एक व्यक्ति ने गुस्से और frustration में अपना आयुष्मान कार्ड तक तोड़ दिया। उनका कहना है कि उन्होंने अपेंडिक्स और बवासीर की सर्जरी करवाई, लेकिन अस्पताल में उनका आयुष्मान कार्ड स्वीकार नहीं किया गया।
अस्पताल का बिल करीब ₹55,000 आया, जबकि दवाइयों, जांच, आने-जाने और अन्य खर्चों को मिलाकर उन्होंने अपनी जेब से करीब ₹70,000 खर्च किए।
इसके बाद उन्होंने आयुष्मान हेल्पलाइन पर फोन कर इसकी वजह जानने की कोशिश की।
वहां से उन्हें बताया गया कि कार्ड हर बीमारी या हर अस्पताल में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, बल्कि कुछ चुनिंदा इलाज और निर्धारित अस्पतालों में ही इसका लाभ मिलता है।
हेल्पलाइन के अनुसार, जिस तरह के इलाज उन्होंने करवाए, वे उस अस्पताल में पिछले साल तक ही कवर थे।
व्यक्ति का कहना है कि यह सब जानकर वह इतने परेशान और निराश हुए कि गुस्से में उन्होंने अपना आयुष्मान कार्ड ही तोड़ दिया।
सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए। अगर जरूरत के समय अस्पताल आयुष्मान कार्ड ही स्वीकार नहीं करेंगे, तो
फिर ऐसे कार्ड का आम लोगों को क्या फायदा? सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पात्र लोगों को इलाज के लिए परेशान न होना पड़े।
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