कुवैत से लौटा था परिवार के साथ नई जिंदगी शुरू करने, कुछ ही दिनों बाद बेडरूम में मिली लाश… पत्नी के आंसुओं के पीछे छिपा था खौफनाक राज!


विदेश में सालों तक मेहनत करने के बाद जब रिजवान आलम ने कुवैत छोड़कर हमेशा के लिए अपने गांव लौटने का फैसला किया, तो उसके मन में एक ही सपना था—अब बाकी जिंदगी अपने परिवार और बच्चों के साथ बितानी है। लेकिन उसे शायद अंदाजा भी नहीं था कि घर वापसी का यह फैसला उसकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रिजवान जून में कुवैत से वापस अपने गांव लौटा था। बताया जा रहा है कि 3 जुलाई को वह अपनी पत्नी डेजी परवीन के साथ अपने माता-पिता से मिलने गया था। वहां से लौटने के बाद रात बीती और अगली सुबह उसके बेडरूम से उसकी रक्तरंजित लाश बरामद हुई।

शुरुआत में घर में चोरी और लूट के दौरान हत्या की आशंका जताई गई। लेकिन पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, कहानी में कई ऐसे सवाल सामने आए जिनका जवाब तलाशना जरूरी था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने पूछताछ और जांच के दौरान कथित तौर पर डेजी और अनवर नाम के एक व्यक्ति पर शक किया। जांच में पुलिस को दोनों के बीच पहले से परिचय और संपर्क होने की जानकारी मिलने की बात सामने आई।

रिजवान और डेजी की शादी वर्ष 2013 में हुई थी। शादी के कुछ समय बाद ही रिजवान रोजी-रोटी के लिए कुवैत चला गया था। वह लंबे अंतराल के बाद कुछ दिनों के लिए घर आता था। इस दौरान उनके तीन बच्चे भी हुए।

बताया जाता है कि डेजी परिवार के साथ रहने के बजाय किशनगंज के बिशनपुर गांव में अलग मकान में रहती थी। इसी दौरान उसकी जान-पहचान अनवर से बढ़ने की बात जांच में सामने आई।

मीडिया रिपोर्ट्स में पुलिस के हवाले से दावा किया गया है कि जब रिजवान जून में वापस लौटा और उसने विदेश वापस न जाने का फैसला किया, तो कथित तौर पर डेजी और अनवर के सामने परिस्थितियां बदल गईं।

पुलिस के अनुसार, 3 जुलाई की रात डेजी ने कथित तौर पर दरवाजा खोलकर अनवर को घर के अंदर बुलाया। इसके बाद रिजवान पर लोहे की रॉड से हमला किए जाने और उसकी हत्या किए जाने का आरोप है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, घटना के बाद कथित तौर पर हत्या में इस्तेमाल सामान और कुछ अन्य चीजें हटाने की कोशिश की गई।

हालांकि, यह पूरी कहानी पुलिस की जांच और मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आए आरोपों पर आधारित है। अंतिम सत्य का निर्धारण न्यायालय में उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।

इस घटना ने उन परिवारों के दर्द को भी सामने ला दिया है जहां कोई व्यक्ति वर्षों तक विदेश में रहकर अपने परिवार के भविष्य के लिए मेहनत करता है। घर से दूर रहना, अकेलेपन और कठिन परिस्थितियों में काम करना और अपनी कमाई परिवार को भेजना—कई प्रवासी कामगारों की जिंदगी का हिस्सा है।

रिजवान भी बेहतर भविष्य की उम्मीद में वर्षों तक कुवैत में रहा। लेकिन जिस घर और परिवार के बीच लौटकर वह नई शुरुआत करना चाहता था, वहीं उसकी जिंदगी खत्म हो गई।

यह मामला सिर्फ एक हत्या की जांच नहीं, बल्कि रिश्तों में भरोसे, दूरी और बदलती परिस्थितियों से जुड़े कई गंभीर सवाल भी खड़े करता है।

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