हार्ट अटैक का खतरा कम करने के लिए सिर्फ दवा नहीं, खान-पान भी जरूरी! कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड को संभालने के 6 आसान तरीके जानिए

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कोलेस्ट्रॉल शरीर के लिए पूरी तरह खराब नहीं होता। शरीर को कुछ मात्रा में कोलेस्ट्रॉल की जरूरत होती है, लेकिन जब रक्त में खराब कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल का स्तर बढ़ जाता है, तो लंबे समय में धमनियों में प्लाक जमा होने का जोखिम बढ़ सकता है। इसी तरह ट्राइग्लिसराइड का लगातार बढ़ा हुआ स्तर भी हृदय स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय हो सकता है।

इसीलिए कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड को नियंत्रित रखने के लिए केवल दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय खान-पान और जीवनशैली पर भी ध्यान देना जरूरी है। कुछ सामान्य खाद्य पदार्थ संतुलित आहार का हिस्सा बनकर हृदय स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकते हैं।

1. बादाम और अखरोट को डाइट में शामिल करें

बादाम और अखरोट में असंतृप्त वसा, फाइबर और कई अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं। इन्हें संतुलित मात्रा में खाने से हृदय के लिए अनुकूल आहार तैयार करने में मदद मिल सकती है।

रातभर बादाम या अखरोट भिगोकर खाने की परंपरा काफी आम है, लेकिन इन्हें भिगोना जरूरी नहीं है। मुख्य बात यह है कि इन्हें बिना अतिरिक्त नमक, चीनी या तली हुई अवस्था के सीमित मात्रा में खाया जाए।

2. अलसी के बीज हो सकते हैं उपयोगी

अलसी में फाइबर और ओमेगा-3 वसा अम्ल का एक पौध-आधारित रूप पाया जाता है। इसे दही, दलिया, सलाद या अन्य भोजन में थोड़ी मात्रा में शामिल किया जा सकता है।

हालांकि किसी एक खाद्य पदार्थ से कोलेस्ट्रॉल तुरंत सामान्य होने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। पूरे आहार का पैटर्न ज्यादा महत्वपूर्ण होता है।

3. भोजन में फाइबर बढ़ाएं

घुलनशील फाइबर कोलेस्ट्रॉल प्रबंधन में विशेष रूप से उपयोगी माना जाता है। इसके लिए ओट्स, जौ, दालें, फल, सब्जियां और अन्य फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ भोजन में शामिल किए जा सकते हैं।

फाइबर बढ़ाने के साथ पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है। अचानक बहुत ज्यादा फाइबर लेने के बजाय इसकी मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाना बेहतर रहता है।

4. तले और अत्यधिक वसायुक्त भोजन को सीमित करें

कोलेस्ट्रॉल प्रबंधन में केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि कौन-सी चीज खानी है। यह भी महत्वपूर्ण है कि संतृप्त वसा और अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन कितना किया जा रहा है।

बार-बार तला हुआ भोजन, अधिक मक्खन या घी, अत्यधिक वसायुक्त मांस और कई पैकेज्ड खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन कम करना हृदय-स्वस्थ खान-पान का हिस्सा हो सकता है।

5. ग्रीन टी को भोजन का विकल्प न समझें

ग्रीन टी में पॉलीफेनॉल जैसे पौध-आधारित यौगिक पाए जाते हैं और इसका सीमित सेवन संतुलित जीवनशैली का हिस्सा हो सकता है। लेकिन यह कहना सही नहीं होगा कि भोजन के बाद ग्रीन टी पीने से शरीर का फैट अपने आप टूटने लगेगा या बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल ठीक हो जाएगा।

अगर किसी व्यक्ति को कैफीन से परेशानी होती है, तो उसे इसके सेवन की मात्रा पर भी ध्यान देना चाहिए।

6. दालचीनी और अर्जुन की छाल को लेकर सावधानी जरूरी

दालचीनी और अर्जुन की छाल का इस्तेमाल पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में लंबे समय से किया जाता रहा है। इनके संभावित स्वास्थ्य प्रभावों पर अध्ययन भी हुए हैं, लेकिन इन्हें कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड या हृदय रोग का प्रमाणित इलाज मानना उचित नहीं है।

खासकर यदि कोई व्यक्ति पहले से ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल या हृदय संबंधी दवाएं ले रहा है, तो किसी हर्बल पाउडर या अर्क को नियमित रूप से शुरू करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

कोलेस्ट्रॉल कम करने में सबसे जरूरी क्या है?

हृदय स्वास्थ्य के लिए एक ही नुस्खे पर निर्भर रहने के बजाय पूरी जीवनशैली पर ध्यान देना ज्यादा महत्वपूर्ण है। संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, स्वस्थ वजन बनाए रखना, धूम्रपान से बचना और पर्याप्त नींद इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

यदि जांच में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल या ट्राइग्लिसराइड काफी अधिक पाए गए हैं, तो केवल घरेलू उपायों के भरोसे दवा बंद नहीं करनी चाहिए। डॉक्टर जरूरत के अनुसार लिपिड प्रोफाइल और अन्य जोखिम कारकों को देखते हुए उपचार की सलाह दे सकते हैं।

जरूरी बात

बादाम, अखरोट, अलसी और फाइबर युक्त भोजन हृदय-स्वस्थ आहार में जगह बना सकते हैं, लेकिन इनमें से कोई भी चीज हार्ट अटैक से बचाने की गारंटी नहीं देती। इसी तरह “नसों की सफाई” जैसे दावों को भी शाब्दिक रूप से नहीं लेना चाहिए।

अगर सीने में दबाव या दर्द, सांस फूलना, अचानक पसीना आना, मतली या दर्द का हाथ, पीठ, गर्दन या जबड़े तक फैलना जैसे लक्षण हों, तो घरेलू उपाय आजमाने के बजाय तुरंत आपात चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

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