पिता ने मरते समय बेटे से कहा था—“मुसीबत में डरना मत, अक्ल से काम लेना”, बेटे ने वेश्या का एक बाल लेकर राजा से ऐसा धन ऐंठा कि पूरा दरबार हैरान रह गया

एक सेठ का लड़का गलत रास्ते चल पड़ा , सेठ ने उसे खूब समझाया कि बेटा हमारा काम व्यापार करना है तू कहां इन नाच गाना करने वालों और वेश्याओं के चक्कर लगा रहा है। चरित्रहीन व्यक्तियों की समाज में इज्जत नहीं होती तू मत कर ये काम।

मगर वो ऐसे दल-दल में फंसा कि निकल नहीं पाया। आखिरकार सेठ की मृत्यु का समय आ गया और उसने अपने बेटे को बुलाकर कहा कि देख तूने सबकुछ गड़बड़ कर दिया लेकिन फिर भी मैं तूझे समझाता हूं कि जब सबकुछ खत्म हो जाए तो डरिए मत अक्ल से काम लेना, जो समझदार आदमी है ना वो बाल के सहारे भी कमा खा सकता है।

सेठ परलोक सिधार गया, उसके बाद जो धन था वो भी निपट गया इसके बाद उसकी जिस वेश्या से यारी थी उसने भी बेइज्जती करके भगा दिया, जाते वक्त वेश्या से बोला कि मैं जा रहा हूं पर मुझे अपना एक बाल दे दो। वेश्या बोली बाल का क्या करोगे? बोला कुछ नहीं मैं इसी के सहारे जिंदगी काट लुंगा तुम्हारी याद में। वेश्या ने उसे अपना बाल तोड़कर दे दिया।

सेठ का लड़का वो बाल लेकर एक सुनार के पास पहुंचा और बोला कि इसे सोने में मढ़ दे। सुनार बोला कि भाई एक साधारण बाल को सोने में क्यों मढ़वा रहे हो आखिर क्या बात है? बोला कि मैं जंगल में गया था बड़ा परेशान था तभी एक साधू वहां आए और मुझे अपना बाल तोड़कर दिया और कहा कि जिस घर में ये बाल रहेगा वहां धन धान्य की कमी नहीं होगी और उसकी सात पीढ़ी बैठकर खाएंगी ऐसा साधू का वरदान है।

सुनार को लालच आ गया वो तुरंत राजा के पास पहुंचा और बोला कि महाराज इस इस तरह एक साधू का बाल है और मैंने सोने में मढ़कर दिया है फलां आदमी के पास है देख लो अगर आपको चाहिए तो? राजा ने सोचा कि धन धान्य की कमी नहीं होगी और सात पीढ़ी बैठकर खाएंगी ऐसा बाल तो मेरे पास होना चाहिए उसने सुनार को अशर्फियों से भरी थैली ईनाम देकर विदा किया।

राजा ने सेठ के लड़के को बुला भेजा और पुछा कि भाई सुना है तू जंगल से साधू का बाल लेकर आया है और सोने में मढ़वाकर रखा है? लड़का बोला हां महाराज वो मेरे घर रखा है। राजा ने कहा कि भाई उसे खजाने में जमा करवाओ। बोला कि करवा दुंगा महाराज मगर मेरा भी तो कुछ जीने का आसरा होना चाहिए?

राजा ने कहा कि जितना धन कभी तुम्हारे पिता के पास था उतना मैं तुझे देता हूं। राजा ने बाल अपने खजाने में रख लिया और सेठ का लड़का धन लेकर घर चला गया।

मुसीबत में धन नहीं, बुद्धि काम आती है और लालच में फंसे बुद्धिमान लोग भी मूर्ख बन जाते हैं।

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