एक लालाजी का बहुत बड़ा कारोबार था, चार बेटे थे चारों शादीशुदा, सबके अपने-अपने बिजनेस। लेकिन लालाजी एकदम कंजूस, उनका बस चलता तो दुकान भी नंगे पैर चले जाते, कोई भूखा, भिखारी या साधू उनके द्वारा आता तो उसे कुछ नहीं मिलता, मतलब सेठजी अथाह कंजूस थे।
जब उनके सबसे छोटे बेटे का विवाह हुआ तो वो कोई भले घर की लड़की आ गई। उसने अपने पिता के घर दान धर्म, आए गए की सेवा, भुखों को भोजन कराना सीखा था, पशु पक्षियों को दाना पानी रखना सीखा था। अबतक तो लालाजी का काम सही चल रहा था घर में किसी प्रकार की खट-पट नहीं होती थी लेकिन जबसे नई बहु आई थी घर में क्लेश की छिटपुट घटनाएं होने लगीं थीं कारण कि वो किसी मंगते भिखारी को खाना दे देती, किसी बाबा को भी दान दे देती, मंदिर भी जाती वहां भी दान पुण्य करती।
परिवार में माहौल बन गया कि ये सबसे अलग है, लेकिन लालाजी ने अबतक इस समस्या में भाग नहीं लिया था। एक दिन एक बाबा उनके द्वारा पर आया और कुछ खाने को मांगा। लेकिन छोटी बहू बोली कि बाबाजी ये घर नहीं सराय है और सराय में खाना थोड़ी मिलता है? बाबा ने कहा कि अरे बेटी तेरे ससूर के पास कितने रूपए हैं? बोली - बस 100–150 रूपए हैं। बाबाजी ने फिर पूछा कि तेरे ससूर के कितने बेटे हैं? तो वो बोली - मेरे ससूर के डेढ़ बेटे हैं। बाबाजी ने आशीर्वाद दिया कि ठीक है बेटी भगवान करे तेरा घर सदैव भरा रहे और चला गया।
लालाजी सबकुछ सुन रहे थे बोले कि बेटी मेरे चार बेटे, चार बहु और कई पोता पोती हैं तुमने ये क्या बात कही?
बोली - पिताजी बुरा न मानें आप बताइए ये हवेली किसने बनवाई? लालाजी - ये मेरे पिताजी ने बनवाई थी। बहु - आप सब यहां एकसाथ रहते थे फिर वे मर गए, आप जिंदा हैं आपके बच्चे और हमारे बच्चे यहां रहते हैं इसी तरह हम चले जाएंगे बच्चों के बच्चे हो जाएंगे, इसी तरह देखा जाए तो ये एक सराय है कि नहीं?
लालाजी का गुस्सा कुछ कम हुआ सोचा कि बहु तो बड़ी सयानी बात कर रही है। लेकिन पुछा कि बेटी तुमने ये क्या बात कही की हमारे पास बस 100–150 रूपए ही हैं जबकि हमारी संपत्ति तो अरबों में है। बहु बोली - आपको आपके पिताजी से लाखों रूपए मिले जिन्हें आपने जोड़कर करोड़ों बना दिया और अब आपके बेटों ने उसे अरबों में पहुंचा दिया। लेकिन उस अरबों में से घर खर्च में बस 100–150 ही होता है अतः आपकी पुंजी केवल वही 100–150 है बाकी तो आप भी छोड़ जाएंगे जैसे आपके पिताजी, दादाजी छोड़ गए।
लालाजी ने कहा - ये भी ठीक है, पर मेरे चार बेटे हैं और तुमने कहा कि केवल डेढ़ बेटे हैं ये कैसे हो सकता है? बहु ने कहा - कि पिताजी अपने नौकर को बुलाओ और कहो कि मेरे सभी बेटों के पास जाओ और उनसे कहो जो भी काम कर रहे हो तुरंत छोड़कर घर पहुंचो, पिताजी ने कहा है।
नौकर सबसे बड़े बेटे के पास गया और कहा कि आपके पिताजी ने तुरंत ही बुलाया है आप घर चलें। बड़ा बेटा बैठा हुआ रोकड मिला रहा था बोला कि जाकर दुसरे भाई को बुला लेजा, मैं तो शाम को ही आउंगा रोकड नहीं मिला तो बहुत भारी नुक़सान हो जाएगा।
नौकर दुसरे नंबर वाले बेटे के पास पहुंचा और उसके पिता का हुक्म सुनाया। दुसरा बेटा व्यापारी मंडल की मीटिंग में बैठा था बोला ऐसे मीटिंग छोड़कर नहीं आ सकता और इसके बाद बहुत हिसाब किताब देखना है मैं शाम से पहले नहीं आ सकता।
नौकर तीसरे बेटे के पास पहुंचा और उसे भी वही बात कही, तीसरे बेटे ने कहा अरे जा पिताजी से कह देना मैं ये फाइलें पुरी कर रहा हूं और कुछ बड़े ग्राहक आए हैं उनसे मीटिंग भी करनी है मैं एक घंटे में सब निपटाकर तुरंत ही आता हूं।
नौकर चौथे सबसे छोटे बेटे के पास पहुंचा जोकि उसी बहु का घरवाला था वो बही देख रहा था, जैसे ही उसने पिताजी का हुक्म सुना तुरंत बही बंद करके रख दी और नौकर के साथ हो लिया।
अपने पति को आते देख बहु ने लालाजी से कहा कि पिताजी ये आपका पुरा लड़का है जो आपकी आज्ञा मिलते ही आ गया, एक घंटे में तीसरे नंबर वाला लड़का भी आ गया तो बहु ने कहा कि पिताजी ये आपका आधा लड़का है कुल मिलाकर आपके डेढ़ ही बेटे हैं, बाकी जो नहीं आए वे आपके बेटे हैं ही नहीं वे तो धन माया के हैं। और जो मेरी सास हैं उनकी उम्र दो साल है। लालाजी बोले कि बेटी उनकी उम्र तो 80 साल है।
बहु ने कहा - पिताजी मेरे आने के बाद ही इन्होंने भगवान का ध्यान करना शुरू किया है बाकी उम्र ऐसे ही बीता दी इसलिए इनकी उम्र सिर्फ दो साल ही है और पिताजी आपकी तो अभी उम्र शुरू भी नहीं हुई है।
कहते हैं उस दिन के बाद उस घर का माहौल बदल गया, उस दिन से सेठजी को समझ आ गया कि मनुष्य की असली पूँजी धन नहीं, बल्कि धर्म, सेवा और संस्कार हैं वही उसके साथ जाते हैं, बाकी सब यहीं सराय में छूट जाता है।
इस पोस्ट में पहले जो फोटो लगी थी वह अमित शाह जी से मेल खा रही थी पाठकों की आपत्तियां आईं तो मैंने ये फोटो बदल दी है। धन्यवाद 🙏
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