20 साल से बंद मंदिर में आधी रात को बजती थी घंटी, जब गांव वालों ने दरवाजा खोला तो अंदर का नज़ारा देखकर कांप उठे...


एक छोटे से गांव में एक पुराना मंदिर था। करीब बीस साल पहले मंदिर के पुजारी की अचानक मृत्यु हो गई थी। उसके बाद मंदिर का दरवाजा बंद कर दिया गया। गांव के बुजुर्ग कहते थे कि उस मंदिर में रात के समय जाना ठीक नहीं है।

कई साल बीत गए। एक रात गांव के चौकीदार ने आधी रात को मंदिर की घंटी बजने की आवाज सुनी। वह दौड़कर गांव पहुंचा और लोगों को बताया, लेकिन किसी ने उसकी बात पर विश्वास नहीं किया।

अगली रात फिर वही घंटी बजी।

इस बार गांव के तीन नौजवानों ने सच जानने का फैसला किया। वे लालटेन लेकर मंदिर पहुंचे। दरवाजे पर पुराना ताला लगा था और उस पर जंग चढ़ी हुई थी। उन्होंने दरवाजा धकेला तो वह चरमराता हुआ खुल गया।

अंदर धूल जमी थी। टूटी हुई मूर्तियों के पास सूखे फूल पड़े थे। लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि घंटी अपने आप धीरे-धीरे हिल रही थी।

तभी उन्हें मंदिर के पीछे से किसी के खांसने की आवाज सुनाई दी।

तीनों डरते हुए पीछे पहुंचे। वहां दीवार के पास एक छोटा-सा कमरा था, जिसका दरवाजा बाहर से बंद था। उन्होंने दरवाजा खोला तो अंदर एक बूढ़ा आदमी बैठा मिला। उसके पास पानी का घड़ा, कुछ सूखी रोटियां और मंदिर के पुराने कागज रखे थे।

नौजवानों ने पूछा, “बाबा, आप यहां इतने सालों से क्या कर रहे हैं? और रात में घंटी कौन बजाता है?”

बूढ़े ने कांपती आवाज में जवाब दिया, “मैं इस मंदिर का पुराना सेवक हूं। पुजारी की मृत्यु के बाद मंदिर बंद हो गया था। मैं बीमार पड़ गया और यहीं फंसकर रह गया। दिन में गांव वाले आते-जाते थे, लेकिन किसी ने इस कमरे की ओर ध्यान नहीं दिया।”

“लेकिन घंटी?”

बूढ़े ने मंदिर की छत की ओर इशारा किया। वहां एक टूटी हुई खिड़की थी। रात में तेज हवा चलती तो खिड़की से बंधी पुरानी रस्सी हिलती और घंटी बजने लगती थी।

तीनों नौजवानों को रहस्य समझ आ गया। वे बूढ़े को गांव ले गए और उसकी देखभाल की व्यवस्था की।

अगले दिन गांव वालों ने मंदिर की सफाई की। तभी पुजारी के पुराने कागजों में एक पत्र मिला। उसमें लिखा था कि मंदिर के पीछे की जमीन पर एक कुआं था, जिसे वर्षों पहले मिट्टी से भर दिया गया था। कुएं का पानी कभी पूरे गांव की प्यास बुझाता था।

गांव वालों ने उस जगह की खुदाई करवाई। कुछ दिनों की मेहनत के बाद उन्हें कुएं के पुराने पत्थर दिखाई दिए। उसकी मरम्मत हुई और कुछ समय बाद वह फिर से पानी देने लगा।

जिस मंदिर को लोग डर की वजह से भूल चुके थे, वही मंदिर पूरे गांव के लिए जीवन का सहारा बन गया।

कहानी की सीख: कई बार जिस चीज से हम डरते हैं, उसके पीछे कोई साधारण सच छिपा होता है। बिना जांचे-परखे अफवाहों पर विश्वास करने के बजाय सच्चाई जानने की कोशिश करनी चाहिए।

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