सालों तक डकारों को समझती रही मामूली परेशानी, जांच में सामने आया स्टेज-3 कोलन कैंसर!


कई बार शरीर में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को हम सामान्य परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। खाने के बाद डकार आना भी ऐसी ही एक आम बात है। लेकिन जब कोई लक्षण लगातार बना रहे या उसके साथ दूसरी परेशानियां भी दिखाई देने लगें, तो उसे हल्के में लेना सही नहीं है। अमेरिका की एक युवा नर्स की कहानी इसी बात की याद दिलाती है।

लगातार डकार आने लगीं, फिर बढ़ने लगी परेशानी

मीडिया में प्रकाशित जानकारी के मुताबिक, अमेरिका के फ्लोरिडा में रहने वाली बेली मैकब्रीन को पहले सामान्य तौर पर डकार नहीं आती थीं। लेकिन अक्टूबर 2021 के आसपास उन्हें बार-बार डकार आने लगीं। शुरुआत में उन्होंने इसे मामूली समस्या समझा।

इसके बाद उन्हें एसिड रिफ्लक्स की परेशानी होने लगी। समय बीतने के साथ पेट में दर्द, भूख कम लगना और शौच करने में कठिनाई जैसे लक्षण भी सामने आए। जब समस्या बढ़ी तो चिकित्सकीय जांच कराई गई। रिपोर्ट के अनुसार, सीटी स्कैन में उनकी बड़ी आंत यानी कोलन में ट्यूमर का पता चला और उन्हें स्टेज-3 कोलन कैंसर होने की जानकारी मिली।

कोलन कैंसर के किन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए?

कोलन कैंसर यानी बड़ी आंत का कैंसर अलग-अलग लोगों में अलग लक्षण पैदा कर सकता है। इसके संभावित संकेतों में शामिल हैं:

  • मल में खून आना या मलाशय से रक्तस्राव होना

  • लगातार कब्ज या दस्त रहना

  • शौच की आदतों में लंबे समय तक बदलाव

  • पेट में बार-बार दर्द, ऐंठन या असहजता

  • ऐसा महसूस होना कि शौच के बाद भी आंत पूरी तरह खाली नहीं हुई

  • बिना स्पष्ट कारण कमजोरी या थकान

  • अनचाहा वजन कम होना

इन लक्षणों का मतलब हमेशा कैंसर होना नहीं है। कब्ज, एसिड रिफ्लक्स और पेट की दूसरी समस्याएं भी ऐसे कुछ लक्षण पैदा कर सकती हैं। लेकिन लक्षण लगातार बने रहें, बढ़ें या मल में खून दिखाई दे, तो चिकित्सकीय जांच जरूरी है।

क्या बार-बार डकार आना कैंसर का संकेत है?

सिर्फ डकार आना कोलन कैंसर का सामान्य या भरोसेमंद संकेत नहीं माना जाता। डकार अक्सर हवा निगलने, जल्दी खाने, गैस वाले पेय पदार्थ पीने या एसिड रिफ्लक्स जैसी वजहों से आती है। हालांकि, लगातार असामान्य डकारों के साथ पेट दर्द, भूख में कमी, मल त्याग में बदलाव या अनचाहा वजन कम होने जैसे लक्षण हों, तो डॉक्टर से सलाह लेना उचित है।

इस कहानी से मिलने वाली सीख यही है कि किसी एक लक्षण के आधार पर गंभीर बीमारी का अनुमान न लगाएं, लेकिन शरीर में लगातार होने वाले बदलावों को अनदेखा भी न करें। समय पर जांच से बीमारी की पहचान और उचित उपचार में मदद मिल सकती है।

स्वास्थ्य संबंधी सूचना: यह लेख सामान्य जागरूकता के लिए है। निदान के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी है।

0/Post a Comment/Comments