विद्वानों ने कहा- तुम्हारी जिंदगी पानी में बर्बाद हो गई, कुछ देर बाद नाव डूबने लगी तो नाविक ने पूछा बस एक सवाल और सबकी बोलती बंद हो गई


गंगा नदी को पार करने के लिए कुछ विद्वान एक नाव में सवार हुए। नाव धीरे-धीरे नदी के दूसरे किनारे की ओर बढ़ रही थी। सभी विद्वान आपस में अपनी विद्या और ज्ञान की बातें कर रहे थे। नाविक चुपचाप अपना काम कर रहा था।

कुछ देर बाद एक विद्वान ने नाविक से पूछा,
“क्या तुम पढ़े-लिखे हो?”

नाविक ने विनम्रता से जवाब दिया,
“साहब, मैं ज्यादा पढ़ा-लिखा तो नहीं हूं। मुझे तो बस नाव चलाना आता है।”

विद्वान ने मुस्कुराते हुए पूछा,
“अच्छा, क्या तुमने कभी भूगोल पढ़ा है?”

नाविक ने सिर हिलाकर कहा,
“नहीं साहब, भूगोल के बारे में मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है।”

विद्वान ने तुरंत अपनी विद्वता का प्रदर्शन करते हुए कहा,
“तुम्हारी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा तो पानी में ही बर्बाद हो गया। अगर तुमने भूगोल पढ़ा होता तो तुम्हें दुनिया और धरती के बारे में कितना ज्ञान होता!”

नाविक चुप रहा।

कुछ समय बाद दूसरे विद्वान ने उससे सवाल किया,
“इतिहास के बारे में तो कुछ जानते होगे? बताओ, बाबर कौन था?”

नाविक ने फिर अपनी अनभिज्ञता जाहिर करते हुए कहा,
“नहीं साहब, मुझे इसके बारे में भी जानकारी नहीं है।”

दूसरे विद्वान ने भी उसे कमतर समझते हुए कहा,
“फिर तो तुम्हारी आधी जिंदगी पानी में ही बर्बाद हो गई।”

नाविक ने कोई जवाब नहीं दिया और चुपचाप नाव चलाता रहा।

अब तीसरे विद्वान को भी अपनी विद्या दिखाने का मौका मिल गया। उसने पूछा,
“रामायण और महाभारत के बारे में तो जरूर जानते होगे?”

नाविक ने फिर सिर हिलाकर अपनी अनभिज्ञता जताई।

यह सुनकर विद्वान हंसने लगे। उनमें से एक ने कहा,
“अगर तुम्हें इन महान ग्रंथों के बारे में भी जानकारी नहीं है तो लगता है तुम्हारी पूरी जिंदगी ही पानी में बर्बाद हो गई।”

नाविक फिर भी शांत रहा। उसने किसी से बहस नहीं की और अपने काम में लगा रहा।

लेकिन कुछ ही समय बाद गंगा की स्थिति अचानक बदलने लगी।

नदी का बहाव तेज हो गया। आसमान में बादल घिर आए और तेज हवाएं चलने लगीं। नाव जोर-जोर से हिलने लगी। नाविक ने तुरंत खतरे को भांप लिया।

उसने सभी विद्वानों से कहा,
“लगता है तेज तूफान आने वाला है। नाव कभी भी पलट सकती है। आप सभी जल्दी से संभलकर बैठिए।”

विद्वान घबरा गए।

नाविक ने कुछ देर बाद उनसे पूछा,
“क्या आप लोगों को तैरना आता है?”

सभी विद्वानों ने घबराते हुए एक साथ जवाब दिया,
“नहीं... हमें तैरना नहीं आता।”

नाविक ने उनकी ओर देखा और शांत स्वर में कहा,
“तो अब बताइए, आपकी पूरी जिंदगी पानी में बर्बाद होने वाली है या नहीं?”

इतना सुनते ही विद्वानों को अपनी कही हुई बातें याद आ गईं। जिस नाविक के ज्ञान का वे मजाक उड़ा रहे थे, उसी का व्यावहारिक ज्ञान अब उनकी जिंदगी बचाने वाला था।

कुछ ही देर में तूफान तेज हो गया और नाव पानी के तेज बहाव में असंतुलित होकर डूबने लगी। नाविक ने तुरंत पानी में छलांग लगा दी। उसे तैरना आता था, इसलिए वह तैरते हुए सुरक्षित किनारे तक पहुंच गया।

लेकिन विद्वानों को तैरना नहीं आता था। वे नदी के तेज बहाव में फंस गए और अपनी जान बचाने में असमर्थ रहे।

कहानी की सीख

इस कहानी का संदेश केवल इतना नहीं है कि किताबी ज्ञान से ज्यादा व्यावहारिक ज्ञान महत्वपूर्ण है। असली सीख यह है कि ज्ञान हमें विनम्र बनाना चाहिए, अहंकारी नहीं।

हर व्यक्ति के पास किसी न किसी क्षेत्र का अनुभव और कौशल होता है। कोई किताबों से बहुत कुछ जानता है तो कोई अपने अनुभव से ऐसी बातें सीखता है जो किताबों में आसानी से नहीं मिलतीं।

दूसरों को कम समझना या अपनी विद्या के कारण उनका अपमान करना ज्ञान की पहचान नहीं है। सच्चा ज्ञान वही है जो इंसान को विनम्र बनाए और जरूरत के समय स्वयं तथा दूसरों के काम आए।

॥ जय जय श्री राधे ॥

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