पेशाब से जुड़ी कुछ परेशानियां ऐसी होती हैं जिन्हें लोग शुरुआत में उम्र बढ़ने या पानी ज्यादा पीने जैसी सामान्य वजह मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर पेशाब की धार लगातार कमजोर हो रही है, टॉयलेट में पहले से ज्यादा समय लग रहा है या रात में बार-बार पेशाब के लिए उठना पड़ रहा है, तो इस बदलाव पर ध्यान देना जरूरी है।
कभी-कभार ऐसा होना जरूरी नहीं कि किसी गंभीर समस्या का संकेत हो। लेकिन जब ये लक्षण लगातार बने रहें या धीरे-धीरे बढ़ते जाएं, तो इनके पीछे की वजह जानने के लिए डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है।
कमजोर यूरिन फ्लो आखिर क्यों होता है?
सामान्य स्थिति में ब्लैडर की मांसपेशियां सिकुड़ती हैं और पेशाब मूत्रमार्ग यानी यूरेथ्रा से होकर शरीर के बाहर निकलता है। इस रास्ते में किसी तरह की रुकावट हो या ब्लैडर की मांसपेशियों की कार्यक्षमता प्रभावित हो, तो पेशाब की धार कमजोर पड़ सकती है।
ऐसे में व्यक्ति को कई तरह की दिक्कतें महसूस हो सकती हैं। मसलन, पेशाब शुरू होने में समय लगना, धार का पतला या कमजोर होना, बीच-बीच में पेशाब रुकना या टॉयलेट में सामान्य से काफी ज्यादा समय लगना।
कुछ लोगों को पेशाब करने के बाद भी ऐसा महसूस होता है कि ब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं हुआ।
अगर ये समस्या बार-बार हो रही है, तो इसे सिर्फ सामान्य परेशानी समझकर टालना ठीक नहीं है।
पुरुषों में प्रोस्टेट बढ़ना हो सकता है एक कारण
उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों में Benign Prostatic Hyperplasia यानी BPH एक आम समस्या हो सकती है। इसमें प्रोस्टेट ग्रंथि कैंसर के कारण नहीं, बल्कि सामान्य रूप से बढ़ सकती है।
प्रोस्टेट मूत्रमार्ग के आसपास स्थित होता है। इसके आकार में वृद्धि होने पर कुछ लोगों में मूत्रमार्ग पर दबाव पड़ सकता है। इसके कारण पेशाब शुरू करने में परेशानी, कमजोर धार, बार-बार पेशाब लगना और रात में कई बार टॉयलेट जाना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
हालांकि, हर कमजोर यूरिन फ्लो का कारण प्रोस्टेट ही हो, यह जरूरी नहीं है।
यूरेथ्रल स्ट्रिक्चर भी हो सकती है वजह
कमजोर धार का एक दूसरा संभावित कारण यूरेथ्रल स्ट्रिक्चर है। इसमें मूत्रमार्ग किसी हिस्से में संकरा हो जाता है, जिससे पेशाब के बाहर निकलने में परेशानी हो सकती है।
पिछली चोट, कुछ मेडिकल प्रक्रियाएं या संक्रमण जैसी स्थितियां इसके संभावित कारणों में शामिल हो सकती हैं।
ऐसी स्थिति में व्यक्ति को पेशाब करने में ज्यादा समय लग सकता है और धार सामान्य से कमजोर महसूस हो सकती है।
रात में बार-बार पेशाब आना भी ध्यान देने वाला संकेत
अगर आपको पहले की तुलना में दिन में बहुत ज्यादा बार पेशाब आने लगा है या रात में बार-बार उठकर टॉयलेट जाना पड़ रहा है, तो इस बदलाव पर ध्यान देना चाहिए।
खासकर जब इसके साथ कमजोर धार, पेशाब शुरू करने में परेशानी, अचानक तेज पेशाब लगना या ब्लैडर पूरी तरह खाली न होने का एहसास भी हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना उचित है।
हालांकि, बार-बार पेशाब आने का मतलब हमेशा कोई एक बीमारी नहीं होता। ज्यादा तरल पदार्थ पीना, कैफीन, कुछ दवाएं, संक्रमण और कई अन्य स्वास्थ्य स्थितियां भी इसका कारण हो सकती हैं।
इसलिए केवल लक्षण देखकर खुद किसी बीमारी का निष्कर्ष निकालना सही नहीं है।
पेशाब में जलन या दर्द हो तो सावधान
पेशाब करते समय जलन या दर्द को भी लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) सहित कई समस्याओं से जुड़ा हो सकता है।
अगर जलन के साथ बार-बार पेशाब आना, अचानक तेज पेशाब लगना, निचले पेट में असहजता या यूरिन पैटर्न में बदलाव भी हो रहा है, तो चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।
अगर इन लक्षणों के साथ बुखार भी है, तो खास तौर पर सावधानी बरतनी चाहिए।
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
अगर कमजोर यूरिन फ्लो के साथ इनमें से कोई समस्या है, तो डॉक्टर से जांच कराने में देरी न करें:
- पेशाब की धार लगातार कमजोर होना
- पेशाब शुरू करने में परेशानी या जोर लगाना
- टॉयलेट में असामान्य रूप से ज्यादा समय लगना
- रात में बार-बार पेशाब के लिए उठना
- पेशाब करने के बाद भी ब्लैडर खाली न होने का एहसास
- पेशाब करते समय दर्द या जलन
- पेशाब में खून आना
- बार-बार यूरिनरी इंफेक्शन होना
- निचले पेट में दर्द या भारीपन
- बुखार के साथ पेशाब संबंधी समस्या
और अगर पेशाब करने की तेज इच्छा होने के बावजूद बिल्कुल पेशाब नहीं निकल रहा, तो इसे गंभीरता से लें और तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
हर समस्या का कारण पानी की कमी नहीं
कई लोग यूरिन से जुड़ी हर परेशानी को कम पानी पीने से जोड़ देते हैं। पेशाब का गहरा पीला रंग कभी-कभी शरीर में पानी की कमी का संकेत हो सकता है, लेकिन कमजोर धार या पेशाब शुरू करने में लगातार परेशानी को केवल पानी की कमी मान लेना सही नहीं है।
अगर पर्याप्त पानी पीने के बावजूद समस्या बनी हुई है, तो इसके दूसरे संभावित कारणों की जांच जरूरी हो सकती है।
इसी तरह बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक, प्रोस्टेट की दवा या कोई अन्य दवा शुरू नहीं करनी चाहिए। सही उपचार समस्या के वास्तविक कारण पर निर्भर करता है।
डॉक्टर कौन-सी जांच करा सकते हैं?
आपकी उम्र, लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर डॉक्टर अलग-अलग जांच की सलाह दे सकते हैं। इनमें यूरिन टेस्ट, ब्लड टेस्ट, प्रोस्टेट से जुड़ी जांच और जरूरत के अनुसार यूरिनरी सिस्टम की अन्य जांच शामिल हो सकती हैं।
कुछ मामलों में डॉक्टर यह भी जांच सकते हैं कि पेशाब करने के बाद ब्लैडर में कितना यूरिन बचा हुआ है और पेशाब का फ्लो कैसा है।
कब तुरंत मदद लेना जरूरी है?
अगर पेशाब पूरी तरह रुक गया है, पेशाब में खून आ रहा है, तेज दर्द है, बुखार के साथ हालत बिगड़ रही है या पेशाब की समस्या अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गई है, तो इंतजार करने के बजाय तुरंत चिकित्सा सहायता लेना बेहतर है।
निष्कर्ष
कमजोर यूरिन फ्लो या रात में बार-बार टॉयलेट जाना हमेशा किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता। इसके पीछे BPH, यूरेथ्रल स्ट्रिक्चर, संक्रमण, ब्लैडर की समस्या या अन्य कारण हो सकते हैं।
लेकिन अगर समस्या लगातार बनी हुई है, धीरे-धीरे बढ़ रही है या इसके साथ दर्द, जलन, खून, बुखार अथवा पेशाब रुकने जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो डॉक्टर या यूरोलॉजिस्ट से जांच कराना जरूरी है।
लक्षणों को देखकर खुद बीमारी तय न करें और बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा न लें।
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