बहुत समय पहले किशनपुर नाम के एक गांव में रामू नाम का एक गरीब लकड़हारा रहता था। उसकी जिंदगी बेहद साधारण थी, लेकिन उसके दिल में इंसानों के साथ-साथ पशु-पक्षियों और दूसरे जीवों के लिए भी बहुत दया थी। वह खुद भले ही गरीब था, लेकिन किसी जरूरतमंद की मदद करने का मौका कभी नहीं छोड़ता था।
एक दिन रामू जंगल से लकड़ियां इकट्ठी करके लौट रहा था। काफी देर तक मेहनत करने के बाद वह थक गया, इसलिए रास्ते में एक बड़े पेड़ के नीचे बैठकर कुछ देर आराम करने लगा।
तभी उसे पास के एक पेड़ से पक्षियों के बच्चों की तेज आवाज सुनाई दी।
रामू ने ऊपर देखा तो उसके होश उड़ गए। एक सांप धीरे-धीरे पेड़ पर चढ़कर उस घोंसले की तरफ बढ़ रहा था, जिसमें चिड़िया के छोटे-छोटे बच्चे बैठे हुए थे।
बच्चे डर के मारे लगातार चीख रहे थे।
रामू समझ गया कि अगर उसने कुछ नहीं किया तो सांप उन मासूम बच्चों को अपना शिकार बना लेगा।
उसने बिना देर किए पेड़ पर चढ़ना शुरू कर दिया। रामू को अपनी तरफ आता देखकर सांप डर गया और नीचे उतरने लगा। इसी बीच बच्चों की मां चिड़िया भी वहां लौट आई।
चिड़िया ने जैसे ही रामू को अपने घोंसले के पास देखा, उसे गलतफहमी हो गई। उसे लगा कि रामू उसके बच्चों को नुकसान पहुंचाने के लिए घोंसले तक पहुंचा है।
वह गुस्से में रामू पर झपट पड़ी और अपनी चोंच से उसे मारने लगी।
रामू कुछ समझ पाता, उससे पहले आसपास की दूसरी चिड़ियां भी वहां पहुंच गईं। उन्होंने भी रामू को अपना दुश्मन समझ लिया और उस पर हमला शुरू कर दिया।
बेचारा रामू किसी तरह खुद को बचाते हुए पेड़ से नीचे उतरा। उसके शरीर पर चिड़ियों की चोंच के निशान पड़ गए थे, लेकिन उसने फिर भी उन्हें नुकसान पहुंचाने की कोशिश नहीं की।
कुछ देर बाद जब चिड़िया घोंसले के अंदर पहुंची तो उसने देखा कि उसके सारे बच्चे बिल्कुल सुरक्षित थे।
बच्चों ने अपनी मां को पूरी बात बता दी कि एक सांप उन्हें खाने के लिए घोंसले तक पहुंच गया था और रामू ने पेड़ पर चढ़कर उन्हें बचाया था।
अब चिड़िया को अपनी गलती का एहसास हुआ।
जिस व्यक्ति को वह अपना दुश्मन समझकर हमला कर रही थी, वही तो उसके बच्चों की जान बचाकर गया था।
चिड़िया रामू का शुक्रिया अदा करना चाहती थी, लेकिन वह उसकी भाषा नहीं बोल सकती थी। तभी उसे कुछ दिन पहले की एक घटना याद आई। दाना तलाशते समय उसे एक चमकता हुआ कीमती पत्थर मिला था, जिसे वह अपने घोंसले में ले आई थी।
चिड़िया उस पत्थर को लेकर रामू के पास पहुंची और उसे उसके सामने गिरा दिया।
रामू ने जब उस चमकते हुए हीरे को देखा तो वह हैरान रह गया। चिड़िया लगातार उसके आसपास उड़ती रही और अपनी आवाज में जैसे उसका धन्यवाद करती रही।
रामू समझ गया कि चिड़िया अपनी गलती के लिए माफी मांगने और उसके उपकार का बदला चुकाने की कोशिश कर रही है।
उसने हीरा उठा लिया, चिड़िया की ओर हाथ जोड़कर धन्यवाद किया और वहां से अपने घर की तरफ चल पड़ा।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।
रामू जैसे-जैसे जंगल से बाहर जाने लगा, कई चिड़ियां उसके ऊपर उड़ने लगीं। ऐसा लग रहा था जैसे वे सभी उस दयालु इंसान को सम्मान के साथ विदा करने आई हों।
रामू के चेहरे पर मुस्कान थी। उसने शायद उस दिन समझ लिया था कि किसी जीव के लिए किया गया छोटा-सा उपकार भी व्यर्थ नहीं जाता।
कहानी की सीख
हमारे अच्छे कर्मों का फल हमेशा उसी रूप में मिले, यह जरूरी नहीं है। लेकिन किसी जरूरतमंद इंसान या जीव की मदद करने से जो संतोष और खुशी मिलती है, वह अपने आप में बहुत बड़ी चीज है।
किसी जीव पर किया गया उपकार कभी व्यर्थ नहीं जाता। दया और भलाई का असर किसी न किसी रूप में वापस जरूर आता है।
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