बलरामपुर में स्कूल के बाहर तेज डीजे के बीच मासूम छात्रा की मौत, डीजे मालिक और संचालक गिरफ्तार
उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में एक मासूम छात्रा की अचानक मौत ने तेज आवाज में बजने वाले डीजे और प्रशासनिक निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला डिवाइन पब्लिक स्कूल का है, जहां कक्षा दो में पढ़ने वाली सात वर्षीय वैष्णवी तिवारी की उस समय अचानक तबीयत बिगड़ गई, जब गणेश प्रतिमा विसर्जन का जुलूस स्कूल के पास से गुजर रहा था और उसमें तेज आवाज में डीजे बज रहा था। घटना के बाद सामने आए सीसीटीवी फुटेज ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया।
बताया गया कि घटना 21 सितंबर की सुबह करीब 11 बजे की है। वैष्णवी स्कूल की पहली मंजिल पर अपनी कक्षा में बैठी थी। इसी दौरान बाहर से विसर्जन जुलूस गुजर रहा था। सीसीटीवी फुटेज में कक्षा के अंदर बच्चे दिखाई दे रहे हैं और बाहर से तेज आवाज सुनाई देती है। कुछ देर बाद वैष्णवी अचानक अपनी सीट पर गिरती नजर आती है। शिक्षकों और स्कूल स्टाफ ने उसे संभालने की कोशिश की और अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी।
परिवार ने डीजे की आवाज को लेकर उठाए सवाल
बच्ची के परिवार ने आरोप लगाया कि जुलूस में बज रहे तेज डीजे और उससे पैदा हो रहे कंपन के दौरान वैष्णवी की तबीयत बिगड़ी। परिवार की ओर से यह भी दावा किया गया कि बच्ची को बार-बार स्वास्थ्य संबंधी आघात आया। हालांकि, डीजे की आवाज और बच्ची की मौत के बीच सीधा चिकित्सकीय संबंध अभी आधिकारिक तौर पर स्थापित नहीं हुआ है। पुलिस के मुताबिक मौत के वास्तविक कारण का पता जांच और चिकित्सकीय निष्कर्षों के आधार पर ही चलेगा।
पुलिस ने की कार्रवाई
मामला सामने आने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और सीसीटीवी फुटेज सहित अन्य साक्ष्यों की जांच की। ताजा जानकारी के मुताबिक पुलिस ने डीजे मालिक चंद्र प्रकाश वर्मा और डीजे संचालक रामपाल सैनी को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा मेवालाल पुलिस चौकी प्रभारी शैलेंद्र कुमार यादव को निलंबित किया गया है, जबकि कोतवाली नगर निरीक्षक संतोष कुमार मिश्रा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। पुलिस डीजे वाहन और ध्वनि उपकरणों को भी जांच के लिए अपने कब्जे में लेकर यह पता कर रही है कि निर्धारित ध्वनि मानकों का उल्लंघन हुआ था या नहीं।
स्कूलों के आसपास ध्वनि प्रदूषण पर नियम
ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण नियमों के तहत अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और अदालतों के आसपास कम-से-कम 100 मीटर के क्षेत्र को राज्य सरकार द्वारा साइलेंस जोन घोषित किया जा सकता है। नियमों में अलग-अलग क्षेत्रों के लिए ध्वनि की अधिकतम स्वीकार्य सीमा भी निर्धारित है। इसके अलावा लाउडस्पीकर या सार्वजनिक संबोधन प्रणाली के इस्तेमाल के लिए अनुमति संबंधी प्रावधान मौजूद हैं।
सुप्रीम कोर्ट भी ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने और निर्धारित मानकों के पालन पर जोर दे चुका है। अदालत के निर्देशों में लाउडस्पीकर और तेज आवाज वाले ध्वनि उपकरणों के इस्तेमाल को लेकर अनुमति तथा रात के समय उपयोग पर प्रतिबंध जैसे प्रावधानों का उल्लेख किया गया है।
वैष्णवी की मौत ने अब यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि धार्मिक और सामाजिक आयोजनों के दौरान ध्वनि सीमा तथा संवेदनशील स्थानों के आसपास नियमों का पालन किस तरह सुनिश्चित किया जाता है। मामले की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बच्ची की मौत का वास्तविक चिकित्सकीय कारण क्या था और तेज डीजे की भूमिका कितनी थी। फिलहाल पुलिस की कार्रवाई और जांच जारी है।
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