किसान का धंधा सदैव से तंगहाली में चलता रहा है, एक गांव में दो भाई थे दोनों में अच्छा स्नेह था लेकिन उन दोनों की पत्नियां सदैव आपस में झगड़तीं रहतीं। उनका झगड़ा इतना बढ़ गया कि दोनों भाईयों को अलग होना पड़ा। उनके घर और खेत बराबर बांट दिए गए।
फसल कटाई हो गई और दोनों ने ही अपने अपने खेत में अनाज की ढेरी लगा दीं। दोनों रखवाली कर रहे थे कि कहीं कोई चोर फसल चोरी न कर ले।
इसी बीच बड़े भाई ने कहा कि भाई मैं घर होकर आता हूं तबतक तुम जरा मेरे अनाज की भी रखवाली करो। छोटे ने कहा कि ठीक है भाई आप जाएं मैं यहां हूं।
बड़े भाई के जाने के बाद छोटे ने सोचा कि मेरे बड़े भाई के पास बच्चे ज्यादा हैं खर्च भी ज्यादा है तो मैं एक बोरी अनाज अपने खलिहान से उठाकर उसके अनाज में मिला देता हूं। उसने ऐसा ही किया।
कुछ देर बाद बड़ा भाई लौट आया, तो छोटे ने कहा कि भईया अब मैं भी घर होकर आता हूं तबतक आप रखवाली करें। छोटे भाई के जाने के बाद बड़े ने सोचा कि मैं तो सारी उम्र तंगी देखता आया हूं थोड़े में भी गुजारा कर लुंगा।
लेकिन मेरे छोटे भाई ने कभी तंगी नहीं झेली उसके ख्वाब भी बड़े हैं अतः मैं एक बोरी अनाज अपने खलिहान से उठाकर उसके अनाज में मिला देता हूं। उसने भी ऐसा ही किया और दोनों ढेरी जैसी थीं वैसी ही हो गई।
इस कहानी का सार है कि जीवन में हमें कहीं कड़वे अनुभव मिलते हैं तो उसका कारण भी हम खुद ही होते हैं। अगर हम सुबह से शाम तक प्यार बांटेंगे दुसरों के प्रति अच्छी भावना रखेंगे तो बाकी सब भी हमारे प्रति अच्छी भावना ही रखेंगे।
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