दिल उससे लगाओ जिसने तुम्हारा दिल बनाया है, क्योंकि दुनिया से जितना मोह बढ़ेगा, उतना ही बिछड़ने का डर भी बढ़ेगा।
एक बार एक राजा जंगल में शिकार और भ्रमण के लिए गया हुआ था। अचानक रास्ते में एक जहरीले सांप ने उसे काट लिया।
राजा के साथ मौजूद सैनिक घबरा गए। तुरंत राजवैद्य को बुलाया गया। वैद्य ने अपनी पूरी कोशिश की, लेकिन सांप का जहर तेजी से शरीर में फैल रहा था। राजा की हालत बिगड़ती जा रही थी।
तभी वहां एक दरवेश जैसा व्यक्ति आया।
उसने राजा को देखा, उसके पास गया और बिना कुछ कहे सांप के काटे हुए स्थान पर थूक दिया। इसके बाद वह वहां से तेजी से निकल गया।
राजा के साथी पहले ही उसकी हालत को लेकर परेशान थे, इसलिए उन्होंने उस अजीब हरकत पर ध्यान नहीं दिया और दरवेश को रोकने के लिए उसके पीछे भी नहीं गए।
कुछ देर बाद राजवैद्य ने राजा के पैर को साफ करना शुरू किया। तभी उसकी नजर उस जगह पर पड़ी जहां दरवेश की लार लगी थी।
वैद्य ने ध्यान से उस स्थान को देखा और कथित तौर पर पाया कि राजा की हालत में बदलाव आ रहा है। उसने उपचार जारी रखा और कुछ समय बाद राजा को होश आ गया।
जब राजा को बताया गया कि एक दरवेश वहां आया था और उसके बाद वहां से चला गया, तो राजा ने तुरंत सैनिकों को उसे ढूंढने का आदेश दिया।
काफी तलाश के बाद दरवेश एक पेड़ के नीचे मिला। उसे सम्मान के साथ राजा के सामने लाया गया।
राजा ने दरवेश को देखते ही कहा,
“मैं तुम्हें पहचान नहीं सका। इसके लिए मुझे क्षमा करो। तुमने मेरी जान बचाई है। मैं तुम्हें बहुमूल्य वस्त्र और एक अरबी घोड़ा देना चाहता हूं।”
दरवेश मुस्कुराया और बोला,
“हुजूर, ये कपड़े तो बहुत कीमती हैं। अगर इन्हें पहनकर मैं घोड़े के लिए घास काटने निकलूंगा तो कैसा लगेगा?”
राजा ने कहा,
“तुम्हें घास काटने की जरूरत नहीं होगी। घोड़े के साथ सेवक भी दिए जाएंगे।”
दरवेश ने फिर पूछा,
“लेकिन इतने महंगे कपड़े, घोड़ा और सेवक लेकर मैं रहूंगा कहां?”
राजा मुस्कुराया,
“तुम्हारे लिए एक शानदार महल बनवा दिया जाएगा।”
दरवेश ने फिर सवाल किया,
“और उस महल में मैं अकेला रहूंगा?”
राजा ने कहा,
“नहीं। मेरी बेटी राजकुमारी गुलनार से तुम्हारा विवाह कर दिया जाएगा।”
दरवेश कुछ देर चुप रहा और फिर बोला,
“अगर राजकुमारी से विवाह होगा तो बच्चे भी होंगे।”
राजा ने कहा,
“बिल्कुल। मेरी दुआ है कि तुम्हारे बहुत सारे बच्चे हों।”
दरवेश ने फिर पूछा,
“लेकिन अगर उन बच्चों में से किसी को कुछ हो गया तो?”
राजा ने जवाब दिया,
“अगर ऐसा ईश्वर की इच्छा से हुआ, तो तुम्हें दुख होगा और तुम्हें ही रोना पड़ेगा।”
दरवेश ने राजा की ओर देखा और मुस्कुराते हुए कहा,
“तो फिर मुझे ये सब नहीं चाहिए।”
राजा हैरान होकर बोला,
“क्यों?”
दरवेश ने कहा,
“जब इतने महल, धन, घोड़े, नौकर और रिश्ते मिलने के बाद भी अंत में मुझे इन्हीं चीजों के खोने का डर और दुख झेलना है, तो फिर मैं इस मोह में पड़ूं ही क्यों? मैं अपने दरवेश के जीवन में खुश हूं।”
राजा उसके शब्द सुनकर मौन हो गया।
दरवेश ने सिर झुकाया और वहां से चला गया।
कहानी की सीख यही है कि दुनिया की हर चीज जिसे हम अपना समझकर पकड़ते हैं, एक दिन हमसे दूर हो सकती है। धन जाएगा, पद जाएगा, शरीर जाएगा और रिश्ते भी समय के साथ बदल सकते हैं।
इसलिए संसार में रहते हुए अपना कर्तव्य जरूर निभाइए, अपनों से प्रेम जरूर कीजिए, लेकिन अपने सुख का पूरा आधार केवल दुनिया की चीजों को मत बनाइए।
दिल उस परमात्मा से लगाइए जिसने आपको यह दिल दिया है। क्योंकि दुनिया से जरूरत से ज्यादा मोह अक्सर खुशी से ज्यादा डर और बिछड़ने का दर्द देता है।
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