एक हलवाई की दुकान में एक चुहा रहने लगा वो चुहा बहुत तेज था कभी पिंजरे के अंदर नहीं घुसता और दुकान की सभी मिठाईयां खराब कर देता, कभी लड्डुओं में जा घुसता कभी बर्फी, पेड़ा, अमृती, गुलाबजामुन, रसगुल्ला जो भी उसके मन में आता उसे खाता उसमें ही मलमुत्र करता, चुहा खा खाकर बहुत बड़ा हो गया था।
एक दिन हलवाई ने घर पर जिक्र करते हुए कहा कि एक चुहे ने बहुत परेशान कर रखा है रोज मिठाईयां खराब कर रहा है उसकी वजह से बहुत घाटा हो रहा है और वह पकड़ में भी नहीं आता। हलवाई के बेटे ने पिता की बातें सुनी उसे बड़ा गुस्सा आया और अगले दिन दुकान में जाकर रखवाली करने लगा।
काफी देर इंतजार करने पर चुहा मिठाई खाने आया और इंतजार में बैठे हलवाई के बेटे ने उसे पकड़ लिया, और उसे हाथ में पकड़कर हल्की हल्की थपकी जमाने लगा। हर थपकी के साथ वह चुहे से कहता कि हां लड्डू खाएगा, जलेबी खाएगा, गुलाबजामुन खाएगा।
अब कई देर हो गई और चुहा मर गया , इसी बीच हलवाई आया और बोला अरे वाह तुमने इसे पकड़ लिया। फिर गौर से देखकर बोला कि अरे ये क्या किया तुमने तो इसे मार डाला? बेटा जीव था ये अब पाप लगेगा।
लड़का बोला कि पिताजी मैंने इसे नहीं मारा ये तो बस उलहाने उलहाने में मर गया। कुछ लोग मारने से नहीं अपने कारनामों की याद दिलाने भर में ढ़ेर हो जाते हैं।
Post a Comment