शहर में रात का वक्त था। सड़क पर वाहनों की आवाजाही धीरे-धीरे कम हो चुकी थी। इसी दौरान ऑफिस से घर लौट रही एक महिला की गाड़ी अचानक सुनसान सड़क पर खराब हो गई।
महिला ने कई बार गाड़ी स्टार्ट करने की कोशिश की, लेकिन गाड़ी चालू नहीं हुई।
उसने फोन निकाला और परिवार से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन नेटवर्क की समस्या के कारण बात नहीं हो पा रही थी।
महिला ने सड़क से गुजरने वाले वाहनों को रोकने की कोशिश की।
एक बाइक उसके पास से गुजरी।
महिला ने हाथ देकर रोकने की कोशिश की, लेकिन बाइक सवार बिना रुके आगे निकल गया।
कुछ देर बाद एक कार आई। महिला ने उम्मीद से हाथ उठाया, लेकिन कार भी कुछ सेकंड धीमी होकर आगे निकल गई।
अब महिला काफी घबरा चुकी थी।
वह सड़क के किनारे खड़ी होकर बार-बार अपने फोन की स्क्रीन देख रही थी।
तभी दूर से एक बाइक की हेडलाइट दिखाई दी।
बाइक उसके पास आकर रुकी।
राइडर ने पहले कुछ दूरी बनाकर पूछा—
“मैडम, सब ठीक है? आप इतनी रात को यहां अकेली क्यों खड़ी हैं?”
महिला ने परेशान आवाज में कहा—
“भैया, मेरी गाड़ी खराब हो गई है। बहुत देर से मदद मांग रही हूं, लेकिन कोई रुक नहीं रहा।”
राइडर ने तुरंत बाइक साइड में खड़ी की और कहा—
“आप घबराइए मत। पहले गाड़ी को सड़क के किनारे सुरक्षित जगह पर करते हैं।”
महिला ने कहा—
“मुझे बहुत डर लग रहा है… घर वाले भी परेशान होंगे।”
राइडर ने उसे भरोसा दिलाते हुए कहा—
“आप डरिए मत मैडम, अब मैं यहां हूं। जब तक आपको मदद नहीं मिल जाती, आपको अकेला छोड़कर नहीं जाऊंगा।”
इसके बाद उसने गाड़ी की जांच करने की कोशिश की।
कुछ देर तक देखने के बाद भी जब समस्या समझ नहीं आई तो उसने अपने फोन से आसपास के मैकेनिक को तलाशना शुरू किया।
कई नंबरों पर फोन किया, लेकिन रात होने के कारण कोई आने को तैयार नहीं था।
आखिरकार एक मैकेनिक तैयार हो गया।
महिला ने राइडर से कहा—
“भैया, आपको देर हो रही होगी। आपकी राइड भी होगी।”
राइडर ने मुस्कुराकर जवाब दिया—
“राइड तो बाद में भी मिल जाएगी मैडम। लेकिन अगर आपको इस हालत में छोड़कर चला गया तो शायद खुद को माफ नहीं कर पाऊंगा।”
महिला की आंखों में आंसू आ गए।
करीब आधे घंटे बाद मैकेनिक वहां पहुंचा और गाड़ी की जांच शुरू की। थोड़ी कोशिश के बाद गाड़ी की खराबी ठीक कर दी गई।
महिला ने राहत की सांस ली।
उसने राइडर को धन्यवाद देते हुए कहा—
“मैं आपका एहसान कैसे चुकाऊंगी?”
राइडर ने जवाब दिया—
“कोई एहसान नहीं है मैडम। आज आपको मेरी जरूरत थी, कल मुझे किसी और की जरूरत पड़ सकती है।”
महिला ने उसे पैसे देने की कोशिश की।
लेकिन उसने पैसे लेने से इनकार कर दिया।
महिला ने कहा—
“कम से कम चाय-पानी के लिए रख लीजिए।”
राइडर ने फिर मुस्कुराकर कहा—
“बस आप घर पहुंचकर अपने परिवार को फोन कर दीजिएगा कि आप सुरक्षित हैं। मेरे लिए वही काफी है।”
महिला कुछ देर तक उसे देखती रही।
जिस सड़क पर थोड़ी देर पहले वह खुद को बिल्कुल अकेला महसूस कर रही थी, उसी सड़क पर एक अनजान व्यक्ति ने कुछ देर के लिए उसके परिवार जैसा भरोसा दे दिया था।
राइडर अपनी बाइक लेकर वहां से चला गया।
महिला भी अपनी गाड़ी लेकर घर की ओर निकल गई।
लेकिन जाते-जाते उसके मन में एक ही बात थी—
“आज मुझे किसी ऐप के ड्राइवर ने नहीं, एक इंसान ने बचाया है।”
यह घटना हमें याद दिलाती है कि मुश्किल वक्त में मदद करने के लिए हमेशा कोई अपना ही आगे आए, यह जरूरी नहीं।
कभी-कभी एक बिल्कुल अनजान इंसान भी ऐसा काम कर जाता है, जिसकी याद जिंदगी भर रहती है।
आपके हिसाब से अगर आप उस राइडर की जगह होते तो क्या इतनी रात में किसी अनजान महिला की मदद करने के लिए रुकते? अपनी राय जरूर बताएं।
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