एक था गुरु और दूसरा उसका शागिर्द, दोनों को लगता था उनसे बड़ा ठग कोई नहीं… लेकिन अंत में एक छोटी सी पायल ने खोल दिया पूरी कहानी का राज

राजस्थान में एक लालजी नाम का ठग हुआ करता था, वह इतना बड़ा ठग था कहते हैं रानी की आंखों का काजल भी चुरा लिया था। लालजी बुढ़ा हो गया उसके मन में आता कि ये विद्या तो मेरे साथ ही चली जाएगी, कोई लड़का नहीं कोई चेला नहीं तो अपनी कारीगरी सिखाता किसको? उसे पता चला कि एक पेमा नामक ठग है और वो लालजी के बाद दुसरे नंबर का ठग माना जाता है और आयु में महज 25 साल का है।

तो लालजी ने सोचा उसी पेमा को चेला बनाना चाहिए, वह उसे खोजने के लिए घोड़े पर सवार होकर निकल पड़ा और रास्ते में एक पेड़ के नीचे बैठकर अफीम चाटने लगा, तभी एक दुसरा आदमी ऊंट पर सवार होकर आया और उसने भी अफीम निकाली और चाटने लगा।

तभी दोनों की नजरें टकराईं, कहते हैं चोर चोर को गंगाजी पर भी ढुंढ लेते हैं दोनों एक दूसरे को देखते रहे तभी लालजी ने कहा कि अरे तुम पेमा हो ना? पेमा ने कहा कि अरे आप तो लालजी हैं ना? दोनों एक दूसरे से गले मिले।

लालजी जी ने कहा कि पेमा ऐसे छोटे मोटे काम ही करता रहेगा या कुछ बड़ा भी करेगा? पेमा बोला कि आज आप मिल ग‌ए आज ही कर देंगे। लालजी बोला चलो पहले परीक्षा दो। सामने वो चिड़िया अपने घोंसले से बारंबार उड़ रही है और फिर बैठ जाती है उसे पता चले बिना उसके अंडे उठा लाओ।

पेमा चल पड़ा और जाते हुए बकरी की चार मींगण (बकरी का गोबर जोकि काला और गोल होता है) उठा ले गया, पेड़ पर चढ़कर घोंसले के पास पहुंचा और जैसे ही चिड़िया उड़ती उसका एक अंडा उठाता और एक मींगण रख देता इसी प्रकार चारों अंडे उठा लिये और चिड़िया वैसे ही उड़ बैठ रही थी, वापस आया तो लालजी ने पूछा कि ले आया? पेमा ने जेब से चिड़िया के अंडे निकाले तो हैरान रह गया उसमें से बकरी के चार मींगण निकले।

लालजी हंसते हुए बोला कि तू चिड़िया से चुरा लाया मैंने तुमसे चुरा लिए। दोनों गुरु चेला एक दुसरे की कलाकारी से संतुष्ट हुए और निश्चित किया कि रात को राजा के महल की छत पर लगा सोने का छत्र काटकर लाएंगे। रात हुई तो पीछे की दीवार पर रस्सा फेंका लेकिन वह इस ढंग से बनी हुई दीवार थी की रस्सा कहीं अटका नहीं।

लालजी ने कहा कि हर एक घंटे में महल में घंटा बजता है जैसे ही घंटा बजेगा तुरंत दीवार में एक कील ठोंक दो ताकि पहरेदारों को पता न चले। रात 12 बजे तक कील ठोंकते हुए वे दोनों महल की छत पर चढ़ ग‌ए थे। वहां पहुंचकर जैसे ही छत्र काटने लगे, तो राजा के महल से थोड़ी दूर अपने घर में सो रहे सुनार की आंख खुल गई उसने अपनी पत्नी से कहा कि कहीं सोना काटा जा रहा है, उसकी पत्नी बोली कि तुम्हारे कान बज रहे हैं क्यों नींद खराब करते हो सो जाओ।

लेकिन सुनार बोला कि मैं असली सुनार की औलाद हूं आवाज से ही बता सकता हूं कि सोना काटा जा रहा है, उसका मन नहीं माना तो घर से निकलकर आवाज के सहारे महल तक जा पहुंचा तबतक लालजी और पेमा छत्र काट चुके थे और महल से नीचे उतर आए।

सुनार ने उनका पीछा किया और वे दोनों एक कब्रिस्तान में जा पहुंचे , उन्होंने तय किया की छत्र आज रात यही गाड़ दिया जाए सुबह राजा की सेना चारों तरफ़ इसे ढुंढेगी कल रात निकाल लेंगे। पेमा ने गड्ढा खोदा तो लालजी ने कहा कि भाई क‌ई बार मुर्दे भी सुन लेते हैं एकबार देख ले कोई जिंदा तो नहीं?

वे चारों तरफ ढुंढने लगे तो सुनार एक ताजा खाली कब्र में छिप गया, तभी पेमा ने उसी कब्र में भाला मारा जोकि सुनार की जांघ में धंस गया, उसने बड़ी मुश्किल से अपनी चीख रोकी और हाथ में मौजूद कपड़े से भाले की नोक पोंछ दी। जब भाला बाहर आया तो पेमा ने संतुष्ट होकर लालजी से कहा कि उस्ताद कोई नहीं है।

दोनों ने छत्र दफनाया और चले गए, सुनार लंगड़ाते हुए बाहर आया और छत्र निकालकर अपने घर चला गया। अगली रात वे दोनों आए तो देखा छत्र वहां नहीं है तो लालजी ने कहा कि भाई मैंने कहा था कि मुर्दे भी जागते हैं पर तुमने अच्छे से नहीं देखा।

पेमा घबराकर बोला कि अब क्या करें, लालजी ने कहा कि अब भी ढुंढेंगे। उस राज्य में रिवाज था कि चीजों की बिक्री ठेका लेकर ही कर सकते हैं तो उन्होंने हल्दी के ठेका ले लिया। उन्होंने हल्दी का दाम इतना महंगा कर दिया कि कोई हल्दी नहीं ले सकता।

पहले जख्म पर लगाने के लिए वैद्य हल्दी बताते थे और सुनार के घर हल्दी खत्म हो गई, उसकी पत्नी गली से बड़बड़ाते हुए गुजरी की राजा का नाश जाए बताओ हल्दी इतनी महंगी होती है? लालजी ने पेमा से उस औरत का पीछा करने को कहा और वहां जाकर देखा कि भाला लगा हुआ सुनार है। लालजी ने कहा कि इसके घर के सामने निशान लगा दो रात को देखेंगे।

सुनार की पत्नी ने घर आकर कहा कि इतनी महंगी हल्दी हो गई शहर में कहीं नहीं मिली। सुनार का माथा ठनका बोला भागवान ठग साथ आ चुके हैं देख कर आओ घर के सामने निशान लगा है? उसने आकर कहा कि हां जी निशान तो लगा है। सुनार ने तुरंत ही कहा कि जैसा निशान हमारे घर के आगे बना है आसपास सबके घरों के आगे बना दो। सुनार भी किसी से कम नहीं था।

रात को जब वे दोनों आए तो देखा कि निशान तो आसपास सभी घरों पर लगे हुए हैं, लालजी ने कहा कि पेमा तू सही से पका नहीं है अरे ऐसी जगह निशान लगा दिया कि सामने वाले को पता चल गया और हर घर पर निशान बना दिए। चल ऐसा कर कि सभी घरों के आगे घुमते हैं जख्म जिसको लगा है वो बगैर हल्दी करहाता मिलेगा। घुमते हुए उन्हें सुनार के घर से करहाने की आवाज आई और फिर वहां सेंध लगाई सोने का छत्र तो ले ही ग‌ए साथ में सुनार के बनाए हुए सभी आभूषण भी ले गए।

लालजी और पेमा बैठकर बंटवारा करने लगे कि एक हार तेरा एक मेरा, इस प्रकार सभी आभूषणों का बंटवारा हो गया अंत में एक जोड़ी पायल बचीं। तो लालजी ने कहा कि पेमा ये पायल दोनों तू रख मेरी घरवाली तो बुढ़ी हो गई है तेरी घरवाली तो जवान है अतः उसके काम आएंगी, लेकिन पेमा ने कहा ना जी बिल्कुल नहीं बेइमानी के धंधे में ईमानदारी होती है एक पायल आपकी एक मेरी। लालजी के खुब समझाने पर भी पेमा नहीं माना।

पेमा घर पहुंचा तो उसकी पत्नी आभूषणों को पहनकर देख रही थी हार पहना, कानों में झुमके, हथफूल, टीका, कड़े सब पहनने पर पायल का नंबर आया तो देखा एक ही है, तो बोली इसके जोड़े की पायल कहां ग‌ई? तो पेमा ने कहा कि वो तो लालजी के घर ग‌ई। उसकी पत्नी जिद पर अड गई कि अभी दुसरी पायल भी चाहिए।

पेमा लालजी के घर पहुंचा उस रात लालजी कहीं बाहर गया था और वो पायल उसकी पत्नी के पैर में थी, उसे सोती हुई देखकर उड़ा ले गया। लालजी घर पहुंचा तो देखा उसकी घरवाली रो रही थी चतुर चालाक लालजी समझ गया कि ये काम पेमा ने किया है, तो उसने कहा कि मैंने उससे कहा था कि दोनों लेजा लेकिन अब उसने ये काम करके ठीक नहीं किया।

लालजी पेमा के घर पहुंचा और उसके घर के बाहर रखे कपास के ढेर में आग लगा दी पेमा आग बुझाने दौड़ा इतने में ही धूएं का लाभ उठाकर लालजी उसकी पत्नी को घोड़े पर बैठा ले गया। उसने पेमा की पत्नी से कहा कि देख तू है मेरी धर्म की बेटी मगर चुप रह क्योंकि अब ये दो ठगों की लड़ाई है।

अगले दिन लालजी पेमा के घर पहुंचा तो पेमा दहाड़ें मार-मारकर रो रहा था बोला कि भाई धन भी गया, घर भी जल गया और पत्नी भी जल ग‌ई। लालजी ने कहा कि भाई घर और धनमाया तो आनी जानी चीज़ है लेकिन रही बात औरत की तो मेरी एक ही लड़की है उसकी शादी तुमसे कर दूंगा।

समय तय हुआ और पेमा बारात लेकर लालजी के घर पहुंच गया लालजी ने उसका विवाह उसकी ही पत्नी से करवा दिया घुंघट में पेमा पहचान भी न सका। घर आकर देखा तो पता चला कि मेरी ही पत्नी है। पेमा ने जाकर लालजी के पैर पकड़ लिए की तू ही असली ठग है मुझे माफ कर दे।

चालाकी से बड़ा कोई हुनर नहीं, लेकिन अनुभव से बड़ी कोई चालाकी नहीं। अपने से ज्यादा होशियार को मात देने की कोशिश में आदमी अपनी ही चाल में फंस जाता है।

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