बहुत पुराने समय की बात है। एक राज्य में चंद्रलेखा नाम की राजकुमारी रहती थी। वह सुंदर होने के साथ-साथ समझदार भी थी। उसके पिता राजा चाहते थे कि उसका विवाह किसी योग्य राजकुमार से हो, इसलिए उन्होंने पड़ोसी राज्यों से तीन राजकुमारों को आमंत्रित किया।
पहला राजकुमार सोने और रत्नों से भरे संदूक लेकर आया। उसने कहा, “मेरे राज्य में इतना धन है कि राजकुमारी को कभी किसी चीज की कमी नहीं होगी।”
दूसरा राजकुमार अपने घोड़ों और सैनिकों की शक्ति का वर्णन करने लगा। उसने कहा, “मेरी सेना इतनी शक्तिशाली है कि कोई शत्रु हमारे राज्य की ओर आँख उठाकर भी नहीं देख सकता।”
तीसरा राजकुमार साधारण वस्त्र पहनकर आया। उसके पास न सोने का संदूक था, न ही सैनिकों का बड़ा दल। वह अपने साथ केवल कुछ बीज और एक छोटा औजार लाया था।
दरबारियों ने उसे देखकर आपस में बातें करनी शुरू कर दीं। कुछ लोगों ने कहा कि वह राजकुमारी के योग्य नहीं है।
राजकुमारी ने तीनों राजकुमारों से कहा, “महल के पीछे एक बगीचा है, जो कई वर्षों से सूखा पड़ा है। आप तीनों वहाँ जाइए और बताइए कि उसे फिर से हरा-भरा बनाने के लिए आप क्या करेंगे।”
पहला राजकुमार अपने सेवकों को बुलाने लगा। उसने कहा कि बगीचे में सोने के पात्र रखे जाएँ और बाहर से सुंदर पौधे मँगवाए जाएँ, ताकि वह दूर से आकर्षक दिखाई दे।
दूसरे राजकुमार ने कहा कि वह सैनिकों से जमीन साफ करवाएगा और जो भी पौधों को नुकसान पहुँचाएगा, उसे दंड देगा। लेकिन उसने पानी और मिट्टी की समस्या के बारे में कुछ नहीं सोचा।
तीसरा राजकुमार बगीचे में काफी देर तक घूमता रहा। उसने मिट्टी को हाथ में लेकर देखा, सूखे कुएँ की जाँच की और पुराने पेड़ों की जड़ों के आसपास की जमीन खोदी। फिर उसने माली से पूछा कि पहले यहाँ पानी कहाँ से आता था।
माली ने बताया कि एक छोटी नहर कभी बगीचे तक पानी लाती थी, लेकिन वर्षों पहले वह मिट्टी से भर गई थी।
तीसरे राजकुमार ने सबसे पहले नहर साफ करवाने का सुझाव दिया। उसने कहा कि स्थानीय मिट्टी के अनुकूल पौधे लगाए जाएँ और वर्षा का पानी जमा करने की व्यवस्था भी हो। उसने राजकुमारी से कहा, “बगीचे को सुंदर दिखाने से पहले उसे जीवित करना जरूरी है।”
राजकुमारी ने तीनों के उत्तर सुने, लेकिन तुरंत कोई निर्णय नहीं सुनाया। उसने तीनों को एक महीने बाद फिर आने को कहा।
पहले राजकुमार ने बगीचे के द्वार पर सजावट करवा दी। दूसरे ने सैनिकों से झाड़ियाँ कटवा दीं, लेकिन पानी की कमी बनी रही। तीसरे राजकुमार ने माली और गाँव के कारीगरों के साथ मिलकर नहर की सफाई शुरू करवाई। उन्होंने मिट्टी सुधारी और कुछ पौधे लगाए।
एक महीने बाद राजकुमारी बगीचे में पहुँची। पहले दो हिस्सों में सजावट तो थी, लेकिन पौधे मुरझाने लगे थे। तीसरे हिस्से में छोटी-छोटी नई पत्तियाँ निकल रही थीं और मिट्टी में नमी बनी हुई थी।
राजकुमारी ने तीसरे राजकुमार से कहा, “तुमने मुझे बताया कि समस्या को समझे बिना उसका समाधान नहीं किया जा सकता। तुमने दिखावे के बजाय बगीचे की असली जरूरत को पहचाना।”
राजा ने भी उसकी बुद्धिमानी की प्रशंसा की। राजकुमारी ने स्पष्ट किया कि विवाह का निर्णय केवल धन या बाहरी प्रदर्शन से नहीं, बल्कि स्वभाव, जिम्मेदारी और विचारों की समानता से होना चाहिए।
सीख: दिखावे से अधिक महत्वपूर्ण समस्या को समझना और उसका स्थायी समाधान निकालना है। जिम्मेदारी निभाने वाला व्यक्ति केवल वादे करने वाले व्यक्ति से अधिक योग्य होता है।

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