गाजियाबाद में रहने वाले 36 वर्षीय करण की शादी को छह साल हो चुके थे। पत्नी पूजा का पुराना फोन कई महीनों से अलमारी में पड़ा था। एक दिन करण को पुराने फोटो और जरूरी दस्तावेज निकालने के लिए फोन चालू करना पड़ा।
फोन में उसे एक ऐसा नंबर दिखाई दिया, जिसे देखकर वह कुछ देर रुक गया। उस नंबर से पिछले दो सालों में कई बार बातचीत हुई थी, लेकिन संपर्क सूची में नाम सेव नहीं था।
उसी रात उस नंबर से अचानक एक संदेश आया—
“कल शाम 6 बजे पुराने रेलवे पुल के पास अकेले मिलना। तुम्हारी पत्नी से जुड़ी नहीं, तुम्हारे अपने परिवार से जुड़ी बात है।”
करण के मन में कई सवाल उठने लगे।
अगले दिन वह बताए गए स्थान पर पहुंचा। वहां करीब 50 वर्षीय एक व्यक्ति उसका इंतजार कर रहा था।
उस व्यक्ति ने बिना किसी भूमिका के एक पुरानी फाइल करण के हाथ में रख दी।
फाइल में करीब आठ साल पुराने बैंक दस्तावेज, जमीन की रसीदें और कुछ तस्वीरें थीं।
करण ने पूछा, “ये सब क्या है?”
व्यक्ति ने बताया कि कई साल पहले करण के पिता ने एक जमीन खरीदने के लिए बड़ी रकम दी थी। सौदा पूरा होने से पहले उनकी अचानक मृत्यु हो गई और परिवार को बताया गया कि जमीन का मामला खत्म हो चुका है।
लेकिन दस्तावेज कुछ और कहानी बता रहे थे।
फाइल में जमीन की रजिस्ट्री की एक प्रति थी, जिस पर करण के पिता के हस्ताक्षर थे। साथ ही एक दूसरी प्रति भी थी, जिसमें उसी जमीन को किसी दूसरे व्यक्ति के नाम दिखाया गया था।
करण को शक हुआ कि उसके परिवार के साथ धोखा हुआ था।
फिर उस व्यक्ति ने सबसे बड़ा खुलासा किया।
उसने बताया कि वह करण के पिता का पुराना लेखाकार था और उसे कई साल पहले पता चला था कि जमीन के असली दस्तावेज किसी ने जानबूझकर गायब कर दिए थे।
करण ने पूछा, “लेकिन मेरी पत्नी के फोन में आपका नंबर क्यों था?”
लेखाकार ने बताया कि पूजा को उसके पिता की पुरानी फाइलों से इस मामले की जानकारी मिली थी। वह पिछले दो सालों से चुपचाप पुराने दस्तावेज जुटा रही थी और उसी से संपर्क में थी।
करण को पहली बार समझ आया कि पत्नी का वह पुराना फोन किसी छिपे रिश्ते का सबूत नहीं था।
पूजा अपने ससुर की संपत्ति से जुड़ा पुराना मामला सुलझाने की कोशिश कर रही थी।
लेकिन फाइल के आखिरी पन्ने पर लिखा एक नाम देखकर करण के होश उड़ गए।
वह नाम उसके अपने चाचा का था।
अब सवाल सिर्फ जमीन का नहीं था—बल्कि यह था कि परिवार में इतने वर्षों तक यह सच किसने छिपाया और उसके पिता की मौत के बाद असली दस्तावेज आखिर गायब कैसे हुए।
करण ने पूरी फाइल लेकर कानूनी सलाह लेने का फैसला किया।
जिस नंबर को देखकर करण को पत्नी पर शक हुआ था, वही नंबर आखिरकार उसे अपने परिवार के 8 साल पुराने रहस्य तक ले गया।
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