दिल्ली में एक छात्रा का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है, जिसमें वह पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाती नजर आ रही है। वायरल वीडियो में छात्रा का दावा है कि उसके साथ कुछ युवकों ने कथित तौर पर बदसलूकी की और विरोध करने पर गाली-गलौज करते हुए उसका पीछा किया गया। इसके बाद जब वह शिकायत लेकर पुलिस के पास पहुंची तो उसे कथित तौर पर अलग-अलग थानों के चक्कर लगाने पड़े।
वायरल पोस्ट में छात्रा की पहचान दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा अद्वैतशा सिंह बैस के रूप में बताई जा रही है। पोस्ट के मुताबिक, छात्रा अपने दोस्तों के साथ जा रही थीं। इसी दौरान कुछ युवकों ने कथित तौर पर उनके साथ बदसलूकी की। छात्रा का दावा है कि जब उन्होंने इसका विरोध किया तो युवक कथित तौर पर गाली देने लगे और उनका पीछा करने लगे।
घटना के बाद छात्रा शिकायत दर्ज कराने पुलिस स्टेशन पहुंचीं। वायरल दावे के अनुसार, वहां तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने के बजाय उनसे घटना के स्थान को लेकर क्षेत्राधिकार की बात कही गई। पोस्ट में दावा किया गया है कि छात्रा इसके बाद करीब तीन पुलिस स्टेशनों तक गईं, लेकिन हर जगह कथित तौर पर यह कहा गया कि घटना संबंधित थाने के अधिकार क्षेत्र में नहीं आती।
यही बात छात्रा के वीडियो का मुख्य मुद्दा बन गई। उनका सवाल था कि अगर कोई व्यक्ति शिकायत लेकर पुलिस स्टेशन पहुंचता है तो उसे क्षेत्राधिकार के नाम पर एक थाने से दूसरे थाने क्यों भेजा जाना चाहिए।
क्या है Zero FIR?
ऐसी परिस्थितियों में Zero FIR की व्यवस्था महत्वपूर्ण हो सकती है। इसका मूल उद्देश्य यह है कि किसी संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर केवल क्षेत्राधिकार के आधार पर पुलिस शिकायत लेने से इनकार न करे। शिकायत दर्ज होने के बाद मामले को जांच और आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित क्षेत्र के पुलिस स्टेशन को स्थानांतरित किया जा सकता है।
हालांकि, किसी विशेष मामले में Zero FIR लागू होगी या नहीं, यह घटना की प्रकृति और कानूनी परिस्थितियों पर निर्भर करता है। इसलिए इस वायरल मामले में पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया का पालन किया या नहीं, यह आधिकारिक रिकॉर्ड या पुलिस के बयान के बिना निश्चित रूप से कहना उचित नहीं होगा।
छात्रा के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं
वायरल पोस्ट में छात्रा की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए हैं, लेकिन फिलहाल इस मामले को लेकर हमें दिल्ली पुलिस की ओर से ऐसा आधिकारिक बयान नहीं मिला है, जिससे घटना, आरोपियों की पहचान या FIR की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि हो सके।
इसलिए वायरल वीडियो में लगाए गए आरोपों को फिलहाल छात्रा का पक्ष और सोशल मीडिया पर किया गया दावा मानना चाहिए, न कि स्थापित तथ्य।
अगर पुलिस की ओर से मामले में FIR, जांच या आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने आती है, तो उससे पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
फिर भी, यह मामला एक महत्वपूर्ण सवाल जरूर उठाता है—अगर कोई महिला या छात्रा कथित अपराध की शिकायत लेकर पुलिस के पास पहुंचती है, तो उसे शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया कितनी आसान और स्पष्ट मिलती है? यही सवाल सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो के बाद भी उठाया जा रहा है।
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