चार साल तक चले रिश्तों के तनाव, बहसों और कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार वह दिन आ ही गया, जब दोनों के रिश्ते पर अदालत ने कानूनी तौर पर विराम लगा दिया। हाथ में तलाक के कागज थे और मन में बीते चार सालों की अनगिनत यादें। पत्नी कोर्ट से बाहर निकली तो उसे लगा था कि अब उसकी और उसके पति की राहें हमेशा के लिए अलग हो चुकी हैं।
लेकिन कोर्ट की सीढ़ियां उतरने के कुछ ही पल बाद उसे ऐसा दृश्य दिखाई दिया, जिसने उसके कदम रोक दिए।
कोर्ट के सामने सड़क किनारे एक छोटा-सा चाय का ठेला लगा था। वहीं उसका पूर्व पति अकेला बैठा हुआ था। चेहरे पर थकान थी और आंखों में ऐसी खामोशी, जैसे अंदर बहुत कुछ चल रहा हो। महिला जाने क्यों उसके पास जाकर बैठ गई। दोनों कुछ देर तक बिना कुछ कहे एक-दूसरे के पास बैठे रहे।
तभी पति ने चाय वाले की तरफ देखकर कहा, “दो कड़क अदरक वाली चाय बनाना।”
महिला ने उसकी तरफ देखा। चार साल की कड़वाहट के बावजूद उसे तुरंत याद आया कि उसका पति आज भी जानता था कि उसे अदरक वाली चाय कितनी पसंद है।
चाय आई तो दोनों ने कप हाथ में ले लिया। मगर बातचीत फिर भी नहीं हुई।
कुछ देर बाद महिला धीरे से उसके थोड़ा और पास जाकर बैठी और पूछा, “आप अपनी दवाई रोज ले रहे हो ना?”
पति ने उसकी तरफ देखा तक नहीं। बस हल्का सा सिर हिला दिया।
फिर दोनों के बीच वही खामोशी लौट आई।
कुछ मिनट बाद पति ने खुद ही बोलना शुरू किया। उसकी आवाज में पहले जैसी मजबूती नहीं थी।
उसने कहा, “डॉक्टर ने बताया है कि शायद अब मेरे पास ज्यादा से ज्यादा एक साल है… अगले हफ्ते से कीमोथेरेपी के लिए बुलाया है।”
यह सुनते ही महिला जैसे भीतर से टूट गई। जिस इंसान से चार साल तक अलग होने के लिए लड़ती रही, उसी के सामने अब जिंदगी और मौत का सवाल खड़ा था।
कुछ पल तक वह कुछ बोल ही नहीं पाई।
पति ने आगे कहा कि अदालत ने उसे महिला को आठ लाख रुपये देने का आदेश दिया है, लेकिन फिलहाल उसके पास इतनी रकम नहीं है। फिर उसने कहा कि वह रोहिणी वाला फ्लैट अपने नाम कर ले। घर में रखे सोने के गहने भी वह रख ले, ताकि बेटी बिट्टो की शादी में काम आ सकें।
इसके बाद उसने कहा कि वह अपना घर भी उसके नाम कर देगा, ताकि उसके जाने के बाद उसे किसी चीज की परेशानी न हो।
महिला ने उसकी बात बीच में ही रोक दी।
उसने भर्राई हुई आवाज में कहा, “चुप… अब अगर एक शब्द भी कहा ना, तो मैं आपको कहीं छोड़कर नहीं जाने वाली।”
चार साल की नाराजगी, शिकायतें और कानूनी लड़ाई जैसे उसी एक पल में पीछे छूट गईं। उसकी आंखों से आंसू बहने लगे।
पति ने जब उसे रोते देखा तो वह भी खुद को रोक नहीं पाया। उसकी आंखों से आंसू निकल पड़े।
वह बस इतना कह सका, “मुझे अकेला छोड़कर मत जाओ… मैं अभी मरना नहीं चाहता।”
यह सुनते ही महिला ने उसे गले लगा लिया।
जिस रिश्ते को कुछ देर पहले अदालत ने कागजों पर खत्म कर दिया था, भावनाओं ने उसी रिश्ते को फिर से एक नया अर्थ दे दिया।
महिला वहां से अकेली नहीं गई। वह अपने पूर्व पति के साथ सीधे ससुराल चली गई।
कहानी का सबसे भावुक हिस्सा शायद यही है कि कभी-कभी रिश्ते कागजों पर खत्म हो जाते हैं, लेकिन वर्षों की साथ निभाई जिंदगी, परवाह और पुरानी यादें इतनी आसानी से खत्म नहीं होतीं। एक बीमारी, एक डर या जिंदगी की कोई बड़ी सच्चाई इंसान को उन बातों के बारे में दोबारा सोचने पर मजबूर कर सकती है, जिन्हें वह कभी अंतिम फैसला समझ चुका था।
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