मध्य प्रदेश के इंदौर में 62 वर्षीय कारोबारी दिनेश मल्होत्रा की मौत के बाद उनके परिवार को लगा कि अब सारी परेशानियां खत्म हो जाएंगी। अंतिम संस्कार के दो दिन बाद उनका बेटा राघव बैंक से पिता के खाते का विवरण लेने पहुंचा। वह कारोबार से जुड़े भुगतान जांचना चाहता था। लेकिन खाते में दर्ज एक अजीब लेन-देन ने उसे रोक दिया। पिछले पंद्रह वर्षों से हर महीने एक ही महिला के खाते में पैसे भेजे जा रहे थे। आखिरी भुगतान दिनेश की मौत से ठीक एक दिन पहले हुआ था।
उस महिला का नाम कविता था। बैंक रिकॉर्ड के मुताबिक, वह शहर के एक निजी अस्पताल में नर्स थी। राघव ने मां सुनीता से पूछा कि क्या वह कविता को जानती हैं। सुनीता ने नाम सुनते ही नजरें फेर लीं और कहा कि शायद वह पिता के कारोबार में काम करने वाली कोई कर्मचारी होगी। मगर राघव को यह जवाब ठीक नहीं लगा। पिता की कंपनी में किसी कविता नाम की कर्मचारी का रिकॉर्ड नहीं था। उसने अस्पताल जाकर पता लगाने का फैसला किया।
अस्पताल में कविता ड्यूटी पर थी। दिनेश का नाम सुनते ही वह कुछ पल के लिए चुप हो गई। राघव ने पैसे भेजने का कारण पूछा तो उसने कहा, “तुम्हारे पिता ने मेरी मदद की थी। मैं यह बात किसी को नहीं बताना चाहती थी।” उसने और कुछ बताने से इनकार कर दिया। राघव वापस लौटने लगा, तभी कविता ने उसे आवाज दी और एक पुराना लिफाफा थमा दिया। उसने कहा, “इसे अपनी मां के सामने खोलना। इसमें तुम्हारे पिता का सच है, लेकिन यह सच तुम्हारे परिवार को तोड़ भी सकता है।”
घर पहुंचकर राघव ने लिफाफा खोला। उसमें पंद्रह साल पुरानी एक तस्वीर थी। तस्वीर में उसके पिता दिनेश एक युवा कविता के साथ अस्पताल के बाहर खड़े थे। पीछे तारीख लिखी थी और नीचे एक छोटी-सी पर्ची थी—“अगर कभी राघव सवाल करे, तो उसे पूरी बात बताना।” राघव ने मां को तस्वीर दिखाई। सुनीता की आंखें भर आईं। उसने बताया कि पंद्रह साल पहले दिनेश कई महीनों तक देर रात घर लौटते थे। उस समय सुनीता को शक हुआ था कि उनके पति का किसी दूसरी महिला से संबंध है, लेकिन दिनेश ने हमेशा इनकार किया।
राघव को लगा कि उसके पिता ने वर्षों तक एक प्रेम संबंध छिपाया था। वह अगले दिन कविता से फिर मिलने गया। इस बार कविता ने बताया कि वह दिनेश से तब मिली थी जब उसकी छोटी बहन गंभीर बीमारी के कारण अस्पताल में भर्ती थी। इलाज का खर्च उठाना उसके लिए मुश्किल था। दिनेश ने आर्थिक सहायता की थी और बाद में भी हर महीने पैसे भेजते रहे। कविता ने कहा कि दिनेश ने कभी उससे प्रेम संबंध का दावा नहीं किया था। वह उनकी मदद को एहसान नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी मानती थी। लेकिन कविता ने यह नहीं बताया कि दिनेश ने उसे इतनी बड़ी रकम क्यों दी।
राघव ने पिता की पुरानी फाइलें खंगालीं। एक दस्तावेज में उसे पता चला कि पंद्रह साल पहले दिनेश की कंपनी में वित्तीय गड़बड़ी हुई थी। कंपनी के खाते से बड़ी रकम गायब हुई थी और जांच के बाद एक कर्मचारी को नौकरी से निकाल दिया गया था। उस कर्मचारी का नाम महेश था—कविता का पति। राघव को शक हुआ कि उसके पिता ने कविता को पैसे देकर उस पुराने मामले को दबाने की कोशिश की थी। उसने यह जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने शुरुआती जांच में पाया कि कुछ भुगतान उस समय हुए थे जब महेश पर कंपनी से पैसे निकालने का आरोप लगा था।
कविता ने पूछताछ में बताया कि महेश ने चोरी नहीं की थी। उसके मुताबिक, दिनेश को बाद में असली गड़बड़ी का पता चल गया था, लेकिन तब तक महेश की नौकरी जा चुकी थी और उसका परिवार बिखर चुका था। दिनेश ने सीधे माफी मांगने के बजाय आर्थिक मदद शुरू कर दी थी। कविता के पास इस दावे का पूरा प्रमाण नहीं था, मगर उसने पुलिस को एक पुरानी डायरी दी जो दिनेश ने उसे कई साल पहले सौंपी थी। डायरी में कंपनी के भुगतान और कुछ कर्मचारियों के नाम लिखे थे।
डायरी की जांच में एक नया नाम सामने आया—दिनेश का तत्कालीन लेखाकार, जो अब शहर में एक सफल कारोबारी बन चुका था। पुलिस ने उसे पूछताछ के लिए बुलाया तो उसने पुराने मामले से कोई संबंध होने से इनकार किया। मगर राघव ने डायरी के आखिरी पन्ने पर एक वाक्य देखा, जिसे उसके पिता ने अपनी मृत्यु से कुछ दिन पहले लिखा था—“कविता को पैसे देना बंद नहीं कर सकता, क्योंकि महेश को बर्बाद करने वाला आज भी खुद को ईमानदार साबित कर रहा है।”
राघव के सामने अब अपने पिता की एक ऐसी छवि थी जिसे वह कभी नहीं जानता था। संभव था कि दिनेश ने गलती सुधारने की कोशिश की हो, लेकिन यह भी साफ नहीं था कि असली गड़बड़ी किसने की थी और इतने वर्षों तक सच क्यों छिपाया गया। कविता ने केवल इतना कहा कि दिनेश की मौत से कुछ सप्ताह पहले कोई व्यक्ति उससे मिलने आया था और उसने धमकी दी थी कि अगर उसने पुराने मामले का जिक्र किया, तो उसके परिवार को परेशानी होगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यह था: क्या दिनेश की मौत से पहले उस पुराने मामले का सच सामने आने वाला था? और क्या उनकी मृत्यु का उस पंद्रह साल पुराने वित्तीय घोटाले से कोई संबंध था, या परिवार एक दुखद संयोग को अपराध समझ रहा था?

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