दिल्ली में एक रात तेज बारिश हो रही थी। सड़कें पानी से भर चुकी थीं और ज्यादातर लोग अपने घरों में पहुंचने की जल्दी में थे। इसी दौरान 29 वर्षीय अमन, जो बाइक टैक्सी चलाता था, अपनी आखिरी सवारी छोड़कर घर लौट रहा था।
रास्ते में उसे सड़क किनारे एक बुजुर्ग महिला दिखाई दी। महिला बारिश में पूरी तरह भीग चुकी थी और बार-बार हाथ देकर लोगों को रोकने की कोशिश कर रही थी। अमन ने बाइक रोककर पूछा, “माता जी, आपको कहीं जाना है?”
महिला ने कांपती आवाज में कहा, “बेटा, मुझे अस्पताल जाना है। मेरे पास पैसे भी पूरे नहीं हैं... अगर तुम मुझे वहां तक छोड़ दोगे तो बहुत बड़ी मदद होगी।”
अमन ने बिना ज्यादा सवाल किए अपना रेनकोट उन्हें दिया और बाइक पर बैठा लिया।
रास्ते में उसने पूछा, “अस्पताल में कौन है?”
महिला कुछ देर चुप रहीं। फिर बोलीं, “मेरा बेटा भर्ती है। सुबह से उसका फोन नहीं आया था। पड़ोसी ने बताया कि उसकी तबीयत अचानक खराब हो गई है।”
अस्पताल पहुंचने के बाद अमन ने महिला को अंदर तक पहुंचाया। जब महिला ने किराया देने के लिए अपना पर्स खोला तो उसमें कुछ ही नोट थे।
उन्होंने कहा, “बेटा, मेरे पास इतने ही पैसे हैं। बाकी मैं बाद में दे दूंगी।”
अमन ने पैसे लेने से साफ मना कर दिया।
उसने कहा, “माता जी, आज किराए की बात मत कीजिए। पहले अपने बेटे को देखिए।”
महिला की आंखों में आंसू आ गए।
अमन उन्हें अस्पताल की इमरजेंसी तक लेकर गया। वहां पहुंचते ही महिला अपने बेटे को देखकर रोने लगीं। डॉक्टरों ने बताया कि उसकी हालत गंभीर है और तुरंत इलाज शुरू करना होगा।
अमन वापस जाने लगा, लेकिन तभी महिला ने उसका हाथ पकड़ लिया।
उन्होंने कहा, “बेटा, तुम चले मत जाना। मुझे अस्पताल की प्रक्रिया समझ नहीं आ रही।”
अमन करीब दो घंटे तक वहीं रुका। उसने कागजी प्रक्रिया पूरी कराने में मदद की और महिला के बेटे को भर्ती करवाने के बाद ही वहां से निकला।
अगली सुबह अमन को अस्पताल से फोन आया।
महिला ने बताया कि उनके बेटे की हालत अब स्थिर है।
लेकिन इसके बाद महिला ने अमन को जो बात बताई, उसने उसे भावुक कर दिया।
उन्होंने कहा कि उनके बेटे ने कुछ साल पहले एक बाइक खरीदने के लिए कर्ज लिया था। परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के बाद वह कर्ज चुकाने के लिए लगातार मेहनत कर रहा था। कुछ दिन पहले ही उसने मां से कहा था कि जब पैसे आएंगे तो सबसे पहले उनका पुराना चश्मा बनवाएगा।
महिला ने रोते हुए कहा, “कल रात अगर तुम नहीं मिलते तो शायद मैं अस्पताल तक पहुंच ही नहीं पाती।”
अमन ने जवाब दिया, “माता जी, मैंने कुछ बड़ा नहीं किया। सड़क पर आपको अकेला देखकर रुकना जरूरी लगा।”
महिला ने जाते-जाते अमन को आशीर्वाद दिया और कहा, “बेटा, पैसे तो बहुत लोग कमाते हैं, लेकिन किसी अनजान के लिए रुकने वाले लोग कम मिलते हैं।”
अमन उस दिन घर तो लौट आया, लेकिन उसके फोन पर उस सवारी की बुकिंग अब भी दिखाई दे रही थी।
किराया था कुछ रुपये का, लेकिन उस रात मिली दुआ शायद उससे कहीं ज्यादा कीमती थी।
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