अगर आप आमतौर पर पेट्रोल या डीजल भरवाने के बाद भुगतान के लिए UPI का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। देशभर में पेट्रोल पंप डीलरों के बीच ₹2,000 से अधिक के UPI लेनदेन पर लगने वाले प्रस्तावित शुल्क को लेकर नाराजगी सामने आई है। डीलरों का कहना है कि यदि हर बड़े UPI भुगतान पर तय शुल्क देना पड़ा, तो उनके लिए डिजिटल भुगतान स्वीकार करना महंगा साबित होगा।
यही वजह है कि पेट्रोलियम डीलरों के संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर इस शुल्क से उन्हें राहत नहीं मिलती, तो वे ₹2,000 या उससे अधिक के UPI भुगतान को स्वीकार करना बंद कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में ग्राहकों को बड़े भुगतान के लिए नकद का सहारा लेना पड़ सकता है।
₹2,000 तक UPI Payment पर शुल्क नहीं
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, पेट्रोल पंप पर ₹2,000 तक के ईंधन भुगतान के लिए UPI लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR शून्य रहेगा। लेकिन ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर ₹5 का फ्लैट रियायती शुल्क लागू होने की बात कही गई है।
NPCI के अनुसार, इस व्यवस्था का उद्देश्य बड़े लेनदेन पर लगने वाले प्रोसेसिंग खर्च को सीमित रखना है। हालांकि पेट्रोल पंप डीलरों के संगठन इस शुल्क को लेकर सहमत नहीं हैं।
डीलरों को क्यों है आपत्ति?
पेट्रोलियम डीलरों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर उनका मार्जिन पहले से ही सीमित है। ऐसे में प्रत्येक बड़े डिजिटल लेनदेन पर अतिरिक्त ₹5 का खर्च लगातार जुड़ने से उनके कारोबार पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
डीलरों का एक तर्क यह भी है कि पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें वे अपनी मर्जी से तय नहीं करते। इसलिए डिजिटल भुगतान से जुड़ी अतिरिक्त लागत को ईंधन की कीमत में जोड़कर सीधे ग्राहक से वसूलना उनके लिए आसान विकल्प नहीं है।
कुछ राज्यों के पेट्रोलियम डीलर संगठनों ने सरकार और सरकारी तेल कंपनियों से पेट्रोल पंपों को इस शुल्क से पूरी तरह छूट देने की मांग भी की है। दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मुंबई और राजस्थान समेत कई क्षेत्रों के डीलरों ने भी शुल्क को लेकर चिंता जताई है।
देश में एक लाख से ज्यादा पेट्रोल पंप
पेट्रोलियम क्षेत्र का आकार देखते हुए यह मामला काफी महत्वपूर्ण है। अप्रैल 2026 तक देश में 1.03 लाख से अधिक पेट्रोल पंप होने की जानकारी दी गई थी। इनमें बड़ी संख्या सरकारी तेल कंपनियों से जुड़े आउटलेट्स की है। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के अलावा नायरा, जियो-बीपी और शेल जैसी निजी कंपनियां भी देश में ईंधन स्टेशन संचालित करती हैं।
फिलहाल विवाद का केंद्र ₹2,000 से अधिक के UPI लेनदेन पर लगने वाला ₹5 का शुल्क है। यदि डीलरों और संबंधित संस्थाओं के बीच इस मुद्दे पर समाधान नहीं निकलता है, तो आने वाले समय में बड़े UPI भुगतान को लेकर पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों को अलग व्यवस्था का सामना करना पड़ सकता है।
इसलिए पेट्रोल पंप पर जाते समय, खासकर जब आपको ₹2,000 से ज्यादा का भुगतान करना हो, तो डिजिटल भुगतान के साथ पर्याप्त नकदी रखना भी उपयोगी हो सकता है।
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