39 वर्षीय अजय अपनी पत्नी निशा के साथ रहता था। शादी को करीब 11 साल हो चुके थे। दोनों का परिवार सामान्य तरीके से चल रहा था, लेकिन पिछले कुछ महीनों से अजय ने नोटिस किया कि निशा हर मंगलवार सुबह तैयार होकर अकेले मंदिर चली जाती थी।
अजय पूछता तो निशा सिर्फ इतना कहती, “बस मन की शांति के लिए जाती हूं।”
लेकिन एक मंगलवार निशा मंदिर से लौटकर सीधे अपने कमरे में चली गई। उसके हाथ में एक छोटा लिफाफा था। अजय ने पूछा तो उसने कहा कि मंदिर में प्रसाद मिला है।
अजय को बात अजीब लगी।
अगले मंगलवार उसने निशा का चुपचाप पीछा करने का फैसला किया।
निशा शहर के पुराने मंदिर पहुंची और वहां पीछे की तरफ बने एक छोटे कमरे में चली गई। कुछ मिनट बाद एक बुजुर्ग व्यक्ति वहां आया। दोनों काफी देर तक गंभीर बातचीत करते रहे।
अजय दूर खड़ा सब देख रहा था।
कुछ देर बाद बुजुर्ग ने निशा को एक फाइल दी।
निशा फाइल लेकर तेजी से बाहर निकल गई।
अजय ने उसी समय उसे रोक लिया।
उसने पूछा, “ये कौन हैं और हर मंगलवार यहां क्या लेने आती हो?”
निशा घबरा गई।
बुजुर्ग ने अजय को देखते हुए कहा, “अब इसे सच बताना ही पड़ेगा।”
फाइल खोली गई।
अंदर अजय के पिता के नाम से जुड़े पुराने जमीन के कागज थे।
अजय हैरान रह गया।
निशा ने बताया कि शादी के कुछ समय बाद उसे पता चला था कि उसके ससुर ने एक जमीन खरीदी थी, लेकिन उस जमीन के मूल दस्तावेज अचानक गायब हो गए थे। कुछ साल बाद निशा को संयोग से पता चला कि उसी जमीन को किसी दूसरे व्यक्ति ने अपने नाम कराने की कोशिश की थी।
वह बुजुर्ग उसी मामले का पुराना गवाह था।
निशा पिछले कई महीनों से उससे मिलकर पुराने दस्तावेज जुटा रही थी।
लेकिन फाइल में एक ऐसा कागज भी था जिसने पूरा मामला पलट दिया।
उस पर अजय के ससुर का नाम लिखा था।
यानी जमीन के विवाद में सिर्फ अजय के परिवार का ही नहीं, निशा के मायके का भी संबंध था।
अजय ने निशा से पूछा कि उसने इतने साल तक यह बात छिपाई क्यों।
निशा ने बताया कि उसे डर था कि दोनों परिवारों के बीच पुराना विवाद फिर से शुरू हो जाएगा और उसकी शादी टूटने की स्थिति आ जाएगी।
मामला पुलिस तक पहुंचा तो पुराने रजिस्ट्रियों और दस्तावेजों की जांच शुरू हुई। जांच में पता चला कि वर्षों पहले जमीन के रिकॉर्ड में फर्जीवाड़ा किया गया था और परिवार के दो पक्षों को अलग-अलग जानकारी देकर जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की गई थी।
अजय को जिस बात पर सबसे ज्यादा शक था, उसका जवाब आखिरकार मिल गया।
निशा मंदिर में किसी गुप्त रिश्ते के लिए नहीं, बल्कि अपने ही परिवार से जुड़े 11 साल पुराने जमीन के रहस्य के सबूत जुटाने जाती थी।
और मंदिर में मिलने वाला वह बुजुर्ग कोई अजनबी नहीं, बल्कि उस पुराने विवाद का आखिरी जीवित गवाह था।
Post a Comment