आकाश से गिरा रहस्यमयी शिवलिंग, बंजर खेत में एक रात में उग आई फसल और बदल गई बूढ़े किसान की पूरी किस्मत


उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव में - नाम था शिवपुर। गाँव के नाम के पीछे भी एक कहानी है, पर असली कहानी तो अब शुरू हुई।

शिवपुर में रहता था एक बूढ़ा किसान - रामदीन। उम्र 72 साल। उसकी एक बीघा जमीन थी, वो भी बंजर। तीन साल से बारिश नहीं हुई थी। उसके दो बेटे थे, दोनों शहर चले गए थे। पत्नी मर गई थी। रामदीन अकेला रहता था, एक टूटी झोपड़ी में। गाँव वाले उसे 'अभागा रामदीन' कहते थे। क्योंकि उसके खेत में कभी फसल नहीं होती थी।

रामदीन हर सुबह उठता, अपने खेत में जाता, सूखी मिट्टी को देखता और वापस आ जाता। उसके पास खाने को भी ठीक से नहीं था। पर एक आदत थी उसकी - वह हर सोमवार को शिव मंदिर जाता था। मंदिर भी टूटा-फूटा था। वहाँ कोई शिवलिंग नहीं था, सिर्फ एक जगह थी जहाँ लोग जल चढ़ाते थे। वह एक लोटा जल चढ़ा कर कहता - "बाबा, इस बार तो सुन लो।"

सावन का महीना था। अमावस की रात।

रामदीन अपनी झोपड़ी में सो रहा था। रात के करीब 2 बजे अचानक पूरे गाँव में तेज रोशनी हुई। जैसे दिन निकल आया हो। एक आग का गोला आसमान से गिरता हुआ दिखा। लोग चिल्लाने लगे - उल्का है, उल्का है।

वह गोला सीधा रामदीन के बंजर खेत में गिरा। जोर का धमाका हुआ। पूरा गाँव हिल गया।

सुबह जब गाँव वाले खेत पर पहुँचे तो देखा - खेत के बीच में एक गड्ढा बन गया है, करीब 10 फीट गहरा। और उस गड्ढे में धुआँ निकल रहा है। धुएँ के बीच कुछ चमक रहा है।

रामदीन डरते-डरते नीचे उतरा। देखा तो वह कोई पत्थर नहीं था। वह एक शिवलिंग था। करीब 3 फीट ऊँचा। काला, पर काले में से नीली रोशनी निकल रही थी। वह गर्म नहीं था, एकदम ठंडा था। उसे छूते ही रामदीन के शरीर में बिजली सी दौड़ी। वह शिवलिंग जमीन से आधा फुट ऊपर हवा में तैर रहा था।

गाँव वाले डर गए। पंडित को बुलाया गया। पंडित ने कहा - ये तो आकाशीय शिवलिंग है। पुराणों में लिखा है, जब किसी भक्त की तपस्या पूरी होती है तो आकाश से शिवलिंग गिरता है।

रामदीन ने कहा - मैंने तो कोई तपस्या नहीं की। मैं तो बस भूखा हूँ।

पंडित ने कहा - भूख से बड़ी कोई तपस्या नहीं।

खबर पूरे जिले में फैल गई। लोग आने लगे। कोई कहता इसे म्यूजियम में रखो, कोई कहता सरकार ले जाएगी। पर शिवलिंग वहाँ से हिलता ही नहीं था। दस लोगों ने मिलकर उठाने की कोशिश की, वह टस से मस नहीं हुआ।

रामदीन रात को वहीं खेत में बैठा रहा। उसे डर था कोई चुरा न ले जाए। आधी रात को उसे प्यास लगी। उसने देखा शिवलिंग के ऊपर एक बूंद पानी की टपक रही है। वह बूंद नीचे गिरते ही मिट्टी में समा गई और जहाँ गिरी वहाँ से एक छोटा सा हरा अंकुर फूट आया।

रामदीन ने ध्यान से देखा - जहाँ-जहाँ उस शिवलिंग का जल गिर रहा था, वहाँ-वहाँ बंजर जमीन हरी हो रही थी।

अगली सुबह चमत्कार हो गया। रामदीन की एक बीघा बंजर जमीन, जो तीन साल से बंजर थी, उसमें गेहूँ के छोटे-छोटे पौधे उग आए थे। एक रात में।

गाँव वाले हैरान। कृषि अधिकारी आए। उन्होंने मिट्टी चेक की। कहा - इस मिट्टी में तो सोना है। इसकी उर्वरक क्षमता 10 गुना बढ़ गई है।

रामदीन ने उस शिवलिंग को वहीं रहने दिया। उसने उसके चारों ओर ईंटों की छोटी सी बाउंड्री बना दी। रोज एक लोटा जल चढ़ाता।

पर चमत्कार यहीं खत्म नहीं हुआ।

एक हफ्ते बाद रामदीन की झोपड़ी के बाहर एक आदमी आया। उसने कहा - मैं जल बोर्ड से हूँ। आपके खेत के नीचे पानी का बहुत बड़ा भंडार मिला है। सैटेलाइट से पता चला है कि उल्का गिरने से जमीन के नीचे की चट्टान टूट गई और वहाँ मीठे पानी की नदी निकल आई है।

बोरिंग हुई। 20 फीट पर ही पानी निकल आया। ऐसा पानी जैसा अमृत।

रामदीन के खेत में अब साल में तीन फसल होने लगी। गेहूँ, सरसों, धान। उसकी एक बीघा जमीन अब पूरे गाँव को अनाज देने लगी।

दो महीने बाद उसके दोनों बेटे लौट आए। बोले - बाबू, हमें माफ कर दो। हमें लगा तुम अभागे हो। पर अब समझ आया तुम तो भाग्य वाले हो।

रामदीन ने कहा - मैं भाग्य वाला नहीं, मैं तो बस शिव वाला हूँ।

उसने अपने खेत में उस शिवलिंग के नाम पर एक छोटा सा मंदिर बनवाया। नाम रखा - आकाशेश्वर महादेव।

आज भी शिवपुर में अगर आप जाओगे तो वहाँ एक खेत के बीच में एक मंदिर है। मंदिर में वह शिवलिंग आज भी हवा में आधा इंच ऊपर तैरता है। वैज्ञानिक आए, उन्होंने चेक किया। कहा इसमें एक ऐसा चुम्बकीय पदार्थ है जो धरती के गुरुत्वाकर्षण को काट देता है। पर गाँव वाले कहते हैं - ये विज्ञान नहीं, विश्वास है।

रामदीन अब नहीं रहा। 95 साल की उम्र में मरा। मरते वक्त उसने अपने बेटों से कहा - इस शिवलिंग को मत बेचना। यह आकाश से नहीं, तुम्हारी किस्मत से गिरा था। जब तक यह यहाँ है, यह जमीन बंजर नहीं होगी। और जब तक यह जमीन हरी है, तुम्हारा मन बंजर नहीं होगा।

कहते हैं सावन की अमावस को आज भी उस मंदिर के ऊपर एक नीली रोशनी दिखती है, जैसे कोई तारा जमीन पर उतर आया हो। और जो भी सच्चे मन से वहाँ एक लोटा जल चढ़ाता है, उसकी सूखी किस्मत में भी अंकुर फूट आता है।

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