लखनऊ में रहने वाले 38 वर्षीय अभिषेक की शादी को सात साल हो चुके थे। उसकी पत्नी मीनाक्षी घर संभालती थी और दोनों की जिंदगी सामान्य चल रही थी। लेकिन पिछले छह महीनों से अभिषेक के घर के पते पर हर महीने एक लिफाफा आने लगा था। लिफाफे पर भेजने वाले का नाम नहीं होता था। उस पर केवल एक छोटे बच्चे का नाम लिखा रहता था—आरव।
अभिषेक ने पहली बार लिफाफा देखा तो उसे लगा कि डाक गलती से उनके घर आ गई है। उसने मीनाक्षी को बताया, लेकिन लिफाफे का नाम सुनते ही उसके चेहरे पर घबराहट दिखाई दी।
उसने कहा, “शायद किसी पुराने पड़ोसी का बच्चा होगा। इसे रहने दो।”
अभिषेक को उसका जवाब अजीब लगा। अगले महीने जब वैसा ही एक और लिफाफा आया, तो उसने उसे अलमारी में रख दिया। तीसरे महीने भी वही हुआ। अब उसे यकीन हो गया कि इन पत्रों का उसकी पत्नी से कोई संबंध जरूर है।
एक दिन मीनाक्षी बाजार गई हुई थी। अभिषेक ने अलमारी से पुराने लिफाफे निकाले और उनमें से एक खोल दिया।
अंदर एक बच्चे की तस्वीर और हाथ से लिखा छोटा-सा पत्र था।
पत्र में लिखा था, “मां, इस बार स्कूल में मेरा नाम पुरस्कार के लिए आया है। आपने कहा था कि जब मैं अच्छा करूंगा तो आप मुझसे मिलने जरूर आएंगी।”
पत्र पढ़कर अभिषेक के हाथ कांपने लगे। उसने मीनाक्षी से इस बारे में पूछने का फैसला किया।
शाम को मीनाक्षी घर लौटी तो अभिषेक ने उसके सामने सभी लिफाफे रख दिए।
पहले तो वह चुप रही, फिर उसकी आंखों में आंसू आ गए।
मीनाक्षी ने बताया कि शादी से कुछ साल पहले वह एक अनाथालय में बच्चों की देखभाल करने वाली संस्था के साथ काम करती थी। वहीं उसकी मुलाकात आरव से हुई थी। वह बच्चा बहुत कम उम्र में अपने माता-पिता को खो चुका था और मीनाक्षी से भावनात्मक रूप से जुड़ गया था।
बाद में आरव को दूसरे शहर के एक बाल-देखभाल केंद्र में भेज दिया गया। मीनाक्षी ने उससे संपर्क बनाए रखने का वादा किया था। वह हर महीने उसे पत्र लिखती और उसकी पढ़ाई में मदद करती थी।
लेकिन कहानी का एक और पहलू था।
अभिषेक ने पूछा, “अगर यह सब इतना सामान्य था, तो तुमने मुझसे छिपाया क्यों?”
मीनाक्षी ने बताया कि आरव के कानूनी अभिभावक नहीं चाहते थे कि उसकी पुरानी जिंदगी से जुड़े लोग बिना अनुमति उससे मिलने आएं। इसलिए वह उसकी निजी जानकारी और देखभाल केंद्र का पता गोपनीय रख रही थी। उसे डर था कि बात गलत समझी जाएगी और बच्चे की निजता प्रभावित होगी।
अभिषेक ने पत्रों को दोबारा देखा। उनमें कोई गैरकानूनी बात नहीं थी, लेकिन पत्नी का इतने समय तक चुप रहना उसे दुखी कर गया।
कुछ दिनों बाद दोनों ने उचित अनुमति लेकर आरव के देखभाल केंद्र से संपर्क किया। वहां से पुष्टि हुई कि बच्चा सुरक्षित है और उसे मीनाक्षी के पत्र मिलते रहे हैं।
अभिषेक ने भी आरव के लिए एक पत्र लिखा और उसके अच्छे भविष्य की कामना की।
जिस बच्चे के नाम से आने वाले पत्रों ने पति के मन में शक पैदा कर दिया था, वही पत्र आखिरकार एक पुराने वादे और एक बच्चे से जुड़े भावनात्मक रिश्ते की कहानी निकले।
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