नोएडा में रहने वाले 35 वर्षीय अंकित की शादी को करीब पांच साल हो चुके थे। उसकी पत्नी सोनिया एक निजी कंपनी में काम करती थी। पिछले कुछ दिनों से सोनिया ऑफिस से लौटने में लगातार देर कर रही थी। हर बार उसका कहना होता कि कंपनी में काम ज्यादा है और कभी-कभी मीटिंग भी देर तक चलती है।
एक रात सोनिया ने अंकित से कहा कि वह ऑफिस की जरूरी मीटिंग के कारण देर से घर आएगी। रात करीब 11 बजे अंकित के मोबाइल पर सोनिया का मैसेज आया कि वह अभी भी ऑफिस में है।
लेकिन करीब आधे घंटे बाद अंकित को एक अनजान नंबर से फोन आया।
फोन करने वाले ने सिर्फ इतना कहा, “अगर अपनी पत्नी के बारे में सच जानना चाहते हो तो सेक्टर-62 के होटल की पार्किंग में पहुंचो।”
अंकित कुछ समझ पाता, उससे पहले फोन कट गया।
वह तुरंत वहां पहुंचा। होटल की पार्किंग में उसे सोनिया की कार दिखाई दी। कार लॉक थी और आसपास कोई नजर नहीं आ रहा था।
अंकित ने कार के अंदर देखा तो पिछली सीट पर एक काला बैग रखा था।
कुछ देर बाद सोनिया अचानक वहां पहुंच गई।
अंकित ने गुस्से में पूछा, “तुमने कहा था कि ऑफिस में हो, फिर यहां क्या कर रही हो?”
सोनिया ने जवाब देने के बजाय बैग की तरफ देखा और घबरा गई।
अंकित ने बैग खोलने की कोशिश की तो सोनिया ने उसका हाथ रोक दिया।
यहीं से अंकित का शक और गहरा हो गया।
कुछ देर की बहस के बाद सोनिया ने आखिरकार बैग खोल दिया।
अंदर महंगे गहने, कुछ कागजात और कई लिफाफे थे।
अंकित को लगा कि मामला किसी गैरकानूनी काम से जुड़ा है।
लेकिन अगले ही पल सोनिया ने ऐसा सच बताया जिसकी अंकित ने कल्पना भी नहीं की थी।
वह गहने और कागजात उसके नहीं थे। उसकी कंपनी के एक वरिष्ठ कर्मचारी ने कुछ ग्राहकों के दस्तावेजों में गड़बड़ी की थी और सोनिया को इसका पता चल गया था। वह पिछले कई दिनों से सबूत इकट्ठा कर रही थी।
होटल में उसकी मुलाकात उसी कर्मचारी से होने वाली थी, लेकिन किसी ने उससे पहले अंकित को फोन करके वहां बुला दिया था।
सबसे बड़ा सवाल अब यह था कि अंकित को फोन किसने किया?
अगले दिन जांच में पता चला कि फोन करने वाला कोई बाहरी व्यक्ति नहीं बल्कि उसी कंपनी का एक कर्मचारी था, जिसे डर था कि सोनिया सारे दस्तावेज पुलिस को सौंप देगी।
मामला पुलिस तक पहुंचा और दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी गई।
अंकित को उस रात समझ आया कि जिस बात को वह पत्नी से जुड़ा कोई छिपा रिश्ता समझ रहा था, उसके पीछे असल में एक बड़ा वित्तीय मामला छिपा था।
लेकिन सबसे बड़ा रहस्य अब भी यही था कि सोनिया को कंपनी के इस मामले की जानकारी आखिर कैसे मिली थी—और वह अकेले कितने दिनों से इसकी जांच कर रही थी।
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