राजा ने पूछा- इंसान को सबसे ज्यादा सुख किस चीज से मिलता है? बूढ़े का जवाब सुनकर पूरा दरबार सोच में पड़ गया


एक बार एक राजा ने अपने दरबार में एक बेहद दिलचस्प सवाल पूछा—

“मनुष्य को संसार में सबसे ज्यादा आनंद आखिर किस चीज से मिलता है?”

राजा का सवाल सुनकर दरबार में बैठे लोग अपनी-अपनी समझ के हिसाब से जवाब देने लगे।

किसी ने कहा, “महाराज, सबसे बड़ा सुख धन-दौलत में है।”

दूसरे ने कहा, “नहीं महाराज, असली सुख सत्ता और सम्मान में है।”

तीसरे व्यक्ति ने कहा, “मनुष्य को सबसे ज्यादा आनंद प्रेम से मिलता है।”

किसी ने स्वादिष्ट भोजन को सबसे बड़ा सुख बताया तो किसी ने कहा कि दिनभर की थकान के बाद मिलने वाली गहरी नींद से बढ़कर कुछ नहीं।

एक व्यक्ति ने यह भी कहा कि पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और सहमति से मिलने वाला शारीरिक सुख भी इंसान के जीवन के महत्वपूर्ण सुखों में से एक है।

राजा ने सभी की बातें सुनीं, लेकिन किसी भी जवाब से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुआ।

तभी दरबार के एक बुजुर्ग व्यक्ति मुस्कुराए और बोले—

“महाराज, सुख किसी एक वस्तु या परिस्थिति में नहीं होता। जिस समय शरीर और मन को जिस चीज की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, उसी जरूरत की पूर्ति उस क्षण सबसे बड़ा सुख बन जाती है।”

राजा को यह जवाब थोड़ा दार्शनिक लगा। वह शायद इसका कोई ठोस उदाहरण चाहता था।

कुछ देर बाद अचानक राजा को तेज शौच की इच्छा हुई।

वह उस समय भी दरबार में बैठा हुआ था।

उसके सामने धन था।

सत्ता थी।

कीमती वस्तुएं थीं।

स्वादिष्ट भोजन था।

संगीत और मनोरंजन के साधन थे।

लेकिन उस समय राजा का ध्यान किसी भी चीज पर नहीं था।

उसके मन में केवल एक ही विचार चल रहा था—

“बस किसी तरह जल्दी से शौचालय पहुंच जाऊं!”

राजा बेचैनी से अपनी जरूरत पूरी होने का इंतजार करता रहा।

आखिरकार वह शौचालय गया और अपनी प्राकृतिक जरूरत पूरी करके वापस दरबार में लौटा।

अब उसके चेहरे पर पहले वाली बेचैनी नहीं थी। बल्कि एक अलग ही तरह की राहत दिखाई दे रही थी।

बुजुर्ग व्यक्ति ने मुस्कुराकर पूछा—

“महाराज, अब कैसा लग रहा है?”

राजा भी मुस्कुराया और बोला—

“ऐसा लग रहा है जैसे मुझे कोई बहुत बड़ी खुशी मिल गई हो।”

बुजुर्ग ने कहा—

“महाराज, यही तो मैं आपको समझाना चाहता था।”

उन्होंने आगे कहा—

“जब इंसान बहुत भूखा होता है, तब भोजन उसे सबसे बड़ा सुख लगता है। जब प्यास बहुत तेज होती है, तब एक गिलास पानी किसी खजाने से कम नहीं लगता। जब शरीर थक जाता है, तब गहरी नींद सबसे बड़ी राहत बन जाती है।”

“जब मन अकेला होता है, तब किसी अपने का साथ सबसे अनमोल लगता है। जब दो वयस्क लोगों के बीच प्रेम, विश्वास और सहमति हो, तब पति-पत्नी के बीच का स्नेह और शारीरिक निकटता भी जीवन के स्वाभाविक सुखों में से एक हो सकती है।”

फिर बुजुर्ग ने राजा की ओर देखते हुए कहा—

“और जब किसी व्यक्ति को शौच की बहुत तेज जरूरत महसूस हो रही हो, तब उस समय उसके लिए सबसे बड़ा सुख यही होगा कि उसे तुरंत एक साफ और सुरक्षित शौचालय मिल जाए।”

राजा ध्यान से उनकी बात सुनता रहा।

बुजुर्ग ने समझाया—

“सुख केवल उस चीज में नहीं होता, सुख इस बात में भी होता है कि उस समय हमें उसकी कितनी जरूरत है और वह जरूरत कितनी जल्दी पूरी होती है।”

यही वजह है कि बहुत ज्यादा भूख लगने पर साधारण भोजन भी बेहद स्वादिष्ट लगता है।

तेज प्यास में साधारण पानी भी अमृत जैसा महसूस होता है।

दिनभर की थकान के बाद कुछ घंटे की गहरी नींद इंसान को बेहद सुख देती है।

अकेलेपन के समय किसी अपने का एक छोटा-सा फोन या प्यार भरी बात भी दिल को सुकून दे सकती है।

और जब शरीर किसी प्राकृतिक जरूरत के लिए बेचैन हो, तो दुनिया की तमाम महंगी और आरामदायक चीजें भी उस क्षण उतनी महत्वपूर्ण नहीं लगतीं।

राजा को अब अपने सवाल का जवाब मिल चुका था।

उसे समझ आ गया था कि दुनिया में कोई एक ऐसी चीज नहीं है जिसे हर इंसान और हर परिस्थिति में सबसे बड़ा सुख कहा जा सके।

जिस क्षण जिस जरूरत की सबसे ज्यादा कमी महसूस होती है, उसी जरूरत की पूर्ति का आनंद उस समय सबसे बड़ा महसूस हो सकता है।

धन जीवन को सुविधाजनक बना सकता है।

प्रेम जीवन को भावनात्मक रूप से समृद्ध कर सकता है।

अच्छा भोजन स्वाद का आनंद दे सकता है।

नींद शरीर को आराम दे सकती है।

पति-पत्नी का प्रेम और निकटता भावनात्मक तथा शारीरिक संतुष्टि दे सकती है।

लेकिन कई बार जिंदगी की सबसे बड़ी राहत किसी बहुत साधारण चीज में छिपी होती है—

एक गिलास पानी, एक निवाला भोजन, कुछ घंटे की नींद, किसी अपने का साथ या जरूरत के समय एक साफ-सुथरा शौचालय।

इसलिए जीवन की शायद सबसे सरल सीख यही है—

“जिस जरूरत की कमी उस समय सबसे ज्यादा महसूस होती है, उसकी पूर्ति का सुख भी उतना ही गहरा महसूस होता है।”

अब सवाल आपके लिए है—

अगर किसी व्यक्ति के पास करोड़ों रुपये हों, महंगी गाड़ियां हों, बड़ा घर हो और दुनिया की सारी सुख-सुविधाएं हों, लेकिन उसी समय उसे बहुत तेज शौच लगी हो, तो क्या करोड़ों रुपये उसे उस पल एक शौचालय जितनी राहत दे सकते हैं? 

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