इंदौर में रहने वाली 34 वर्षीय राधिका की जिंदगी बाहर से बिल्कुल सामान्य दिखाई देती थी। पति दीपक एक निजी कंपनी में काम करता था और उनका परिवार किसी भी आम मध्यमवर्गीय परिवार की तरह रहता था। लेकिन पिछले आठ महीनों से राधिका हर महीने की 12 तारीख को घर से निकलती, एक अनजान खाते में पैसे जमा करती और लौटने के बाद कई घंटों तक किसी से बात नहीं करती थी।
दीपक को इसकी जानकारी नहीं थी, लेकिन उसकी मां सुशीला ने एक दिन राधिका को फोन पर कहते सुन लिया, “इस बार पैसे मिल जाएंगे, बस दीपक को कुछ पता नहीं चलना चाहिए।” सुशीला के मन में शक बैठ गया। उन्हें लगा कि बहू अपने मायके वालों को छिपकर पैसे भेज रही है या परिवार से कोई बड़ी बात छिपा रही है। उन्होंने बेटे को बताने के बजाय खुद सच्चाई जानने का फैसला किया।
अगली 12 तारीख को राधिका घर से निकली तो सुशीला ने चुपचाप उसका पीछा किया। राधिका बाजार या बैंक जाने के बजाय शहर के पुराने हिस्से में एक छोटे से सिलाई केंद्र पहुंची। वहां एक अधेड़ उम्र की महिला उसका इंतजार कर रही थी। राधिका ने उसे एक लिफाफा दिया और दोनों कुछ देर बात करने के बाद अलग हो गईं। सुशीला ने दूर से उस महिला की तस्वीर खींच ली।
घर लौटकर सुशीला ने तस्वीर दीपक को दिखाई। दीपक ने महिला को पहचानने से इनकार कर दिया, लेकिन तस्वीर देखते ही राधिका घबरा गई। उसने पहली बार अपनी सास से कहा कि वे इस मामले में दखल न दें। उसकी बेचैनी देखकर दीपक को भी संदेह होने लगा। रात को उसने राधिका से सीधे पूछा कि वह महिला कौन है। राधिका ने जवाब देने के बजाय कहा, “अगर मैंने सच बता दिया, तो शायद तुम मुझे कभी माफ नहीं करोगे।”
अगली सुबह राधिका घर पर नहीं थी। उसका फोन बंद था और अलमारी से कुछ कपड़े गायब थे। दीपक ने सोचा कि वह नाराज होकर मायके चली गई होगी, लेकिन उसके मायके वालों ने बताया कि वह वहां नहीं पहुंची। तभी सुशीला को एक अनजान नंबर से संदेश मिला—“जिस औरत को आपने देखा है, उससे मिलने की गलती मत कीजिए। आपकी बहू आपको बचाने की कोशिश कर रही है।”
दीपक ने उसी सिलाई केंद्र पर जाकर पूछताछ की। वहां मौजूद महिला ने पहले कुछ भी बताने से इनकार किया। लेकिन जब दीपक ने राधिका की तस्वीर दिखाई, तो वह उसे एक छोटे कमरे में ले गई। कमरे में पुराने कपड़ों के बीच कई मेडिकल रिपोर्ट और कुछ तस्वीरें रखी थीं। एक तस्वीर देखकर दीपक के हाथ कांपने लगे। उसमें उसकी अपनी बहन पूजा थी, जिससे परिवार का संपर्क सात साल पहले टूट गया था।
महिला ने बताया कि पूजा ने घरेलू हिंसा से बचकर अपना जीवन दोबारा शुरू किया था। राधिका को कुछ महीने पहले उसके बारे में पता चला और उसने गुप्त रूप से उसकी मदद करनी शुरू कर दी। पूजा नहीं चाहती थी कि उसका वर्तमान पता परिवार तक पहुंचे, क्योंकि उसे डर था कि पुराने विवाद फिर शुरू हो जाएंगे। राधिका ने दीपक से सच इसलिए छिपाया था क्योंकि उसे मालूम था कि परिवार में कुछ लोग पूजा को वापस लाने के लिए दबाव डालेंगे।
लेकिन असली मोड़ तब आया जब दीपक को पता चला कि राधिका अचानक गायब नहीं हुई थी। वह पूजा के साथ एक कानूनी सहायता केंद्र गई थी, जहां दोनों पुराने मामले से जुड़े दस्तावेज जमा करने वाली थीं। राधिका का फोन बंद होने की वजह भी सामने आ गई—उसे लगातार धमकी भरे संदेश मिल रहे थे और उसने अपनी सुरक्षा के लिए फोन बंद कर दिया था।
दीपक ने पुलिस की मदद से राधिका से संपर्क किया। राधिका सुरक्षित थी और उसने साफ कहा कि वह पूजा की इच्छा के खिलाफ उसका पता किसी को नहीं बताएगी। दीपक को समझ आया कि उसकी पत्नी कोई गलत रिश्ता या गुप्त आर्थिक लेनदेन नहीं छिपा रही थी, बल्कि एक ऐसे इंसान की मदद कर रही थी जो अपने अतीत से दूर रहना चाहता था। जिस राज को परिवार धोखा समझ रहा था, उसके पीछे किसी की सुरक्षा और नई जिंदगी की लड़ाई छिपी थी।

Post a Comment