अमावस्या को नेवला नहीं मिला तो राव ने उठाया मरा हुआ नेवला, पंडित के घर पहुंचकर बोला- “अकेला क्यों भुगतूं?”

रेवाड़ी जिले में एक राव साहब के घर में आर्थिक तंगी आ गई बड़ा परेशान रहते। एक दिन उनकी पत्नी ने कहा कि फलां गली में पंडितजी रहते हैं उनके पास जाओ वे कुछ उपाय जरूर बताएंगे जिससे हमारी गरीबी दूर होगी।

राव सहाब पंडितजी के पास पहुंचे, अब पंडितजी उस दिन खुद परेशान थे क्योंकि पत्नी से झगड़ा हुआ था और उन्हें भोजन नहीं मिला था। राव सहाब को आते देखा तो स्वागत किया आओ राव सहाब क्या खातिर करूं?

राव सहाब ने अपना दुखड़ा सुनाया और उपाय बताने को कहा, पंडितजी बोले राव सहाब अब गरीबी दूर होनी तो मुश्किल है लेकिन आप अगर अमावस्या के दिन नेवले के दर्शन कर पाए तो आपका दुख दूर हो जाएगा।

अब दो चार दिन बाद अमावस्या थी तो सुबह सुबह राव सहाब एक वन की तरफ चल पड़े और घुमते हुए नेवला ढुंढने लगे, लेकिन अफसोस उन्हें पुरा दिन नेवला दिखाई न दिया। हार थककर वापस लौट रहे थे तो रास्ते में एक नेवला मरा पड़ा था, उसे देखते ही चिंतित हो गए कि अब इसका क्या मतलब बनता है।

उन्होंने नेवला उठाकर अपने झोले में रख लिया और पंडितजी के घर जा पहुंचे, पूछा कि पंडितजी अगर मरा हुआ नेवला दिख जाए तब? पंडितजी ने कहा कि हे राम फिर तो सर्वनाश निश्चित है।

राव साहब ने झोले से मरा हुआ नेवला निकाला और पंडितजी की चौकी पर रखते हुए बोले,

पंडितजी, जब मेरा सर्वनाश तय है तो सोचा अकेला क्यों भुगतूं? आप भी दर्शन कर लो, शायद साझेदारी में दुर्भाग्य भी आधा-आधा बंट जाए।

उस दिन पंडितजी को समझ आ गया कि बिना सोचे-समझे दिया गया अंधविश्वासी उपाय कभी-कभी सलाह देने वाले पर भी भारी पड़ सकता है।

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