दिखने में यह छिपकली आपको किसी आम घर की छिपकली जैसी लग सकती है, लेकिन टोके गेको वन्यजीव तस्करी के मामले में बेहद महत्वपूर्ण प्रजाति है। असम में हाल ही में हुई DRI की कार्रवाई ने एक बार फिर इस दुर्लभ वन्यजीव के अवैध कारोबार पर ध्यान खींचा है।
दरअसल, 22 सितंबर 2026 को Directorate of Revenue Intelligence (DRI) को असम में अवैध वन्यजीव व्यापार से जुड़ी एक खास जानकारी मिली थी। इसके आधार पर अधिकारियों ने मारियानी के बंदर चालिया गांव ग्राउंड पर दो लोगों को रोका। तलाशी के दौरान उनके पास से 86 जिंदा टोके गेको बरामद हुईं। अधिकारियों ने इन जीवों को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत जब्त कर लिया।
कार्रवाई के बाद दोनों पकड़े गए लोगों और बरामद की गई जिंदा टोके गेको को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए मारियानी रेंज वन कार्यालय को सौंप दिया गया। DRI के मुताबिक, यह कार्रवाई संरक्षित वन्यजीवों की अवैध तस्करी को रोकने के अभियान का हिस्सा थी।
आखिर टोके गेको इतनी खास क्यों है?
टोके गेको का वैज्ञानिक नाम Gekko gecko है। इसका शरीर आमतौर पर नीले-भूरे रंग का होता है और उस पर पीले, नारंगी या लाल रंग के धब्बे दिखाई दे सकते हैं। यह बड़ी गेको प्रजातियों में शामिल है। WWF-India के अनुसार, इसके नर लगभग 28 से 51 सेंटीमीटर तक और मादा लगभग 18 से 48 सेंटीमीटर तक लंबी हो सकती हैं, जबकि वजन करीब 150 से 400 ग्राम तक हो सकता है।
इसका नाम इसकी खास आवाज से भी जुड़ा है। टोके गेको की आवाज कुछ हद तक “टो-के” जैसी सुन
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