राजा ने आंखों देखा सच मानकर बेटे को सजा देने का फैसला कर लिया, तभी बड़े राजकुमार ने सुनाई ऐसी कहानी कि पूरा दरबार सोच में पड़ गया

एक राजा के दो लड़के थे दोनों ही बड़े काबिल थे रोज रात को अपने क्षेत्र में घूमते थे कि कहीं कुछ गलत ना हो रहा हो।‌ इसी बीच छोटा बेटा राज्य में गस्त लगाने के लिए निकला, उसने देखा कि एक महिला आधी रात को महल से निकल रही है वह महिला बड़ी सजी धजी हुई थी शरीर पर सोने के गहने दमक रहे थे।

राजाक लड़के ने पूछा कि तुम कौन हो जो इतनी आधी रात को यूं हमारे महल से बाहर जा रही हो। दो तीन बार पुछने पर महिला बोली कि मैं राजलक्ष्मी हूं और आज मेरा इस महल से जाने का दिन है। लड़का बड़ा परेशान हुआ और हाथ पांव जोड़े और कहा कि जी आप मत जाओ अगर आप ही चली गई तो राज्य की श्री उठ जाएगी प्रजा भुखी मर जाएगी।

राजलक्ष्मी ने कहा कि मैं इस बारे में नहीं जानती ये विधी का विधान है, लड़का बोला कि जी क्या है विधी का विधान कृपया बताएं? वो बोली कि आज ये राजा मरने वाला है और मुझे यहां से निकलना है। लड़का बोला कि देवी अगर ये राजा नहीं मरे तो?

राजलक्ष्मी ने कहा कि भाई देख ले अगर तुझसे विधी का विधान टलता हो तो। ऐसा कहने पर राजकुमार ने राजलक्ष्मी को वापस बुलाया और सीधा अपने पिता के कमरे में पहुंचा, राजा उस दिन अपनी एक नई रानी के साथ श्यन कर रहा था, सोते हुए राजा के सिर पर एक काला नाग फन ताने हुए खड़ा था, राजकुमार ने आव देखा न ताव अपनी तलवार से सांप की गर्दन उडा दी।

उस नाग के खुन का एक छींटा उस न‌ई रानी के होंठों पर जा गिरा लड़के ने सोचा कि भाई पिता तो बचा लिया पर ये मां जरूर मरेगी सौतेली है तो क्या मां तो मां है। उसने अपना अंगोछा उठाया और सांप का जहरीला खुन रानी के होंठों से साफ कर दिया, जैसे ही वो ऊपर उठने लगा रानी की आंख खुल गई।

ना रानी कुछ बोली ना राजकुमार और जो सांप था उसे उठाकर राजा का जो पानदान था जिसमें वो थुकता था उसमें डाल दिया और राजकुमार वहां से चला गया। अब रानी हमेशा सोचती थी राजकुमार तो ये दोनों हैं मेरी जब औलाद होगी तो उसे तो राज मिलना नहीं, तो बेइमानी ऐसी चीज है आदमी से कुछ भी करवा दे, रानी अगले दिन राजा से बोली कि आप अपने छोटे लड़के को कैसा मानते हैं? राजा ने कहा कि बहुत अच्छा लड़का है मेरे दोनों बच्चे अच्छे हैं।।

रानी ने कहा कि अगर वो कोई नीच कर्म करता पकड़ा जाए तो?

राजा ने कहा कि जो सजा आम लोगों के लिए है वो उसको भी मिलेगी न्याय तो सबके लिए समान है, तो रानी ने रात की कहानी बड़ी घुमा फिराकर राजा को सुनाई और कहां कि वो मेरे उपर झुका था लेकिन मेरी आंख खुल गई और वो भाग गया।

राजा बड़े धर्मसंकट में फंसा कि भाई लडके इतने लायक और काम इतना नालायक कर दिया, अगले दिन जब दरबार लगा तो उसने अपने बड़े बेटे से कहा कि राजकुमार अगर कोई अपना आदमी नीच कर्म करते पकड़ा जाए तो? राजकुमार ने कहा कि पिताजी आदमी अपना हो या पराया हमारे राज्य में तो नीच कर्म की सजा मौत है तलवार लेकर सिर कलम करने का हुक्म दिजिए।

राजा ने कहा कि अगर वो नीच कर्म तेरे छोटे भाई ने कर रखा हो तब क्या सजा? राजकुमार ने कहा कि बुरा कर्म चाहे भाई ने किया हो चाहे मैंने सजा एक ही है मौत। लेकिन आपको एक सलाह जरूर दुंगा कि क‌ई बार आंखों देखा भी झूठ हो जाता है इसलिए तसल्ली जरूर कर लिजिए।

राजा बोला कि ये क्या बात हुई आंखों देखा कैसे झूठ हो सकता है? कोई बात बता ऐसी। राजकुमार बोला - पिताजी एक दूर देश में एक राजा के पास एक बहुत सुंदर चिड़िया थी और बड़े सुंदर गीत सुनाया करती थी, एक दिन चिड़िया को अपने माता पिता की याद आ गई और वो राजा से बोली कि महाराज मैं अपने माता पिता से मिलना चाहती हूं आपकी सेवा करते क‌ई बरस बीत गए।

राजा बोला कि चली तो जा पर तेरे बगैर मेरा जी कहीं नहीं लगेगा, चिड़िया बोली कि जी ये ग‌ई और बस 15 दिनों में लौट आउंगी। इजाज़त लेकर चिड़िया चली गई और 15 दिन बाद जब वापस आने लगी तो उसके मां बाप बोले कि बेटी बुढ़े हो ग‌ए फिर मिलें या न मिलें तू ऐसा कर ये अमरफल ले जा और राजा को दे देना जिससे वह सदा जवान बना रहेगा।

चिड़िया ने फल चोंच में दबाया और उड़ चली, दूर का सफर था तो रात में आश्रय के लिए वो एक पीपल पर बैठ ग‌ई और पीपल के खोल में वो फल रख दिया। उस खोल में एक नाग बैठा था उसे वो फल दिखा तो उसने सोचा कि चुहा है उसने उसे डस लिया लेकिन वो मांसाहारी जीव था फल उसके किसी काम का नहीं अतः उसने छोड़ दिया, लेकिन जहर उसमें चला गया था, सुबह चिड़िया ने फिर उसे चोंच में दबाया और चल पड़ी महल पहुंची तो राजा बड़ा खुश हुआ आते ही दो चार गीत सुने फिर बोला कि मेरे लिए क्या लाई?

चिड़िया ने कहा कि जी ये फल आपके लिए लाई हूं ये अमरफल है इसे खाते ही आप अमर हो जाओगे और जवान भी हो जाओगे। राजा बड़ा खुश हुआ और जैसे ही उस फल को खाने को हुआ तभी एक बंदर आया और झपट्टा मारकर फल छीनकर खा गया। खाते ही नीला पड़ गया और मर गया ।

वहां जो दरबारी थे वो बोले कि राजा साहब ये कैसी चिड़िया है ये तो आपको मारने की साज़िश कर रही है जहर था इसमें तो। राजा ने तलवार उठाई और चिड़िया को चीर दिया, उसके बाद जिस बंदर ने फल खाया था उसमें से कुछ हिस्सा बचा था जिसमें बीज था और उसी जगह पेड़ उग आया बड़े सुंदर फल आते। लेकिन राजा को पता था कि ये जहरीला फल है इसको कोई खा लेगा तो मर जाएगा इसलिए उसने उसकी बाड करवा रखी थी।

उसी राज्य में गरीब दंपति रहते थे बेचारे खाने के लाले, बीमारियों से घिरी देह बड़े दुखी थे। एक रात उन्होंने उस पेड़ से फल तोड़ लिया और खाकर घर आकर लेट ग‌ए कि भाई अब तो मरना है। लेकिन सुबह उठे तो बुढा बुढ़ी दोनों जवान हो गए सारी बिमारियां खत्म हो गई, पूरे राज्य में बात फैल गई कि भाई बुढ़ा बुढ़ी एक फल खाकर जवान हो गए।

राजा के पास बात पहुंची तो आदेश दिया कि लाओ पकड़कर हमें भी पता चले कि कौनसा फल खाया और कैसे जवान हो गए। जवान हो चुके बुढ़ा बुढ़ी लाए गए और राजा को बताया कि हम दोनों मरना चाहते थे इसलिए आपके बग़ीचे से चोरी करके ये फल खाया था।

राजा को चिड़िया की बात याद आई बड़ा दुखी हुआ क्योंकि उसे पता चल गया था कि चिड़िया की कोई ग़लती नही थी लेकिन अब चिड़िया तो मर चुकी थी। ये कहानी सुनाकर लड़का बोला कि हे पिताजी इसी प्रकार क‌ई बार आंखों देखा भी झूठ होता है।

अब राजा ने छोटे राजकुमार को भी बुलाया और सारी बात बताने को कहा तो लड़के ने राजलक्ष्मी से लेकर सांप वाला सारा किस्सा कह सुनाया और कहा कि सांप देखना चाहो तो आपके पीकदान में पड़ा देख सकते हैं।

राजा ने जांच की तो सांप वहां मिल गया, तब उसने कहा कि भाई आंखों देखा हो तब भी एक बार जांच जरूर कर लेनी चाहिए क्योंकि क‌ई बार आंखों देखा भी झूठ होता है।

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