रात के अंधेरे में सुनसान सड़क पर परेशान थी महिला, Rapido ड्राइवर ने देखा तो नहीं बढ़ाया आगे का सफर... फिर जो किया, उसने जीत लिया सबका दिल


रात करीब साढ़े ग्यारह बजे नेहा अपनी ऑफिस की शिफ्ट खत्म करके घर लौट रही थी। उसने घर पहुंचने के लिए Rapido बाइक बुक की थी। रास्ता लंबा था और शहर से बाहर निकलते ही सड़क पर लोगों की आवाजाही काफी कम हो गई थी। बाइक चला रहा ड्राइवर रवि चुपचाप अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहा था।

करीब आधे रास्ते में नेहा का फोन अचानक बंद हो गया। उसने कई बार फोन चालू करने की कोशिश की, लेकिन बैटरी पूरी तरह खत्म हो चुकी थी। उसी समय बाइक भी एक सुनसान इलाके में पहुंच गई। नेहा ने घबराकर रवि से कहा कि थोड़ा आगे रुक जाएं।

रवि ने बाइक रोककर पूछा, "मैडम, सब ठीक है?"

नेहा कुछ सेकंड तक चुप रही। फिर उसने बताया कि उसे घर का रास्ता पता है, लेकिन फोन बंद होने के कारण वह अपने परिवार से संपर्क नहीं कर पा रही है। उसे यह भी डर था कि घर वालों को पता नहीं चलेगा कि वह कहां है।

रवि ने कहा, "आप चिंता मत कीजिए, पहले किसी सुरक्षित जगह चलते हैं।"

वह बाइक लेकर पास की एक रोशन दुकान के सामने रुक गया। वहां कुछ लोग मौजूद थे। रवि ने नेहा को वहीं बैठने के लिए कहा और दुकानदार से उसका फोन चार्ज करने की व्यवस्था करने को कहा।

कुछ मिनट बाद नेहा का फोन चालू हुआ।

उसने तुरंत अपने भाई को फोन किया।

लेकिन भाई ने फोन उठाते ही कहा, "तुम अभी घर मत आना।"

नेहा घबरा गई।

उसने पूछा, "क्यों?"

भाई ने बताया कि घर के बाहर पिछले करीब आधे घंटे से एक अनजान कार खड़ी है। वह कई बार दरवाजे के सामने आकर वापस जा चुकी थी। परिवार को समझ नहीं आ रहा था कि वह कौन है।

नेहा ने रवि की तरफ देखा।

अब वह पहले से कहीं ज्यादा परेशान थी।

रवि ने पूछा, "आपके घर में कोई और है?"

नेहा ने बताया कि उसकी मां और छोटा भाई घर पर हैं।

रवि ने कहा, "अभी अकेले वहां जाना ठीक नहीं होगा। पहले किसी भरोसेमंद व्यक्ति को बुला लेते हैं।"

नेहा ने परिवार के एक रिश्तेदार को फोन किया। लेकिन वह शहर के दूसरे हिस्से में था और वहां पहुंचने में समय लगना था।

रवि ने कहा, "मैं आपको अकेले नहीं छोड़ूंगा।"

करीब आधे घंटे बाद रिश्तेदार वहां पहुंचा। रवि ने नेहा को उसके साथ भेज दिया।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।

अगली सुबह नेहा को अपने भाई से पता चला कि रात में उनके घर के बाहर खड़ी कार का नंबर पड़ोस के CCTV में रिकॉर्ड हुआ था। परिवार ने पुलिस को इसकी जानकारी दे दी थी।

पुलिस ने कार के नंबर की जांच की तो पता चला कि वह कार एक ऐसे व्यक्ति के नाम पर थी जिसे नेहा का परिवार जानता तक नहीं था।

नेहा को याद आया कि पिछले कुछ दिनों से उसे अनजान नंबरों से फोन आ रहे थे। वह हर बार उन्हें नजरअंदाज कर देती थी।

उसने अपना फोन चेक किया तो कई मिस्ड कॉल और कुछ अजीब संदेश मिले।

एक संदेश में लिखा था—

"तुम्हें लगता है हम तुम्हें ढूंढ नहीं पाएंगे?"

नेहा यह पढ़कर डर गई।

उसने तुरंत पुलिस को फोन दिखाया।

जांच शुरू हुई तो पता चला कि नेहा की ऑफिस से जुड़ी कुछ निजी जानकारी किसी अनजान व्यक्ति तक पहुंची थी। पुलिस ने ऑफिस के कुछ लोगों से पूछताछ शुरू की।

इसी बीच रवि को भी पुलिस ने सिर्फ घटना की जानकारी लेने के लिए बुलाया। उसने पूरी बात बताई और उस दुकान का नाम भी बताया जहां उसने नेहा को सुरक्षित बैठाया था।

पुलिस ने वहां लगे CCTV की रिकॉर्डिंग देखी।

रिकॉर्डिंग में साफ दिखाई दे रहा था कि रवि ने नेहा को सुनसान सड़क पर छोड़ने के बजाय उसे रोशनी वाली दुकान तक पहुंचाया और उसके परिवार से संपर्क करवाने में मदद की।

नेहा के परिवार ने बाद में रवि को धन्यवाद दिया।

नेहा की मां ने उससे कहा, "अगर तुम उस रात उसे अकेला छोड़कर चले जाते तो पता नहीं क्या होता।"

रवि ने सिर्फ इतना कहा, "मैडम, वो मेरी जिम्मेदारी थी। पैसे से ज्यादा जरूरी था कि वो सुरक्षित घर पहुंचे।"

जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को कुछ और सुराग मिले और अनजान कार के बारे में पूछताछ शुरू हुई। मामले की सच्चाई सामने आने तक नेहा के परिवार ने रात में अकेले बाहर निकलने से बचने का फैसला किया।

नेहा के लिए वह रात हमेशा याद रहने वाली थी।

उसे याद था कि वह एक अनजान ड्राइवर के साथ सड़क पर थी और अचानक उसके सामने दो रास्ते थे—या तो डरकर किसी सुनसान जगह पर मदद का इंतजार करे, या किसी सुरक्षित जगह तक पहुंचे।

उस रात रवि ने सिर्फ उसकी राइड पूरी नहीं की थी।

उसने एक अनजान इंसान की परेशानी को अपनी जिम्मेदारी समझा था।

और शायद इसी वजह से नेहा आज भी उस रात को याद करके कहती है—

"उस रात मुझे घर पहुंचाने वाला सिर्फ मेरा Rapido ड्राइवर नहीं था, वह उस वक्त मेरे लिए एक सहारा बन गया था।"

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