32 वर्षीय अमन अपनी पत्नी शालिनी के साथ रहता था। दोनों की शादी को करीब सात साल हो चुके थे। अमन सुबह काम पर चला जाता और शाम को लौटता। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाला 28 वर्षीय विवेक अक्सर उनके घर किसी न किसी काम से आने लगा।
शालिनी उसे पड़ोसी होने के नाते मदद कर देती थी। अमन ने भी शुरुआत में इस पर ध्यान नहीं दिया। लेकिन धीरे-धीरे विवेक का घर आना बढ़ गया। कभी बिजली का काम, कभी किसी कागज के बारे में पूछना और कभी अमन के घर न होने पर घंटों बैठना—इन सबने अमन के मन में सवाल खड़े कर दिए।
एक शाम अमन अचानक घर जल्दी लौट आया। उसने देखा कि विवेक घर से बाहर निकल रहा था। अमन ने उसे रोककर पूछा कि वह यहां क्यों आया था।
विवेक ने कहा कि शालिनी से कुछ जरूरी कागज लेने आया था।
अमन को बात अजीब लगी।
उसी रात उसने देखा कि सोफे के नीचे एक मुड़ा हुआ कागज पड़ा है। उसने उठाकर देखा तो उस पर एक बैंक खाते और जमीन के पुराने दस्तावेजों से जुड़ी जानकारी लिखी थी।
अमन ने शालिनी से सवाल किया।
शालिनी पहले चुप रही, फिर उसने बताया कि विवेक के परिवार के पास अमन के पिता की जमीन से जुड़ा एक पुराना दस्तावेज था। कुछ महीने पहले विवेक ने वह दस्तावेज उसे दिखाया था और कहा था कि जमीन के पुराने रिकॉर्ड में बड़ी गड़बड़ी है।
अमन ने दस्तावेज देखा तो उसके होश उड़ गए।
उस जमीन का एक हिस्सा वर्षों पहले किसी दूसरे व्यक्ति के नाम ट्रांसफर दिखाया गया था, जबकि परिवार को इसकी जानकारी ही नहीं थी।
अमन ने पुलिस में शिकायत की।
जांच में सामने आया कि विवेक ने शालिनी से संपर्क इसलिए किया था क्योंकि उसे शक था कि जमीन के असली कागज अमन के परिवार के पास हैं। लेकिन इसी दौरान किसी तीसरे व्यक्ति ने दोनों की मुलाकातों को गलत तरीके से पेश करके अमन और शालिनी के बीच शक पैदा करने की कोशिश की।
पुलिस ने पुराने रिकॉर्ड खंगाले तो पता चला कि जमीन के दस्तावेजों में फर्जी हस्ताक्षर और पुराने रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की गई थी।
जिस युवक की घर में आवाजाही देखकर अमन अपनी पत्नी पर शक करने लगा था, वह मामला आखिरकार पुरानी जमीन की धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेजों तक पहुंच गया।
सबसे बड़ा सवाल अब यह था कि परिवार के दस्तावेजों की जानकारी बाहर के व्यक्ति तक पहुंची कैसे—और इसी सवाल ने जांच को परिवार के एक पुराने परिचित तक पहुंचा दिया।
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