आजकल सोशल मीडिया पर स्वास्थ्य से जुड़ी कई जानकारियां तेजी से वायरल होती हैं। ऐसी ही एक जानकारी में दावा किया जाता है कि रात में पैरों में दर्द, सांस लेने में परेशानी, अचानक पसीना आना, नींद न आना और पैरों का ठंडा रहना शरीर में बढ़े हुए बैड कोलेस्ट्रॉल के पांच संकेत हैं।
लेकिन इस दावे को समझना जरूरी है, क्योंकि हाई कोलेस्ट्रॉल की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यह अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ता रहता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान और रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र के अनुसार, अधिकांश लोगों को पता ही नहीं चलता कि उनका कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है। इसका पता रक्त जांच यानी लिपिड प्रोफाइल से चलता है।
बैड कोलेस्ट्रॉल आखिर है क्या?
कोलेस्ट्रॉल शरीर के लिए जरूरी वसा जैसा पदार्थ है। इसमें एलडीएल और एचडीएल सहित अलग-अलग प्रकार शामिल होते हैं। एलडीएल को आम तौर पर “बैड कोलेस्ट्रॉल” कहा जाता है, क्योंकि इसका स्तर अधिक होने पर धमनियों की दीवारों में प्लाक जमा होने का खतरा बढ़ सकता है। इससे समय के साथ हृदय रोग और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ सकता है।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि एलडीएल बढ़ते ही शरीर रात में पांच निश्चित संकेत देने लगेगा।
1. रात में पैरों में दर्द या ऐंठन
पैरों में दर्द या ऐंठन के कई कारण हो सकते हैं। हालांकि, यदि चलने या शारीरिक गतिविधि के दौरान पैरों में दर्द शुरू होता है और आराम करने पर कम हो जाता है, तो यह पेरिफेरल आर्टरी डिजीज यानी पैरों की धमनियों में रक्त प्रवाह कम होने का संकेत हो सकता है।
इस बीमारी का एक कारण धमनियों में प्लाक का जमना हो सकता है और हाई कोलेस्ट्रॉल इसका एक जोखिम कारक है। लेकिन केवल रात में होने वाली ऐंठन देखकर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि कोलेस्ट्रॉल बढ़ गया है।
2. सांस लेने में परेशानी
रात में लेटते समय सांस फूलना कई कारणों से हो सकता है। हृदय या फेफड़ों से जुड़ी समस्याओं से लेकर अन्य स्थितियां भी इसके पीछे हो सकती हैं।
इसलिए सांस लेने में अचानक या लगातार परेशानी हो तो इसे केवल कोलेस्ट्रॉल से जोड़कर घर पर इंतजार करना उचित नहीं है। खासकर अगर सांस फूलने के साथ सीने में दबाव या दर्द, चक्कर, अत्यधिक कमजोरी या बेहोशी जैसा महसूस हो तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
3. रात में अचानक पसीना आना
रात में पसीना आने के पीछे कमरे का तापमान, संक्रमण, हार्मोनल बदलाव, दवाएं, तनाव और कई अन्य कारण हो सकते हैं। इसे अकेले हाई कोलेस्ट्रॉल का संकेत नहीं माना जा सकता।
अगर अत्यधिक पसीना बार-बार हो रहा है और उसके साथ सीने में दर्द, सांस फूलना या बेचैनी जैसी समस्या हो रही है, तो चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
4. नींद न आना
अनिद्रा के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन नींद न आने को सीधे बढ़े हुए एलडीएल का संकेत मानना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है। हाई कोलेस्ट्रॉल की पहचान नींद के पैटर्न से नहीं, बल्कि रक्त जांच से की जाती है।
5. पैर या पंजे ठंडे रहना
ठंडे पैर या पंजे कुछ लोगों में रक्तसंचार संबंधी समस्या का संकेत हो सकते हैं। पीएडी में पैरों की त्वचा ठंडी महसूस होना, पंजों में सुन्नपन, घाव का देर से भरना और चलने पर दर्द जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। लेकिन हर व्यक्ति के ठंडे पैर का कारण खराब रक्तसंचार या कोलेस्ट्रॉल नहीं होता।
फिर कैसे पता चलेगा कि बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ा है?
इसका सबसे भरोसेमंद तरीका लिपिड प्रोफाइल रक्त जांच है। इसमें आम तौर पर एलडीएल, एचडीएल, ट्राइग्लिसराइड और कुल कोलेस्ट्रॉल की जानकारी मिलती है। आपकी उम्र, परिवार में हृदय रोग का इतिहास और अन्य जोखिम कारकों के आधार पर डॉक्टर यह तय कर सकते हैं कि जांच कितनी बार करानी चाहिए।
कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने के लिए क्या करें?
नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार, स्वस्थ वजन बनाए रखना और धूम्रपान से बचना हृदय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। भोजन में संतृप्त वसा और अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों को कम करना भी मददगार हो सकता है।
अगर जांच में एलडीएल ज्यादा आता है तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर न रहें। कुछ लोगों को जीवनशैली में बदलाव के साथ चिकित्सकीय उपचार की भी जरूरत पड़ सकती है। दवा शुरू होने पर उसे अपने मन से बंद या कम नहीं करना चाहिए।
सबसे जरूरी बात: हाई कोलेस्ट्रॉल को पहचानने के लिए रात के पांच लक्षणों का इंतजार न करें। क्योंकि यह समस्या अक्सर बिना किसी चेतावनी के बढ़ती है, इसलिए जरूरत के अनुसार समय-समय पर लिपिड प्रोफाइल कराना ही सही तरीका है।
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