राजा ने तीन न्यायाधीशों को एक ही मुकदमा सुलझाने को दिया, दो ने अमीर व्यापारी का साथ दिया, लेकिन तीसरे ने एक छोटी-सी बात से असली अपराधी पकड़ लिया...

 


बहुत पुराने समय की बात है। एक राज्य में राजा वीरेंद्र न्यायप्रिय माना जाता था। उसके दरबार में तीन न्यायाधीश थे, जिन्हें कठिन मामलों का निर्णय करने की जिम्मेदारी दी जाती थी।

एक दिन एक धनी व्यापारी दरबार में पहुँचा। उसने शिकायत की कि उसके गोदाम से चाँदी के दस सिक्के गायब हो गए हैं। उसने आरोप लगाया कि उसके यहाँ काम करने वाले गरीब मजदूर ने सिक्के चुराए हैं।

मजदूर ने कहा, “महाराज, मैंने कोई सिक्का नहीं लिया। मैं निर्दोष हूँ।”

व्यापारी ने दावा किया कि उसने मजदूर को गोदाम से बाहर निकलते देखा था। पहले दो न्यायाधीशों ने व्यापारी की बात पर विश्वास कर लिया। उन्हें लगा कि धनवान और प्रतिष्ठित व्यक्ति झूठ क्यों बोलेगा।

तीसरे न्यायाधीश ने कोई निर्णय देने से पहले दोनों से अलग-अलग प्रश्न पूछे। उसने व्यापारी से पूछा, “तुमने सिक्के कब गिने थे?”

व्यापारी ने कहा, “सुबह सूरज निकलने से पहले।”

फिर न्यायाधीश ने मजदूर से पूछा, “तुम गोदाम से कब निकले थे?”

मजदूर ने उत्तर दिया, “सूरज निकलने के बाद, जब मुझे अनाज की बोरियाँ बाहर रखने का आदेश मिला।”

न्यायाधीश ने गोदाम के रखवाले को बुलाया और पूछा कि उस सुबह गोदाम किसने खोला था। रखवाले ने बताया कि व्यापारी स्वयं सुबह अँधेरा रहते भीतर गया था, लेकिन उसने किसी को सिक्के गिनते नहीं देखा।

तीसरे न्यायाधीश ने व्यापारी से कहा, “तुमने दावा किया कि सिक्के सूर्योदय से पहले गिने थे। फिर तुमने यह भी कहा कि मजदूर को गोदाम से निकलते देखकर तुम्हें चोरी का पता चला। लेकिन मजदूर के आने से पहले ही तुमने सिक्कों की संख्या जाँचने का दावा कैसे किया?”

व्यापारी घबरा गया। उसने अपनी बात बदलने की कोशिश की, लेकिन न्यायाधीश ने उसे शांत रहने को कहा।

इसके बाद गोदाम की तलाशी ली गई। व्यापारी के निजी संदूक में चाँदी के सिक्के मिले। पूछताछ में उसने स्वीकार कर लिया कि उसने अपना कर्ज चुकाने के लिए सिक्के छिपाए थे और दोष मजदूर पर डालना चाहता था।

राजा ने मजदूर को सम्मान सहित मुक्त किया और व्यापारी को दंड दिया। उसने तीसरे न्यायाधीश की प्रशंसा की।

राजा ने पूछा, “तुमने इतने कम समय में सच्चाई कैसे पहचान ली?”

न्यायाधीश ने उत्तर दिया, “महाराज, झूठ बोलने वाला व्यक्ति अक्सर अपनी ही बातों में उलझ जाता है। यदि हम बिना पक्षपात किए ध्यान से सुनें, तो छोटी-सी असंगति भी सच्चाई तक पहुँचा सकती है।”

राजा ने उस दिन आदेश दिया कि न्याय केवल किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा या धन देखकर नहीं किया जाएगा। प्रत्येक मामले में प्रमाण और तथ्यों को महत्व दिया जाएगा।

सीख: न्याय करते समय धन, पद और प्रतिष्ठा से प्रभावित नहीं होना चाहिए। ध्यान से सुनना और तथ्यों की जाँच करना सच्चाई तक पहुँचने का सबसे अच्छा तरीका है।

0/Post a Comment/Comments