जेल में बंद हरियाणा के गैंगस्टर से शादी करने कंबोडिया से आई महिला, 12 घंटे की पैरोल में लिए सात फेरे; 4 बच्चों की कहानी भी चर्चा में
हरियाणा के झज्जर जिले के बादली गांव से जुड़ी एक अनोखी शादी की कहानी चर्चा में आई है। यहां जेल में बंद गैंगस्टर मैनपाल ढिल्ला ने कंबोडिया की रहने वाली मेटाचान से विवाह किया। रिपोर्ट के मुताबिक, इस शादी के लिए मैनपाल को अदालत से केवल 12 घंटे की पैरोल मिली थी। उनकी होने वाली पत्नी अपने तीन बच्चों के साथ कंबोडिया से भारत पहुंचीं, जबकि उनकी चौथी बेटी कंबोडिया में ही अपने नाना-नानी के पास रही।
यह कहानी इसलिए भी लोगों का ध्यान खींचती है, क्योंकि इसमें अपराध के पुराने मामले, विदेश में बिताए गए साल, अलग-अलग भाषाएं और जेल की निगरानी के बीच हुई शादी जैसे कई पहलू शामिल हैं।
कौन है हरियाणा का गैंगस्टर मैनपाल ढिल्ला?
मैनपाल ढिल्ला झज्जर जिले के बादली गांव का रहने वाला है। उपलब्ध लेख के मुताबिक, उसके खिलाफ 22 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं और तीन हत्या के मामलों में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। साल 2018 में पैरोल पर बाहर आने के बाद वह जेल वापस नहीं लौटा। इसके बाद पुलिस उसकी तलाश करती रही।
लेख में दावा किया गया है कि मैनपाल ने फर्जी दस्तावेजों और पासपोर्ट के सहारे भारत छोड़ा और कंबोडिया के सिएम रीप शहर पहुंच गया। वहां उसने अपनी पहचान छिपाकर बीयर बार और रेस्तरां का कारोबार शुरू किया। हालांकि, इन विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
कंबोडिया में कैसे हुई मेटाचान से मुलाकात?
रिपोर्ट के अनुसार, कंबोडिया में कारोबार के दौरान मैनपाल की मुलाकात 36 वर्षीय स्थानीय महिला मेटाचान से हुई। शुरुआती बातचीत के बाद दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और वे साथ रहने लगे।
बताया गया है कि दोनों के चार बच्चे हुए—दो बेटे और दो बेटियां। उनके नाम बाहुबली, भगत, आस्था और अदाना बताए गए हैं। मैनपाल की असली पहचान और भारत में उसके आपराधिक मामलों की जानकारी मेटाचान को कब मिली, इस बारे में लेख में पूरी जानकारी नहीं दी गई है।
गिरफ्तारी के बाद जेल में लौटा मैनपाल
लेख के मुताबिक, भारतीय एजेंसियों को मैनपाल के कंबोडिया में होने का पता चला। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत उसे भारत वापस लाया गया और हरियाणा की जेल में बंद कर दिया गया।
मैनपाल के जेल जाने के बाद भी मेटाचान के साथ उसका संपर्क फोन के जरिए बना रहा। लेख में बताया गया है कि शादी के लिए मैनपाल ने अदालत में पैरोल की याचिका दायर की थी।
केवल 12 घंटे की पैरोल में हुई शादी
रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने 24 सितंबर 2026 को सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक 12 घंटे की पैरोल मंजूर की। इसके बाद मेटाचान अपने तीन बच्चों के साथ भारत पहुंचीं। उनकी सबसे छोटी बेटी कंबोडिया में अपने नाना-नानी के पास रही।
शादी के दिन बादली गांव के एक फार्महाउस में समारोह आयोजित किया गया। लेख में दावा किया गया है कि वहां 500 से अधिक मेहमान मौजूद थे और 50 से ज्यादा हथियारबंद पुलिसकर्मी सुरक्षा में तैनात थे। मैनपाल ऑफ-व्हाइट शेरवानी में पहुंचे, जबकि मेटाचान ने लाल रंग का पारंपरिक लहंगा पहना था।
दोनों ने हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार सात फेरे लिए। पैरोल की अवधि पूरी होने पर मैनपाल को रात 8 बजे वापस जेल ले जाया गया।
भाषा बनी चुनौती, अनुवाद ऐप आया काम
शादी के बाद मेटाचान अपने तीन बच्चों के साथ बादली गांव में ससुराल पहुंचीं। लेख के मुताबिक, उन्हें हिंदी नहीं आती थी और परिवार के साथ बातचीत में भाषा की समस्या आती थी। ऐसे में मोबाइल फोन के अनुवाद फीचर का सहारा लिया गया, जिससे परिवार के लोग एक-दूसरे की बात समझने की कोशिश करते थे।
मैनपाल की मां रोशनी देवी ने कथित तौर पर बेटे को आठ साल बाद देखने पर खुशी जताई। उन्होंने उम्मीद व्यक्त की कि बहू और बच्चों के साथ घर में फिर से रौनक लौटेगी।
कहानी का दूसरा पहलू भी समझना जरूरी
यह मामला भावनात्मक पारिवारिक कहानी के रूप में पेश किया गया है, लेकिन मैनपाल की आपराधिक पृष्ठभूमि और सजा का पहलू भी उतना ही महत्वपूर्ण है। शादी होने से अदालत द्वारा सुनाई गई सजा या कानूनी जिम्मेदारियां समाप्त नहीं होतीं। पैरोल भी निर्धारित समय और शर्तों के अधीन अस्थायी रिहाई होती है।
नोट: यह लेख उपलब्ध कराए गए स्रोत-पाठ के आधार पर दोबारा लिखा गया है। इसमें बताए गए आपराधिक मामलों, पैरोल, गिरफ्तारी और शादी के विवरणों को प्रकाशित करने से पहले विश्वसनीय समाचार स्रोतों तथा आधिकारिक रिकॉर्ड से सत्यापित कर लेना चाहिए।

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