उत्तर प्रदेश के कानपुर में रहने वाले 35 वर्षीय विवेक की शादी को चार साल हो चुके थे। उसकी पत्नी सिमरन 30 साल की थी। दोनों एक अपार्टमेंट में रहते थे और उनकी जिंदगी सामान्य चल रही थी। लेकिन पिछले दो महीनों से विवेक ने एक अजीब बात नोटिस की। सिमरन हर रात ठीक बारह बजे छत पर जाती, वहां एक खाली कुर्सी रखती और करीब दस मिनट बाद वापस लौट आती।
विवेक ने कई बार उससे इसका कारण पूछा, लेकिन सिमरन हर बार बात बदल देती। कभी कहती कि उसे खुली हवा में बैठना पसंद है, तो कभी कहती कि उसे नींद नहीं आती। मगर विवेक को हैरानी इस बात की थी कि सिमरन छत पर बैठती भी नहीं थी। वह सिर्फ कुर्सी रखती, कुछ देर उसे देखती और लौट आती।
एक रात विवेक ने अपार्टमेंट के CCTV कैमरे की रिकॉर्डिंग देखी। उसमें सिमरन छत पर कुर्सी रखने के बाद सामने वाली इमारत की ओर देखती नजर आ रही थी। कुछ ही देर में सामने की इमारत की एक खिड़की में रोशनी जली और पर्दे के पीछे किसी व्यक्ति की परछाईं दिखाई दी। यह देखकर विवेक के मन में शक पैदा हो गया कि सिमरन किसी से छिपकर संपर्क कर रही है।
अगली रात उसने सिमरन से कुछ नहीं कहा और उसके पीछे छत पर पहुंच गया। सिमरन कुर्सी के पास खड़ी थी। वह सामने वाली इमारत की खिड़की को देख रही थी। अचानक वहां रोशनी जली। सिमरन की आंखों में आंसू आ गए और उसने धीमी आवाज में कहा, “मां, आज भी मैं तुम्हारा इंतजार कर रही हूं।”
विवेक यह सुनकर चौंक गया। उसने सिमरन से पूछा कि वह किससे बात कर रही है। पहले तो सिमरन ने कुछ नहीं कहा, फिर वह फूट-फूटकर रोने लगी। उसने बताया कि शादी से पहले उसकी मां उसी अपार्टमेंट के सामने वाली इमारत में रहती थीं। मां और बेटी के बीच एक पारिवारिक विवाद के कारण बातचीत बंद हो गई थी। कुछ समय बाद उसकी मां की बीमारी से मृत्यु हो गई। सिमरन को उनके अंतिम दिनों में उनसे मिलने का मौका नहीं मिला था।
शादी के बाद सिमरन को पता चला कि उसकी मां अक्सर रात में छत पर बैठकर सामने वाली इमारत की ओर देखा करती थीं, जहां कभी उनकी बेटी रहती थी। मां की पुरानी पड़ोसन ने उसे यह बात बताई थी। उसी दिन से सिमरन हर रात छत पर एक खाली कुर्सी रखती थी। वह कल्पना करती थी कि उसकी मां उस कुर्सी पर बैठी हैं और दोनों के बीच अधूरी बातचीत पूरी हो रही है।
लेकिन कहानी में एक और मोड़ था। विवेक ने पूछा कि सामने वाली खिड़की में दिखाई देने वाली परछाईं किसकी थी। सिमरन ने बताया कि वहां अब उसकी मां की पुरानी पड़ोसन रहती थीं। उन्हें सिमरन की इस आदत के बारे में पता था। जब भी वह छत पर कुर्सी रखतीं, पड़ोसन खिड़की में रोशनी जला देतीं—यह संकेत देने के लिए कि उन्हें सिमरन का इंतजार करना याद है।
विवेक को एहसास हुआ कि जिस बात को वह शक की नजर से देख रहा था, उसके पीछे पत्नी का वर्षों पुराना पछतावा छिपा था। अगले दिन उसने सिमरन के साथ बैठकर उसकी मां की तस्वीरें देखीं। पहली बार सिमरन ने अपने मन की सारी बातें खुलकर बताईं। उस रात छत पर कुर्सी फिर रखी गई, लेकिन इस बार विवेक भी उसके पास बैठा था।
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