देवर की शादी से एक दिन पहले भाभी के फोन पर आया अनजान संदेश—“दूल्हे को मंडप में जाने से पहले ये तस्वीर जरूर दिखाना”, फोटो खुलते ही परिवार में मच गया हड़कंप


 मेरठ में रहने वाले राकेश के छोटे भाई सौरभ की शादी होने वाली थी। घर में तैयारियां जोरों पर थीं। शादी से एक दिन पहले परिवार के सभी लोग मेहमानों के स्वागत में व्यस्त थे।

रात करीब 11 बजे राकेश की पत्नी कविता के मोबाइल पर एक अनजान नंबर से संदेश आया।

संदेश में सिर्फ इतना लिखा था—

“अगर शादी कल भी होनी है, तो दूल्हे को मंडप में जाने से पहले यह तस्वीर जरूर दिखा देना।”

इसके साथ एक पुरानी तस्वीर भेजी गई थी।

कविता ने तस्वीर खोली तो उसके चेहरे का रंग बदल गया।

तस्वीर में सौरभ करीब दस साल पहले एक बुजुर्ग व्यक्ति के साथ खड़ा था। दोनों के पीछे एक पुरानी दुकान दिखाई दे रही थी। तस्वीर के पीछे तारीख लिखी थी।

कविता ने तुरंत राकेश को बुलाया।

दोनों ने तस्वीर को ध्यान से देखा, लेकिन उन्हें समझ नहीं आया कि इसका सौरभ की शादी से क्या संबंध है।

कविता ने उसी नंबर पर जवाब भेजा।

कुछ सेकंड बाद संदेश आया—

“यह तस्वीर सौरभ को दिखाओ। फिर उससे पूछना कि उसे यह आदमी याद है या नहीं।”

अगली सुबह कविता ने सौरभ को तस्वीर दिखाई।

तस्वीर देखते ही सौरभ कुछ देर के लिए चुप हो गया।

उसने बताया कि करीब दस साल पहले उसके पिता की आर्थिक स्थिति खराब थी। उसी समय वह एक दुकान पर काम करता था। तस्वीर में दिखाई दे रहा बुजुर्ग व्यक्ति उस दुकान का मालिक था।

लेकिन सौरभ ने यह बात घरवालों से कभी नहीं बताई थी कि उस समय दुकान से जुड़े एक हिसाब में बड़ी रकम गायब हो गई थी।

परिवार को लगा कि मामला चोरी का था।

सौरभ ने बताया कि असल में उसने पैसे नहीं लिए थे। दुकान के हिसाब-किताब में गड़बड़ी किसी और ने की थी और शक उस पर चला गया था। कुछ समय बाद दुकान बंद हो गई और मामला वहीं दब गया।

लेकिन अब सवाल था कि दस साल पुरानी तस्वीर अचानक शादी से एक दिन पहले क्यों भेजी गई?

राकेश ने तस्वीर में दिखाई दे रही दुकान का पता खोजने की कोशिश की। पुराने परिचितों से पूछताछ करने पर पता चला कि दुकान का मालिक अब शहर में नहीं रहता था।

फिर शाम को उसी अनजान नंबर से एक और संदेश आया।

इस बार सिर्फ एक दस्तावेज की तस्वीर भेजी गई थी।

दस्तावेज में उस समय की रकम का हिसाब था और नीचे किसी दूसरे व्यक्ति के हस्ताक्षर थे।

सौरभ ने दस्तावेज देखते ही कहा कि अब उसे समझ आ गया है कि उसके ऊपर लगा पुराना आरोप किसने लगाया था।

परिवार ने शादी रोकने के बजाय पहले मामले की सच्चाई जानने का फैसला किया। जांच में सामने आया कि सौरभ को दस साल पहले गलत तरीके से फंसाया गया था और असली गड़बड़ी दुकान के एक कर्मचारी ने की थी।

सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब उस अनजान नंबर के मालिक का पता चला।

वह दुकान मालिक का बेटा था, जिसने पुराने कागजात खोजने के बाद सौरभ को बदनाम करने वाले मामले की सच्चाई सामने लाने का फैसला किया था।

शादी के एक दिन पहले आया वह संदेश आखिरकार किसी रिश्ते को तोड़ने के लिए नहीं, बल्कि दस साल पुराने आरोप से सौरभ का नाम साफ करने के लिए था।

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