जमींदार ने किसान की बेटी के सामने रखी ऐसी शर्त, जिसमें हर रास्ता उसकी बर्बादी की ओर जाता था, लेकिन लड़की ने अपनी समझदारी से ऐसा दांव चला कि जमींदार की चाल उसी पर भारी पड़ गई


बहुत समय पहले की बात है। एक छोटे से गांव में एक किसान अपनी बेटी के साथ रहता था। किसान मेहनती था, लेकिन आर्थिक परेशानियों के कारण उसने गांव के एक जमींदार से काफी धन उधार ले रखा था। समय बीतता गया, मगर किसान कर्ज नहीं चुका पाया।

जमींदार उम्रदराज और बेहद स्वार्थी व्यक्ति था। एक दिन उसकी नजर किसान की सुंदर बेटी पर पड़ी। उसके मन में एक चालाकी भरा विचार आया। उसने किसान के पास जाकर कहा कि अगर किसान अपनी बेटी की शादी उसके साथ कर दे, तो वह उसका पूरा कर्ज माफ कर देगा।

जमींदार की बात सुनकर किसान और उसकी बेटी दोनों परेशान हो गए। किसान अपनी मजबूरी में फंसा हुआ था और बेटी के सामने भी कोई आसान रास्ता नहीं था।

तभी जमींदार ने एक और प्रस्ताव रखा। उसने कहा कि गांव की पंचायत के सामने यह मामला रखा जाए और पंचायत जो फैसला करेगी, उसे दोनों पक्ष स्वीकार करेंगे।

मामला पंचायत के पास पहुंचा। काफी विचार-विमर्श के बाद पंचायत ने एक अजीब फैसला सुनाया। जमींदार दो पत्थर उठाएगा—एक काला और एक सफेद—और दोनों को एक थैले में डाल देगा। किसान की बेटी बिना देखे थैले से एक पत्थर निकालेगी।

अगर काला पत्थर निकला तो उसे जमींदार से शादी करनी होगी और उसके पिता का कर्ज माफ कर दिया जाएगा। अगर सफेद पत्थर निकला तो उसे शादी नहीं करनी पड़ेगी और पिता का कर्ज फिर भी माफ हो जाएगा। लेकिन अगर लड़की ने पत्थर निकालने से इनकार किया तो उसके पिता को जेल भेज दिया जाएगा।

सभी की नजरें जमींदार पर थीं।

जमींदार नीचे झुका और जमीन पर पड़े पत्थरों के ढेर से दो पत्थर उठाने लगा। उसी समय किसान की बेटी ने ध्यान से देखा कि जमींदार ने चालाकी से दोनों काले पत्थर ही उठा लिए थे।

अब स्थिति बेहद गंभीर थी।

लड़की के सामने तीन रास्ते थे। वह जमींदार की धोखाधड़ी सबके सामने बता सकती थी, लेकिन जमींदार आसानी से अपनी गलती मानने वाला नहीं था। वह पत्थर निकालने से इनकार कर सकती थी, लेकिन इससे उसके पिता को जेल जाना पड़ता। तीसरा रास्ता था कि वह काला पत्थर निकालकर अपनी जिंदगी जमींदार के हवाले कर दे।

कुछ क्षणों तक लड़की शांत खड़ी रही।

फिर अचानक उसके दिमाग में एक ऐसा उपाय आया, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।

वह थैले के पास गई और बिना अंदर देखे अपना हाथ डालकर एक पत्थर निकाल लिया। लेकिन जैसे ही उसने पत्थर बाहर निकाला, उसने जानबूझकर उसे हाथ से नीचे गिरा दिया।

पत्थर जमीन पर पड़े सैकड़ों पत्थरों के बीच जाकर कहीं खो गया।

लड़की ने मासूमियत से कहा, “मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई। पत्थर हाथ से गिरकर बाकी पत्थरों में खो गया। अब इसका पता लगाना मुश्किल है। लेकिन चिंता की कोई बात नहीं है। थैले में जो पत्थर बचा है, उसके रंग से पता चल जाएगा कि मैंने कौन सा पत्थर निकाला था।”

अब सभी लोगों ने थैले के अंदर देखा।

अंदर काला पत्थर था।

पंचायत और वहां मौजूद लोगों ने तुरंत समझ लिया कि लड़की ने निश्चित रूप से सफेद पत्थर ही निकाला होगा, क्योंकि अगर उसने काला पत्थर निकाला होता तो थैले में सफेद पत्थर बचा होता।

जमींदार बुरी तरह फंस चुका था।

अगर वह अपनी चालाकी का खुलासा करता तो उसकी धोखाधड़ी सबके सामने आ जाती। इसलिए उसके पास लड़की के फैसले को स्वीकार करने के अलावा कोई रास्ता नहीं था।

इस तरह किसान का कर्ज माफ हो गया और उसकी बेटी को जमींदार से शादी भी नहीं करनी पड़ी।

इस कहानी से क्या सीख मिलती है?

जीवन में कई बार ऐसी परिस्थितियां आती हैं जब हमें लगता है कि हमारे सामने कोई सही रास्ता बचा ही नहीं है। लेकिन मुश्किल परिस्थिति में घबराने के बजाय अगर हम शांत दिमाग से सोचें, तो कई बार ऐसा रास्ता दिखाई देता है जो पहली नजर में किसी को नजर नहीं आता।

हर समस्या का समाधान केवल सीधे रास्ते से नहीं मिलता। कभी-कभी परिस्थिति को उसी के नियमों के भीतर रहकर अलग तरीके से समझना पड़ता है।

किसान की बेटी ने अपनी ताकत से नहीं, बल्कि अपनी बुद्धि और धैर्य से उस स्थिति को अपने पक्ष में बदल दिया।

इसलिए जब जिंदगी में कोई रास्ता दिखाई न दे, तो हार मानने के बजाय एक बार रुकिए, सोचिए और समस्या को किसी अलग नजरिए से देखने की कोशिश कीजिए। हो सकता है जिस मुश्किल को आप अंत समझ रहे हों, उसी के भीतर समाधान छिपा हो।

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