उठते-बैठते घुटनों में दर्द, सीढ़ियां चढ़ना हो गया मुश्किल? इन घरेलू नुस्खों पर आंख मूंदकर भरोसा करने से पहले जान लें क्या सुरक्षित है और क्या खतरनाक


 घुटनों का दर्द: घरेलू नुस्खों के नाम पर न करें ये गलती, जानिए दर्द कम करने के सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके

घुटनों में दर्द आज केवल बुजुर्गों की समस्या नहीं रह गई है। लंबे समय तक बैठना, शारीरिक गतिविधि की कमी, बढ़ता वजन, पुरानी चोट, उम्र से जुड़े बदलाव और कुछ अन्य बीमारियां घुटनों में दर्द और अकड़न का कारण बन सकती हैं। खासकर ऑस्टियोआर्थराइटिस में घुटने में दर्द, जकड़न, सूजन और चलने-फिरने में परेशानी हो सकती है।

सोशल मीडिया और इंटरनेट पर घुटनों के दर्द के लिए मेथी, लहसुन वाला दूध, हल्दी वाला दूध, तेल की मालिश, नारियल, अखरोट और कई तरह के पौधों के सेवन से जुड़े घरेलू नुस्खे बताए जाते हैं। इनमें से कुछ चीजें सामान्य भोजन का हिस्सा हो सकती हैं, लेकिन इन्हें घुटने के दर्द का पक्का या रामबाण इलाज मानना सही नहीं है।

सबसे महत्वपूर्ण बात कनेर के पत्तों से जुड़ी है। वायरल घरेलू नुस्खों में कई बार कनेर के पत्ते उबालकर या पीसकर इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए। कनेर यानी ओलियंडर के सभी हिस्सों में कार्डियक ग्लाइकोसाइड जैसे विषैले तत्व पाए जाते हैं, जो दिल की धड़कन और हृदय की विद्युत गतिविधि को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं। इसके सेवन से उल्टी, चक्कर, हृदय की अनियमित धड़कन और गंभीर विषाक्तता तक हो सकती है।

इसी तरह पान में इस्तेमाल होने वाला चूना पानी या दही में मिलाकर रोज पीना भी घुटनों के दर्द का प्रमाणित इलाज नहीं है। कैल्शियम की जरूरत व्यक्ति की उम्र और स्थिति के अनुसार अलग होती है और अत्यधिक कैल्शियम सेवन, विशेषकर सप्लीमेंट के रूप में, कुछ लोगों में नुकसान पहुंचा सकता है।

फिर घुटनों के दर्द में क्या करें?

ऑस्टियोआर्थराइटिस में नियमित और उचित शारीरिक गतिविधि उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मांसपेशियों को मजबूत करने वाली कसरत और ऐसी गतिविधियां जो सामान्य फिटनेस सुधारें, दर्द और चलने-फिरने की क्षमता में मदद कर सकती हैं। अगर वजन अधिक है तो धीरे-धीरे वजन कम करना भी घुटनों पर पड़ने वाले दबाव को कम कर सकता है।

किसी फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह से घुटनों के आसपास की मांसपेशियों को मजबूत करने वाली कसरत शुरू करना बेहतर रहता है। बहुत ज्यादा दर्द होने पर बिना सलाह के भारी व्यायाम करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना चाहिए।

दर्द और सूजन के लिए चिकित्सक स्थिति के अनुसार दवाएं या लगाने वाली दर्द-रोधी दवाएं सुझा सकते हैं। घुटने के ऑस्टियोआर्थराइटिस में कुछ लोगों के लिए लगाने वाली एनएसएआईडी दवाएं उपयोगी हो सकती हैं, लेकिन इन्हें भी व्यक्ति की अन्य बीमारियों और दवाओं को ध्यान में रखकर इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

गर्म या ठंडी सिकाई भी कुछ लोगों में दर्द और अकड़न से अस्थायी राहत दे सकती है। लेकिन अगर घुटने में लगातार सूजन, बहुत तेज दर्द, चोट के बाद अचानक परेशानी, घुटना लॉक होना या चलने में गंभीर दिक्कत हो तो केवल घरेलू नुस्खों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।

मेथी, लहसुन और हल्दी का क्या?

मेथी, लहसुन, हल्दी, अखरोट, फल, सब्जियां, दूध या अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ संतुलित भोजन का हिस्सा हो सकते हैं। लेकिन इनमें से किसी एक चीज को घुटनों के दर्द का इलाज या ऐसा उपाय बताना सही नहीं है जिससे भविष्य में कभी घुटनों का दर्द न हो।

घुटनों को स्वस्थ रखने के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है कि शरीर सक्रिय रहे, वजन स्वस्थ सीमा में रहे, चोट से बचाव हो और दर्द होने पर सही कारण का पता लगाया जाए।

निष्कर्ष: घुटनों के दर्द में हर वायरल घरेलू नुस्खा आजमाना समझदारी नहीं है। खासकर कनेर जैसे विषैले पौधे का सेवन बिल्कुल न करें। अगर दर्द बार-बार हो रहा है, सीढ़ियां चढ़ने-उतरने या उठने-बैठने में परेशानी है, घुटने में सूजन है या दर्द नींद प्रभावित कर रहा है, तो चिकित्सकीय जांच कराना ज्यादा सुरक्षित रास्ता है।

0/Post a Comment/Comments