सुबह उठते ही एड़ी में दर्द, चलने में परेशानी और कुछ देर बाद आराम… शरीर का ये संकेत बिल्कुल नजरअंदाज न करें

सुबह उठते ही एड़ी में तेज दर्द क्यों होता है? जानिए इसके कारण और राहत पाने के आसान तरीके

सुबह बिस्तर से उठते ही अगर एड़ी में इतना तेज दर्द होता है कि पहले कुछ कदम चलना भी मुश्किल हो जाता है, तो इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर अगर दर्द रोज हो रहा है, बढ़ रहा है या बार-बार वापस आता है, तो इसके पीछे कोई खास कारण हो सकता है।

सुबह के पहले कदमों में एड़ी का दर्द प्लांटर फैशियाइटिस का एक आम लक्षण है। इसमें पैर के तलवे के नीचे मौजूद मजबूत ऊतक, जिसे प्लांटर फैशिया कहते हैं, पर ज्यादा दबाव पड़ने से दर्द और संवेदनशीलता हो सकती है। इस समस्या में दर्द अक्सर सोने या लंबे समय तक आराम करने के बाद उठते समय ज्यादा महसूस होता है और कुछ कदम चलने के बाद कम हो सकता है।

हालांकि हर एड़ी का दर्द प्लांटर फैशियाइटिस नहीं होता। एड़ी के दर्द के कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं, इसलिए केवल लक्षण देखकर खुद बीमारी तय करना सही नहीं है।

1. प्लांटर फैशियाइटिस

यह एड़ी के दर्द के सबसे आम कारणों में से एक है। पैर के तलवे में मौजूद प्लांटर फैशिया एड़ी से लेकर पैर की उंगलियों की तरफ जाता है और पैर के आर्च को सहारा देता है।

पैरों पर लगातार ज्यादा दबाव, लंबे समय तक खड़े रहना या चलना, अचानक एक्सरसाइज बढ़ाना, अधिक वजन, काफ मांसपेशियों का खिंचा होना और सही सपोर्ट न देने वाले जूते इसके जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

इसमें खास तौर पर सुबह के पहले कदमों या लंबे समय तक बैठने के बाद उठने पर दर्द महसूस होना सामान्य पैटर्न है।

2. अकिलिस टेंडन की समस्या

अगर दर्द एड़ी के पीछे की तरफ है और टखने या पिंडली तक महसूस होता है, तो अकिलिस टेंडन से जुड़ी समस्या भी एक कारण हो सकती है। अकिलिस टेंडन पिंडली की मांसपेशियों को एड़ी की हड्डी से जोड़ता है।

ऐसे दर्द में भी डॉक्टर को दिखाकर सही कारण पता करना बेहतर रहता है, क्योंकि एड़ी के दर्द के अलग-अलग कारणों का इलाज अलग हो सकता है।

3. स्ट्रेस फ्रैक्चर या चोट

अगर हाल ही में दौड़ना, तेज एक्सरसाइज या पैरों पर पड़ने वाला दबाव अचानक बढ़ा है और उसके बाद एड़ी में दर्द, सूजन या चलने में परेशानी शुरू हुई है, तो चोट या स्ट्रेस फ्रैक्चर जैसी समस्या भी हो सकती है।

ऐसी स्थिति को केवल घरेलू नुस्खों से ठीक करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। डॉक्टर जरूरत पड़ने पर जांच या इमेजिंग से दूसरे कारणों को अलग कर सकते हैं।

एड़ी के दर्द में घर पर क्या कर सकते हैं?

अगर दर्द हल्का है और किसी गंभीर चोट के बाद शुरू नहीं हुआ है, तो कुछ उपाय राहत देने में मदद कर सकते हैं।

1. बर्फ की सिकाई

दर्द वाली एड़ी पर कपड़े में लपेटकर आइस पैक करीब 15–20 मिनट लगाया जा सकता है। बर्फ को सीधे त्वचा पर न लगाएं।

कुछ लोगों को जमी हुई पानी की बोतल को कपड़े में लपेटकर पैर के तलवे के नीचे धीरे-धीरे रोल करने से भी आराम मिल सकता है।

2. सुबह उठने से पहले हल्की स्ट्रेचिंग

पैर और काफ की हल्की स्ट्रेचिंग प्लांटर फैशिया और एड़ी के आसपास के ऊतकों पर तनाव कम करने में मदद कर सकती है। नियमित स्ट्रेचिंग को प्लांटर फैशियाइटिस के प्रबंधन में महत्वपूर्ण माना जाता है।

एक आसान तरीका है—बैठकर पैर को सीधा रखें, पंजे के आगे तौलिया लगाएं और तौलिये को अपनी ओर धीरे-धीरे खींचें। करीब 30 सेकंड तक हल्का स्ट्रेच रखें और फिर छोड़ दें। दर्द बढ़े तो जबरदस्ती न करें।

3. सही जूते पहनें

बहुत पतली या कठोर सोल वाली चप्पल और बिना सपोर्ट के जूतों से बचें। ऐसे जूते चुनें जिनमें अच्छी cushioning और arch support हो। जरूरत पड़ने पर heel pad या insole भी उपयोगी हो सकता है।

4. लंबे समय तक खड़े रहने से बचें

अगर आपकी दिनचर्या में लंबे समय तक खड़े रहना, चलना या दौड़ना शामिल है और इससे दर्द बढ़ता है, तो कुछ समय गतिविधि कम करना मददगार हो सकता है। कठोर जमीन पर नंगे पैर ज्यादा चलने से भी बचें।

5. वजन पर ध्यान दें

अधिक वजन पैरों और एड़ी पर पड़ने वाले दबाव को बढ़ा सकता है। अगर वजन ज्यादा है तो संतुलित खानपान और नियमित, सुरक्षित गतिविधि के जरिए धीरे-धीरे स्वस्थ वजन की ओर बढ़ना मदद कर सकता है।

एक जरूरी बात

सरसों के तेल की मालिश, गर्म पानी या हल्दी वाला दूध जैसे घरेलू उपायों को बवासीर या एड़ी के दर्द का निश्चित इलाज नहीं मानना चाहिए। खासकर हल्दी वाला दूध एड़ी के दर्द को ठीक कर देगा, इसका पर्याप्त प्रमाण नहीं है। मुख्य ध्यान सही कारण की पहचान, उचित जूते, गतिविधि में बदलाव और नियमित स्ट्रेचिंग पर होना चाहिए।

अगर दर्द दो सप्ताह की घरेलू देखभाल के बाद भी ठीक नहीं होता, लगातार बढ़ रहा है, बार-बार लौट रहा है या सामान्य चलना-फिरना प्रभावित हो रहा है, तो डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से जांच कराना उचित है। पैरों में सुन्नपन/झनझनाहट हो या डायबिटीज हो तो भी चिकित्सकीय सलाह लेना खास तौर पर जरूरी है।

और अगर किसी चोट के बाद अचानक बहुत तेज दर्द, सूजन, आवाज के साथ चोट, पैर का आकार बदलना या चल पाने में असमर्थता हो, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। 

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