जयपुर में रहने वाले 36 वर्षीय रोहित को पिछले कुछ समय से अपनी पत्नी कविता के व्यवहार में बदलाव महसूस हो रहा था। कविता अक्सर शाम के समय किसी पुराने दोस्त से फोन पर बात करती थी। रोहित पूछता तो वह कहती कि वह अपने कॉलेज के पुराने परिचित संदीप से किसी जरूरी काम के सिलसिले में बात कर रही है।
कुछ दिनों बाद संदीप का घर पर आना-जाना भी शुरू हो गया। वह ज्यादातर उस समय आता जब रोहित ऑफिस में होता। पड़ोसियों ने भी यह बात नोटिस की, लेकिन परिवार का मामला समझकर किसी ने कुछ नहीं कहा।
एक शाम रोहित अचानक ऑफिस से जल्दी लौट आया। घर के बाहर संदीप की बाइक खड़ी देखकर उसे शक हुआ। अंदर पहुंचा तो कविता और संदीप अलग-अलग कमरे में बैठे मिले। रोहित ने गुस्से में सवाल किया तो दोनों ने कहा कि वे एक पुराने मामले को लेकर बात कर रहे थे।
रोहित को बात पर भरोसा नहीं हुआ। उसने संदीप का फोन देखने की मांग की। इसी दौरान संदीप ने एक ऐसा दस्तावेज निकाला जिसे देखकर रोहित चौंक गया।
दस्तावेज में रोहित के पिता के नाम दर्ज एक पुराने मकान की बिक्री का विवरण था।
कविता ने तब पूरी बात बताई। शादी से पहले उसके पिता ने एक कारोबारी से बड़ी रकम उधार ली थी। कर्ज चुकाने के लिए परिवार ने एक जमीन बेचने की कोशिश की थी, लेकिन उस सौदे में फर्जी दस्तावेज सामने आ गए थे। संदीप उसी पुराने मामले में कविता के परिवार की मदद कर रहा था।
सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब संदीप ने बताया कि किसी ने रोहित के परिवार की संपत्ति के फर्जी कागजात तैयार करके उसे बेचने की कोशिश की थी।
रोहित को समझ आया कि पत्नी और संदीप के बीच छिपकर होने वाली मुलाकातों का कारण कोई प्रेम संबंध नहीं बल्कि संपत्ति से जुड़ा विवाद था। हालांकि कविता ने यह बात इतने लंबे समय तक छिपाकर रखी, जिससे परिवार में विवाद और बढ़ गया।
मामला आखिरकार पुलिस तक पहुंचा और पुराने संपत्ति दस्तावेजों की जांच शुरू हुई। पुलिस ने फर्जी कागजात तैयार करने वाले लोगों की तलाश शुरू कर दी।
इस कहानी में पति को जिस रिश्ते पर शक था, उसके पीछे असल में कई साल पुराना संपत्ति विवाद छिपा था।
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