दुबई में भइया कमा रहे थे दिरहम, इधर मकई के खेत में रोज हो रही थी ‘अवैध जुताई’, गांव वालों ने रंगे हाथ पकड़ा तो खेत में ही करा दी शादी

 


कहानी कुछ ऐसी है कि एक भइया कई सालों से दुबई में पसीना बहा रहे थे। सपना था कि परदेस में मेहनत करके दिरहम कमाएंगे और गांव में अपना खेत-खलिहान हरा-भरा रखेंगे।

भइया को क्या पता था कि उनके विदेश जाते ही गांव में उनके मकई के खेत का इस्तेमाल खेती से ज्यादा किसी और काम के लिए होने लगेगा।

उधर भइया दुबई में अपनी ड्यूटी कर रहे थे और इधर उनके लहलहाते मकई के खेत को गांव के एक आशिक मिजाज बाबू साहब ने प्रेम-मिलन स्थल समझ लिया।

गांव की ही एक लल्ली से उनका दिल का मामला चल रहा था। दोनों को लगा कि मकई के लंबे-लंबे पौधों से बेहतर छिपने की जगह उन्हें पूरे गांव में नहीं मिलेगी।

फिर क्या था, दोनों अक्सर मकई के खेत में पहुंचने लगे। खेत की घनी फसल उनकी प्रेम कहानी के लिए ऐसी ओट बन गई कि उन्हें लगा गांव वालों को कुछ पता ही नहीं चलेगा।

लेकिन गांव की नजर से भला कौन बच सकता है!

गांव वालों ने कई दिनों से गौर किया कि खेत के एक हिस्से में पौधे कुछ ज्यादा ही हिलते-डुलते दिखाई दे रहे हैं। किसी ने कहा, “हवा होगी।”

दूसरे ने कहा, “हवा तो पूरे खेत में चल रही है, फिर यही हिस्सा इतना सक्रिय क्यों है?”

बस फिर क्या था, गांव की ‘जांच कमेटी’ सक्रिय हो गई।

एक शाम जब दोनों फिर खेत में पहुंचे, तो गांव वालों ने दबे पांव चारों तरफ से खेत को घेर लिया। जैसे ही दोनों को भनक लगी, निकलने का रास्ता ही नहीं बचा।

रंगे हाथ पकड़े गए तो दोनों के चेहरे ऐसे उतर गए जैसे फसल पकने से पहले ही ओलावृष्टि हो गई हो।

गांव वालों ने तुरंत दुबई वाले खेत-मालिक भइया को वीडियो कॉल किया और पूरी कहानी सुना दी।

भइया ने खेत का हाल देखा, फिर दोनों को देखा और कुछ देर चुप रहने के बाद बोले, “भाइयों, मकई तो अब बचने वाली नहीं है… अब जो हुआ है, उसका कोई स्थायी इंतजाम कर दो!”

गांव वालों ने भी भइया की बात को आदेश समझ लिया।

कुछ ही देर में पंडित जी को बुलाया गया। जहां कुछ समय पहले तक प्रेमी जोड़ा मकई की आड़ तलाश रहा था, वहीं अब मंडप सजने लगा।

गांव वालों ने कहा, “जब खेत में इतनी मेहनत से प्रेम की फसल उगा ही ली है तो अब इसे वैध भी कर दो।”

और देखते ही देखते दोनों की शादी करा दी गई।

अब गांव में लोग मजाक करते हुए कहते हैं कि दोनों मकई के खेत में चोरी-छिपे मिलने गए थे, लेकिन गांव वालों ने उन्हें ऐसा ‘पट्टा’ थमा दिया कि अब जिंदगी भर साथ रहना पड़ेगा।

इस कहानी का गांव वाला संदेश भी बड़ा सीधा है—परदेस जाकर कमाना अच्छी बात है, लेकिन घर, खेत और गृहस्थी की खबर लेना भी जरूरी है।

वरना आप विदेश में दिरहम गिनते रहेंगे और गांव में लोग आपकी जमीन पर अपनी कहानी लिखते मिल जाएंगे!

इसलिए भइया लोग, दुबई हो, कतर हो या सऊदी—कमाने जाइए, खूब कमाइए, लेकिन कभी-कभार गांव की भी खबर लेते रहिए।

खेत की निगरानी समय पर कर लीजिए…

कहीं ऐसा न हो कि आपकी मकई की फसल के साथ-साथ गांव वाले आपकी गृहस्थी की भी ‘कटाई’ कर दें!

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