वायरल वीडियो में प्रेमी जोड़े से बदसलूकी, युवक लड़की को उठाकर ले जाता दिखा, यह कैसी गुंडागर्दी?

सोशल मीडिया पर पिछले कई वर्षों से ऐसे वीडियो सामने आते रहे हैं, जिनमें किसी पार्क, अंधेरी जगह या सुनसान इलाके में बैठे प्रेमी जोड़ों को कुछ युवक घेर लेते हैं। खुद को समाज का ठेकेदार समझने वाली यह भीड़ पहले उनसे पूछताछ करती है, फिर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए उनका वीडियो बनाना शुरू कर देती है।

कई मामलों में लड़के और लड़की को डराया-धमकाया जाता है। उनके निजी पलों को रिकॉर्ड करके वीडियो वायरल करने की धमकी दी जाती है। इससे भी गंभीर बात यह है कि कुछ लोग इसी मजबूरी का फायदा उठाकर लड़की के सामने आपत्तिजनक मांग रखने लगते हैं। सोशल पुलिसिंग के नाम पर होने वाली ऐसी हरकतें किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराई जा सकतीं।

इसी तरह का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह वीडियो बिहार के जमुई का बताया जा रहा है, हालांकि इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

कपल को घेरकर टूट पड़ा लड़कों का झुंड

वायरल वीडियो में एक लड़का और लड़की साथ दिखाई दे रहे हैं। तभी कई युवकों का एक समूह उन्हें चारों ओर से घेर लेता है। वीडियो में युवक कपल के साथ बदसलूकी करते और उन पर दबाव बनाते हुए नजर आ रहे हैं।

स्थिति तब और भयावह हो जाती है, जब भीड़ में शामिल एक युवक लड़की को जबरन उठाकर कुछ दूर ले जाता हुआ दिखाई देता है। लड़की की इच्छा के विरुद्ध उसे इस तरह ले जाना बेहद गंभीर मामला है। वीडियो बना रहे लोग घटना को रोकने के बजाय उसे रिकॉर्ड करते नजर आते हैं।

कानून हाथ में लेने का अधिकार किसने दिया?

यदि किसी व्यक्ति को सार्वजनिक स्थान पर कुछ अनुचित दिखाई देता है, तो वह पुलिस को सूचना दे सकता है। लेकिन किसी लड़के और लड़की को घेरना, उनका वीडियो बनाना, मारपीट या अभद्रता करना और लड़की को जबरन उठाकर ले जाना कानूनन और नैतिक रूप से स्वीकार नहीं किया जा सकता।

दो बालिग लोगों के निजी जीवन पर फैसला सुनाने का अधिकार किसी भी भीड़ को नहीं है। सवाल यह भी है कि दूसरों को नैतिकता सिखाने निकले लोग स्वयं एक लड़की की सुरक्षा और सम्मान के साथ खिलवाड़ कैसे कर सकते हैं?

वीडियो बनाने वालों की भूमिका पर भी सवाल

ऐसी घटनाओं में केवल हमला करने वाले लोग ही जिम्मेदार नहीं होते। आसपास खड़े होकर वीडियो बनाने और उसे सोशल मीडिया पर फैलाने वालों की भूमिका पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।

किसी पीड़ित की पहचान उजागर करने वाला वीडियो उसकी परेशानी कई गुना बढ़ा सकता है। विशेष रूप से लड़की का चेहरा या पहचान सार्वजनिक होने से उसे सामाजिक और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए ऐसे वीडियो को आगे साझा करने के बजाय पुलिस तक पहुंचाना अधिक जिम्मेदार कदम है।

बिहार पुलिस से कार्रवाई की मांग

वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे युवकों की पहचान कर मामले की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। यदि वीडियो बिहार के जमुई का है और इसमें दिखाई दे रही घटना सही पाई जाती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

साथ ही यह भी पता लगाया जाना जरूरी है कि लड़की सुरक्षित है या नहीं और घटना के बाद उसके साथ क्या हुआ। वीडियो में मौजूद सभी लोगों से पूछताछ करके पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए।

सोशल पुलिसिंग के नाम पर किसी को अपमानित करना, धमकाना या उसके साथ जबरदस्ती करना सामान्य घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसी भीड़ पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो इस तरह की घटनाएं और बढ़ सकती हैं।

आपकी क्या राय है? क्या प्रेमी जोड़ों को घेरकर उनका वीडियो बनाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए? कमेंट में अपनी राय जरूर बताइए।

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