गीदड़ी के कान पकड़कर खड़ा था बूढ़ा, युवक ने पूछा तो बोला- ‘इसके कान हिलाते ही चांदी गिरती है’… लालच में युवक ने खुद मुसीबत पकड़ ली


एक गांव का आदमी अपनी फसल बेचकर वापस घर लौट रहा था। उन दिनों गांवों के बीच पक्की सड़कें नहीं होती थीं। लोग कच्चे रास्तों से पैदल ही एक जगह से दूसरी जगह जाते थे।

उस किसान की झोली में फसल बेचकर मिले चांदी के सिक्के थे। रास्ते में अचानक उसके सामने एक जंगली गीदड़ी आ गई। गीदड़ी इतनी आक्रामक थी कि आदमी ने डर के मारे उसकी झोली छोड़ दी और उसके दोनों कान कसकर पकड़ लिए।

अब हालत ऐसी थी कि अगर वह गीदड़ी के कान छोड़ देता तो वह उसे काट सकती थी। वह बेचारा वहीं खड़ा रह गया।

उसी समय वहां से एक नवयुवक गुजर रहा था। उसने आदमी को गीदड़ी के कान पकड़े देखा तो हैरान होकर पूछा, “चाचा, ये क्या कर रहे हो?”

आदमी ने तुरंत एक चाल चली। उसने बड़ी गंभीरता से कहा, “अरे बेटा, जब मैं इसके कान हिलाता हूं ना, तो इसके मुंह से चांदी के सिक्के गिरते हैं। देख, सामने कितने सिक्के पड़े हैं!”

युवक ने जमीन पर पड़े सिक्के देखे तो उसकी आंखें चमक उठीं।

उसने कहा, “चाचा, अगर ऐसी बात है तो मुझे भी इसके कान हिलाने दीजिए।”

आदमी ने कहा, “ठीक है, लेकिन कान बहुत कसकर पकड़ना और जब तक मैं अपने सिक्के नहीं उठा लेता, तब तक इसे बिल्कुल मत हिलाना। अगर तूने पहले हिला दिया तो तेरे और मेरे सिक्के आपस में मिल जाएंगे।”

युवक लालच में तुरंत तैयार हो गया। उसने गीदड़ी के दोनों कान पकड़ लिए और आदमी अपने गिरे हुए सिक्के उठाने लगा।

एक-एक करके उसने सारे सिक्के अपनी झोली में रख लिए। फिर झोली कंधे पर डाली और आराम से वहां से चलने लगा।

युवक को लगा अब उसकी बारी है। जैसे ही उसने गीदड़ी के कान हिलाए, गीदड़ी जोर से गुर्राई।

युवक घबरा गया। उसने चिल्लाकर कहा, “चाचा! आपने तो मुझे फंसा दिया। अब मैं क्या करूं?”

आदमी दूर जाते-जाते पलटा और बोला—

“बेटा, तेरे से बड़ा बेवकूफ आने दे… उसे पकड़ा देना!”

इतना कहकर वह वहां से निकल गया।

युवक गीदड़ी के कान पकड़े खड़ा रह गया और उसे समझ आ गया कि आसान कमाई के लालच में उसने बिना सोचे-समझे खुद को मुसीबत में फंसा लिया।

कहानी की सीख

जहां फायदा बहुत आसान और बिना मेहनत के दिखाई दे, वहां सबसे पहले उसके पीछे छिपे जोखिम को देखना चाहिए। लालच अक्सर इंसान से वही काम करवा देता है, जिसे वह सामान्य स्थिति में कभी नहीं करता।

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