्रक्रिया में दिक्कत आई और दवा देने के बाद भी उनकी सांसें चलती रहीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस दौरान पाइक को गंभीर शारीरिक पीड़ा हुई।
अधिकारियों ने कहा कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया था। अब जांच में यह पता लगाया जाएगा कि प्रक्रिया विफल क्यों हुई और क्या किसी स्तर पर लापरवाही हुई।
मृत्युदंड के बाद अस्पताल क्यों ले जाया गया?
सोशल मीडिया पर सवाल उठ रहा है कि जब पाइक को मृत्युदंड दिया जाना था, तो प्रक्रिया विफल होने के बाद उन्हें अस्पताल क्यों भेजा गया।
इसका कारण यह है कि मृत्युदंड की प्रक्रिया पूरी न होने पर जीवित व्यक्ति को चिकित्सा सहायता की जरूरत हो सकती है। गंभीर हालत में इलाज देना चिकित्सकीय और कानूनी जिम्मेदारी का विषय है।
अमेरिकी संविधान का आठवां संशोधन क्रूर और असामान्य दंड पर रोक लगाता है। हालांकि, इस मामले में संवैधानिक उल्लंघन हुआ या नहीं, यह जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।
किस अपराध में मिली थी मौत की सजा?
क्रिस्टा पाइक को 1995 में 19 वर्षीय कॉलिन स्लेमर की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, पाइक और उसके साथियों ने कॉलिन को सुनसान जगह पर ले जाकर उस पर हमला किया था। इस मामले में पाइक को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई थी।
यदि यह सजा पूरी हो जाती, तो वह दो शताब्दियों से अधिक समय में टेनेसी में मृत्युदंड पाने वाली पहली महिला होतीं।
अब आगे क्या होगा?
गवर्नर बिल ली ने शेष वर्ष के लिए निर्धारित मृत्युदंड रोकने और मामले की स्वतंत्र जांच कराने का फैसला किया है। जांच में दवा देने की प्रक्रिया और उससे जुड़ी चिकित्सकीय व्यवस्थाओं की समीक्षा की जाएगी।
इस घटना ने अमेरिका में घातक इंजेक्शन की प्रक्रिया, मृत्युदंड की विश्वसनीयता और कैदियों के अधिकारों पर बहस फिर शुरू कर दी है। जांच पूरी होने तक मामले में किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
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