राजा ने मंत्री से पूछा- मेरे बारे में ऐसी अफवाह कौन फैला रहा है? मंत्री ने जो सच बताया, सुनकर राजा भी रह गया हैरान

एक राज्य का मंत्री बहुत ज्यादा ईमानदार था और ईमानदार व्यक्ति को दुनिया शांति से जीने नहीं देती, मंत्री के खिलाफ भी लगातार साजिशें होती रहतीं। लेकिन एक बार सबने मिलकर राजा के कान भरे और राजा को यकीन सा होने लगा। राजा ने मंत्री को बुलाया और कहा कि मैं तो तुझे भाई से भी बढ़कर मानता था लेकिन मैंने तेरे बारे में ये ये बातें सूनी हैं, क्या ये अच्छा लगता है?

मंत्री ने कहा कि राजा साहब अफवाहें, कांव कांव चलती रहतीं हैं इनपर ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए, आपने खुद कुछ देखा होता तो ही मान लेते लेकिन ऐसे ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए। राजा ने कहा कि ऐसे कैसे चलतीं रहतीं हैं? बगैर आग के धुंआ थोड़ी होता है?

मंत्री ने कहा कि राजन मेरे बारे में जो बात आपने सूनी है वो सही नहीं है वो एक अफवाह है और अफवाहों को कोई कहां तक रोक लेगा? राजा ने कहा कि नहीं भाई ये बात तुझे सिद्ध करनी होगी कि बिना सोचे समझे अफवाहें उड़ती रहती हैं। राजा ने मंत्री को यह साबित करने के लिए एक हफ्ते का समय दे दिया।

शाम होने पर मंत्री अपने घर गया और कमरे में बैठकर जोरों से हंसने लगा। अपने पति को यूं मुर्खों की भांति हंसते देख मंत्राइन बहुत अचंभित हुई और पानी का गिलास लेकर उसके पास आई बोली कि ऐसा क्या देख आए जो अकेले अकेले हंस रहे हो?

मंत्री बोला कि बात ही ऐसी है बताने को दिल नहीं चाहता और बताए बिना मन भी नहीं मानता और तुम यकीन भी नहीं करोगी। मंत्राइन बोली कि जी ऐसी कौन-सी बात हो गई जो आप मुझे नहीं बता सकते? मंत्री बोला कि ऐसी खास बात नहीं है बस तू सुनकर कहेगी कि ऐसा हो ही नहीं सकता। और मेरी आंखों देखी है।

मानवीय स्वभाव है जब इतनी उत्सुकता बढ़ जाए तो फिर बात जाननी ही जाननी है तो मंत्राइन बोली आपको मेरी कसम है जो बात है जल्दी बताओ। मंत्री ने कहा कि बात तो बता दूंगा मगर तू किसी और को बताए बिना नहीं रह सकेगी और फिर मेरे लिए मुसीबत बन जाएगी। मंत्राइन बोली कि जी मैं कसम खाती हूं कि किसी से नहीं कहुंगी।

मंत्री बोला कि आज मैं और राजा बातचीत कर रहे थे तभी राजा ने कहा कि मंत्री जी मेरे पेट में दर्द हो रहा है , तो मैंने कहा कि राजा साहब तो हकीम को बुला लाता हूं। राजा बोला कि नहीं हकीम को रहने दे, आज ऐसे समय दर्द हुआ है जब तू यहां है वरना अकेले में दर्द होता था। मैंने कहा कि जी ऐसी क्या बात कि हकीम नहीं बुला सकते?

राजा ने कहा थोड़ी देर रूक जाओ फिर देखना। इतने में ही राजा का दर्द बढ़ गया और उसने एक कव्वे को जन्म दिया और जन्म लेते ही वो कव्वा फुर्र से उड़ गया। अब तुम ही बताओ राजा से क्या कहता बस सारे रास्ते हंसता आया हूं कि ऐसे भी कव्वे पैदा होते हैं और किसी को बताऊंगा तो यकीन नहीं करेगा। लेकिन बताए बगैर मैं रह नहीं सका लेकिन भाग्यवान तू किसी को मत बताना।

अब औरत के पेट में बात कैसे पचती, जैसे ही मंत्री दरबार के लिए निकला मंत्राइन अपनी सहेली के पास पहुंची। सहेली मंत्राइन को देखते ही बोली कि क्या बात है मुरझाई हुई नजर आ रही हो? मंत्राइन बोली कि नहीं बताने की बात नहीं वो मना करके ग‌ए हैं कसम भी दी है।‌ थी तो वो भी उसकी सहेली ही अतः आखिर में कसम देकर उसने ये बात पूछ ही डाली। मंत्राइन आखिर में इतना ही कह सकी कि किसी और से जिक्र मत करना।

अब एक हफ्ता बीत गया राजा जहां से गुजरे लोग मुंह फेरकर हंसने लगते क्योंकि सामने से हिम्मत न पड़ती। अफवाह फैल गई कि राजा रोज कव्वे को जन्म देता है। एक दिन एक बांदी रानी के बाल संवार रही थी और राजा का जिक्र आते ही वह हंस पड़ी, रानी ने पूछा कि इसमें हंसने की क्या बात थी? बांदी ने कहा कि नहीं रानी साहिबा कोई और बात याद आ गई थी इसलिए हंस पड़ी।

रानी ने कहा कि नहीं कुछ तो जरूर है जो तू छिपा रही है जल्दी बता वरना अभी 100 कोड़ों की सजा दूंगी। बांदी ने कहा कि आप यकीन तो नहीं करेंगी लेकिन बात बिल्कुल सत्य है कि अपने राजा सहाब रोज एक कव्वे को जन्म देते हैं और जन्म लेते ही कव्वा फुर्र से उड़ जाता है। रानी बोली कि बेवकूफ ऐसा थोड़ी हो सकता है कभी आदमी कव्वों को जन्म दे सकते हैं?

बांदी ने कहा कि रानी साहिबा आप पुरे राज्य में किसी से भी पूछ लें इस रहस्य को पूरा राज्य जानता है। तभी वहां दुसरी बांदी आ पहुंची तो रानी ने उससे पूछा क्या तुम्हें इस बात की जानकारी है? बांदी बोली कि हां जी, लेकिन आपसे कहने की हिम्मत नहीं होती थी लेकिन मेरे घरवालों को भी पता है मेरा पति भी कह रहा था कि राजा कव्वे पैदा करता है।

दरबार का समय समाप्त हुआ और राजा रनिवास में पहुंचा तो आते ही रानी ने बताया कि राज्य में ये बात फैली हुई है। अब राजा तो राजा है उसे गुस्सा आया बोला किसकी हिम्मत है कि मेरे बारे में ऐसी अफवाह उड़ाए? मैं भी देख रहा हूं कुछ दिनों से लोग मुझे आते जाते देखकर मुंह छिपाकर हंस रहे हैं।

तुरंत ही राजा ने अपने मंत्री को बुलाया और कहा कि भाई राज्य में किसी ने मेरे बारे में ऐसी ऐसी अफवाह फैला दी कि मैं कव्वों को जन्म देता हूं बता मंत्री जी ऐसा हो सकता है? लेकिन लोग फिर भी इसे सच मान रहे हैं।

मंत्री बोला कि जी सूनी तो मैंने भी थी लेकिन विश्वास नहीं किया ऐसी बातों पर क्या यकीन करें? राजा बोला कि ऐसा कर इस बात का दोषी कौन है उसे ढुंढ और ऐसा कड़ा दंड दे कि उसकी सभी पुश्तें याद रखें।

मंत्री ने कहा कि राजा साहब दोषी को तो मैं जानता हूं कि कौन है उसे तो मैं दो मिनट में ढुंढ लाउंगा लेकिन आपको वचन देना पड़ेगा कि उसे दंड नहीं देना। राजा बोला कि यार मेरे बारे में इतनी कांव कांव कांव फैला दी और मैं उसे दंड भी नहीं दे सकता? मंत्री बोला कि जी फिर मैं भी दोषी को सामने नहीं ला सकता मैं भी वचनों से बंधा हुआ हूं।

राजा ने कहा कि ठीक है दंड नहीं दूंगा तुम दोषी को सामने लाओ। मंत्री हाथ जोड़कर खड़ा हो गया और बोला कि जी दोषी आपके सामने है मतलब ये सब मेरा किया धरा है। राजा ने कहा कि अरे तू? तूने मेरे बारे में अफवाह फैला दी? मंत्री ने कहा कि राजा साहब मेरे बारे में आप जो अफवाहें, कांव कांव सून रहे थे वे सब ऐसे ही फैलती हैं हर मुंह के साथ अफवाह फैलती चली जाती है।

सच को चलने के लिए पैरों की जरूरत होती है, लेकिन अफवाह को सिर्फ जुबान की।

राजा ने उस दिन फैसला किया कि किसी के विरुद्ध केवल सुनी-सुनाई बात पर फैसला नहीं होगा। पहले बात की जांच होगी, फिर निर्णय। कांव-कांव को रोकना मुश्किल है, लेकिन उसे सच मानना अपने हाथ में है।

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