‘गोली लगी थी तो चल कैसे रहा?’ जमुई कांड में वायरल दावे की खुली पोल, असली कहानी निकली कुछ और

 

जमुई एनकाउंटर के बाद ‘दौड़ते आरोपी’ का वीडियो वायरल, लेकिन कहानी में निकला बड़ा ट्विस्ट

ब्रो... इंटरनेट की दुनिया में किसी खबर के साथ अगर एक वीडियो और थोड़ा सा कन्फ्यूजन मिल जाए, तो मीम बनने में ज्यादा वक्त नहीं लगता। बिहार के जमुई में नाबालिग छात्रा और उसके साथी के साथ कथित बदसलूकी के मामले में मुख्य आरोपी नंदन यादव के पुलिस मुठभेड़ में घायल होने के बाद सोशल मीडिया पर भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला।

पुलिस के मुताबिक, नंदन यादव को पकड़ने की कार्रवाई के दौरान मुठभेड़ हुई और उसके पैर में गोली लगी। इसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। पुलिस का कहना था कि आरोपी ने भागने की कोशिश की और पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके जवाब में गोली चली।

अब कहानी में एंट्री हुई सोशल मीडिया की।

‘कल गोली लगी थी, आज ये चल कौन रहा है?’

सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया जिसमें कोर्ट परिसर में एक आरोपी को चलते हुए देखा गया। वीडियो देखने के बाद लोगों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया कि अगर पैर में गोली लगी थी तो आरोपी इतनी आसानी से चल कैसे रहा है?

बस फिर क्या था... इंटरनेट ने अपनी अदालत लगा ली।

किसी ने इसे ‘चमत्कारी इलाज’ बता दिया तो किसी ने मजाक में पूछ लिया कि आखिर आरोपी को कौन-सा ऐसा इलाज मिला कि 24 घंटे में पैर ने दोबारा ड्यूटी जॉइन कर ली!

लेकिन यहीं पर कहानी में असली ट्विस्ट आता है।

दरअसल दो आरोपियों के वीडियो को मिला दिया गया

फैक्ट-चेक में सामने आया कि वायरल दावे में दो अलग-अलग आरोपियों की घटनाओं को आपस में जोड़ दिया गया था। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस के अनुसार नंदन यादव के पैर में गोली लगी थी, जबकि दूसरे आरोपी हरेराम यादव को पुलिस कार्रवाई के दौरान भागते समय पैर में चोट लगी थी। बाद में हरेराम को इलाज के बाद कोर्ट में पेश किया गया था।

यानी सोशल मीडिया पर जिस वीडियो को देखकर सवाल पूछा जा रहा था कि ‘गोली लगने के बाद आरोपी दौड़ कैसे रहा है?’, उसमें पहचान को लेकर ही कन्फ्यूजन था।

इंटरनेट ने बना दिया ‘संजीवनी बूटी’ वाला मामला

हालांकि, जब तक यह फैक्ट सामने आता, तब तक सोशल मीडिया पर मीम्स की दुकान पूरी तरह खुल चुकी थी।

लोगों ने मजेदार अंदाज में पूछा कि आखिर अस्पताल में ऐसा कौन-सा इलाज हुआ कि पैर की चोट के बाद आरोपी इतनी तेजी से चलने लगा। किसी ने इसे ‘बिहार का एक्सप्रेस इलाज’ बताया तो किसी ने मजाक में कहा कि डॉक्टरों ने शायद पैर में चार्जिंग लगा दी होगी!

लेकिन मजाक अपनी जगह है और तथ्य अपनी जगह।

जमुई पुलिस ने बताया था कि नंदन यादव को मुठभेड़ के दौरान पैर में गोली लगी और उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। मामले में पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है और जांच आगे बढ़ रही है।

असली सवाल क्या है?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सबक यही है कि सोशल मीडिया पर किसी वीडियो को देखकर तुरंत निष्कर्ष निकालना कितना आसान है। एक आरोपी की चोट, दूसरे आरोपी की कोर्ट पेशी और अलग-अलग वीडियो जब एक साथ जोड़ दिए जाएं तो पूरी कहानी ही बदल सकती है।

जमुई मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर अलग-अलग सवाल और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं, लेकिन ‘गोली लगी और अगले दिन वही आरोपी दौड़ने लगा’ वाला वायरल दावा उपलब्ध फैक्ट-चेक के मुताबिक सही तस्वीर पेश नहीं करता।

तो ब्रो... मीम बनाने से पहले वीडियो में आदमी कौन है, यह देख लेना भी जरूरी है। वरना नंदन की गोली और हरेराम की चोट मिलकर इंटरनेट पर ऐसी कहानी बना देती है, जिसमें डॉक्टर से ज्यादा तेज सोशल मीडिया का इलाज हो जाता है!

0/Post a Comment/Comments